भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता (FTA)
भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आर्थिक कूटनीति में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इससे लाखों रोजगार सृजित होने और भारत के युवाओं एवं किसानों के लिए व्यापक अवसर पैदा होने की उम्मीद है, जिसका प्रभाव वैश्विक अर्थव्यवस्था के एक चौथाई हिस्से पर पड़ेगा।
समझौते की मुख्य विशेषताएं
- व्यापक साझेदारी: यह व्यापार से परे कृत्रिम बुद्धिमत्ता, रक्षा और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों में सहयोग को भी शामिल करती है।
- आर्थिक स्थिरता: यह नियम-आधारित व्यापार और आर्थिक नीति स्थिरता को बढ़ावा देता है, जिससे निवेश के लिए भारत का आकर्षण बढ़ता है।
- बाजार पहुंच: भारत के यूरोपीय संघ को होने वाले 99% से अधिक निर्यात के लिए अभूतपूर्व बाजार पहुंच सुनिश्चित करता है, जिससे मेक इन इंडिया पहल को समर्थन मिलता है।
- श्रम प्रधान क्षेत्र: लगभग 33 अरब डॉलर के निर्यात पर 10% तक के टैरिफ को समाप्त करके वस्त्र, परिधान, चमड़ा और जूते जैसे क्षेत्रों को बढ़ावा देता है।
- सशक्तिकरण और एकीकरण: श्रमिकों, कारीगरों, महिलाओं, युवाओं और लघु एवं मध्यम उद्यमों को सशक्त बनाता है; भारतीय व्यवसायों को वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में एकीकृत करता है।
अवसर और रणनीतिक महत्व
- सेवा क्षेत्र में वृद्धि: पेशेवरों के लिए गतिशीलता को बढ़ाती है, जिससे शिक्षा, IT, वित्तीय सेवाओं और कंप्यूटर के क्षेत्र में अवसर खुलते हैं।
- सतत आर्थिक विकास: यह भारत की आर्थिक सुधारों और विवेकपूर्ण राजकोषीय प्रबंधन की व्यापक रणनीति के अनुरूप है।
- गुणवत्ता आश्वासन: विकसित भारत 2047 की परिकल्पना के अनुरूप भारतीय विनिर्माण में गुणवत्ता सुधार पर जोर देता है।
मोदी सरकार का रणनीतिक दृष्टिकोण
- वार्ता रणनीति: गहन परामर्श के बाद ही व्यापार समझौते संपन्न किए जाते हैं, जिससे भारत के प्रमुख रोजगार सृजन करने वाले क्षेत्रों को लाभ सुनिश्चित होता है।
- पूर्व सरकारों से अंतर: पूर्व यूपीए सरकार के विपरीत, जिसने पर्याप्त परामर्श के बिना बाजारों को खोल दिया था, वर्तमान सरकार एक संतुलित और रणनीतिक दृष्टिकोण सुनिश्चित करती है।
- नेतृत्व और दूरदर्शिता: भारत के मूल हितों की रक्षा करते हुए निर्णायक नेतृत्व का प्रदर्शन करते हुए बाजारों का विस्तार और रोजगार सृजन करते हैं।