वास्तविक समय में कौशल की मांग और नीतिगत निहितार्थ
यह लेख कौशल विकास पर ध्यान केंद्रित करके भारत के जनसांख्यिकीय लाभांश का लाभ उठाने की तात्कालिकता पर बल देता है, जो 2040 तक समाप्त हो जाएगा। यह भारत की स्थिति की तुलना यूरोपीय संघ और चीन जैसे देशों से करता है, जहाँ व्यावसायिक शिक्षा माध्यमिक शिक्षा में गहराई से एकीकृत है।
भारत में व्यावसायिक शिक्षा की वर्तमान स्थिति
- भारत में माध्यमिक स्तर के छात्रों में से केवल 1.3% ही व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में हैं, जबकि कुछ यूरोपीय संघ के देशों और चीन में यह आंकड़ा 50% है।
- भारत की राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) का लक्ष्य 2025 तक 50% शिक्षा को व्यावसायिक शिक्षा से जोड़ना है, लेकिन इस "पहुँच" की आलोचना इसके प्रतिबद्धता के अभाव के कारण की जाती है।
कौशल वित्तपोषण में मुद्दे
- व्यावसायिक शिक्षा के लिए धनराशि शिक्षा बजट का मात्र 2% है, जबकि चीन और जर्मनी में यह 11% है।
- भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) ने कौशल कार्यक्रमों में वित्तीय अनियमितताओं की रिपोर्ट दी है, जिसमें अवैध बैंक खातों और कम प्लेसमेंट दरों पर प्रकाश डाला गया है।
- सुझाए गए सुधारों में PMKVY निधि को कौशल ऋण के रूप में पुनर्आवंटित करना और AI और डिजिटल कौशल जैसे लक्षित प्रशिक्षण के लिए कौशल वाउचर का उपयोग करना शामिल है।
नवीन वित्तपोषण मॉडल
- उद्योगों पर कौशल कर लगाने से स्थायी वित्तपोषण प्राप्त हो सकता है, यह एक ऐसा मॉडल है जिसका उपयोग 90 से अधिक देशों में किया जा रहा है।
- प्रस्तावित प्रतिपूर्ति योग्य उद्योग अंशदान (RIC) नियोक्ताओं को फर्म के आकार और वेतन से अंशदान को जोड़कर कौशल विकास में शामिल करेगा।
वास्तविक समय की कौशल मांग को एकीकृत करना
- कौशल अंतराल को बेहतर ढंग से समझने के लिए, नीति निर्माण में जॉब बोर्ड और AI मॉडलिंग से प्राप्त वास्तविक समय के डेटा का उपयोग किया जाना चाहिए।
- नेशनल करियर सर्विस (NCS) पोर्टल के माध्यम से बेहतर डेटा साझाकरण से श्रम बाजार सूचना प्रणालियों में सुधार हो सकता है।