एआई इम्पैक्ट समिट और निवेश के वादे
नई दिल्ली में आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर में महत्वपूर्ण निवेश प्रतिबद्धताओं पर प्रकाश डाला गया।
- रिलायंस इंडस्ट्रीज: एआई और डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए 110 बिलियन डॉलर देने का वादा किया।
- अदानी एंटरप्राइजेज: अगले दशक में हरित ऊर्जा से चलने वाले डेटा केंद्रों में 100 अरब डॉलर का निवेश करने के लिए प्रतिबद्ध है।
- माइक्रोसॉफ्ट: पिछले साल उसने शुरू में 17.5 बिलियन डॉलर का वादा किया था और अब विकासशील देशों में एआई इंफ्रास्ट्रक्चर में 50 बिलियन डॉलर के निवेश की योजना बना रहा है।
निवेश का औचित्य
ये निवेश भारत में डेटा की उच्च खपत जैसे संरचनात्मक कारकों के अनुरूप हैं, जो सालाना दोहरे अंकों में बढ़ रही है। स्थानीय डेटा केंद्रों का निर्माण डेटा संरक्षण और संप्रभुता की दिशा में वैश्विक आंदोलनों के अनुरूप है। भारत में क्लाउड क्षमता का उपयोग करने वाली कंपनियों के लिए भारतीय सरकार द्वारा 20 साल की कर छूट का प्रस्ताव निवेश को और भी प्रोत्साहित करता है।
चुनौतियाँ और विचारणीय बातें
- विद्युत एवं जल संसाधन:
- डेटा केंद्रों की परिचालन लागत काफी हद तक बिजली आपूर्ति पर निर्भर करती है, जो कुल खर्चों का 20-40% होती है।
- 2030 तक डेटा सेंटर की क्षमता को 9 गीगावॉट तक बढ़ाने से भारत की 3% बिजली की खपत होगी, जो प्रतिस्पर्धी बिजली दरों और कुशल कैप्टिव बिजली व्यवस्थाओं की आवश्यकता को उजागर करता है।
- औद्योगिक, शहरी और कृषि उपयोगकर्ताओं के बीच मौजूदा विवादों के कारण जल की खपत एक गंभीर चुनौती बनी हुई है।
- लाभप्रदता और जोखिम:
- बड़े पैमाने पर किए जाने वाले निवेश उनकी संभावित लाभप्रदता पर निर्भर करते हैं।
- वैश्विक कंपनियों ने निवेश बढ़ाया है, जिससे उनके निवेश पर प्रतिफल की समयसीमा को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
- वित्तीय क्षेत्रों और सरकार के लिए संभावित जोखिमों के प्रति सतर्क रहना अत्यंत महत्वपूर्ण है।
- आर्थिक स्वतंत्रता:
- यह सुनिश्चित करना कि निवेश से संसाधनों या बाजार के लिए विशिष्ट भौगोलिक क्षेत्रों पर निर्भरता न हो।