सुर्ख़ियों में क्यों?
भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) ने हाल ही में संसद में "प्रधान मंत्री कौशल विकास योजना के तहत कौशल विकास" शीर्षक से एक प्रदर्शन लेखा-परीक्षण रिपोर्ट प्रस्तुत की है।
अन्य संबंधित तथ्य
- रिपोर्ट में योजना के अंतर्गत डेटा की शुद्धता में गंभीर त्रुटियों, अवसंरचनात्मक कमियों, तथा निम्न प्लेसमेंट दर जैसी प्रमुख समस्याओं को रेखांकित किया गया है।
PMKVY के बारे में
- शुरुआत: 2015 में कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय (MSDE) द्वारा।
- कार्यान्वयन एजेंसी: राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (NSDC)।
- लक्ष्य: भारत में कौशल विकास को प्रोत्साहित करना और बढ़ावा देना।
- उद्देश्य: भारतीय युवाओं को उद्योग-प्रासंगिक कौशल प्रशिक्षण उपलब्ध कराकर बेहतर आजीविका के अवसर सुनिश्चित करना तथा अनौपचारिक रूप से अर्जित कौशलों को प्रमाणन के माध्यम से मान्यता प्रदान करना।
- संघीय स्वरूप: यह योजना केंद्रीय और राज्य घटकों के माध्यम से लागू की जा रही है। इसमें NSDC और राज्य कौशल विकास मिशनों को क्रमशः 75 और 25 प्रतिशत भौतिक लक्ष्य और वित्तीय आवंटन निर्धारित किया गया है।
- उपलब्धियां: वर्ष 2015 से अब तक देशभर में 1.6 करोड़ से अधिक युवाओं को प्रशिक्षण प्रदान किया गया है। योजना के प्रथम तीन चरणों के दौरान 1.10 करोड़ लाभार्थियों को कौशल प्रमाणन दिया गया।

CAG द्वारा रिपोर्ट में उजागर किए गए प्रमुख मुद्दे
- निम्न प्लेसमेंट दर: अल्पकालिक प्रशिक्षण तथा विशेष परियोजना घटकों के अंतर्गत प्रमाणित उम्मीदवारों में से केवल 41% को रोजगार प्राप्त हुआ।
- प्लेसमेंट मुख्य रूप से परिधान क्षेत्रक (जैसे, स्वनियोजित दर्जी) में केंद्रित थे।
- क्षेत्रीय संकेन्द्रण: पांच क्षेत्रकों (परिधान, इलेक्ट्रॉनिक्स, खुदरा, लॉजिस्टिक्स और सौंदर्य) की कुल प्लेसमेंट में 58% से अधिक हिस्सेदारी थी।
- डेटा शुद्धता में त्रुटियां:
- बैंक खातों का विवरण: प्रतिभागियों के 94.53% (लगभग 90 लाख मामलों) में बैंक विवरण शून्य, 'null' या रिक्त दर्ज पाए गए।
- अवैध प्रविष्टियाँ: "abc@gmail.com" जैसे काल्पनिक ईमेल तथा "1111111111" जैसे मोबाइल नंबरों का व्यापक उपयोग पाया गया।
- पात्रता मानदंडों का उल्लंघन: आयु, शैक्षणिक योग्यता एवं कार्यानुभव से संबंधित निर्धारित मानदंडों की अनदेखी कर अभ्यर्थियों को प्रमाणित किया गया। उदाहरणार्थ, 1,142 अल्पवयस्क उम्मीदवारों को ड्राइवर/शॉफर भूमिकाओं के लिए प्रमाणित किया गया।
- तकनीकी योग्यता में कमी: जिन भूमिकाओं के लिए पूर्व तकनीकी शिक्षा आवश्यक थी, उनमें प्रमाणित अभ्यर्थियों में से 85.40% केवल बुनियादी साक्षरता वाले पाए गए।
- अपर्याप्त निगरानी:
- समान फोटोग्राफ: विभिन्न राज्यों में अलग-अलग प्रमाणन बैचों के लिए एक ही फोटोग्राफ के उपयोग के मामले सामने आए।
- बंद प्रशिक्षण केंद्र: भौतिक सत्यापन में पाया गया कि प्रशिक्षण अवधि के दौरान कई प्रशिक्षण केंद्र (TCs) बंद थे।
- निधि का कम उपयोग: जुलाई 2023 तक PMKVY 2.0 के लगभग 337.16 करोड़ रुपये का उपयोग नहीं किया गया। अपर्याप्त जानकारी के कारण 34 लाख से अधिक प्रमाणित उम्मीदवारों को भुगतान नहीं किया गया।
- कौशल-अंतराल संबंधित विसंगतियां: प्रशिक्षण निरंतर रूप से राष्ट्रीय कौशल विकास और उद्यमिता नीति (NPSDE) में चिन्हित कौशल आवश्यकताओं के अनुरूप नहीं है।
- कौशल विकास योजना की कमी: चरण III में राज्य और जिला योजनाओं के आधार पर एक राष्ट्रीय कौशल विकास योजना की परिकल्पना की गई थी, किंतु राष्ट्रीय योजना तैयार नहीं की गई तथा चयनित 8 राज्यों में से केवल 2 राज्यों ने राज्य योजनाएं तैयार की।
- फर्जी एजेंसियां: प्रमाणन उन एजेंसियों के माध्यम से दिए गए जो या तो अस्तित्व में नहीं थी या अपात्र थीं।
CAG द्वारा सिफारिशें
- बाजार के साथ संरेखण: MSDE को विभिन्न राज्यों में सूक्ष्म स्तर पर पहचानी गई कौशल-अंतराल तथा विशिष्ट नौकरी-भूमिका की मांग के अनुरूप कौशल प्रशिक्षण को संरेखित करना चाहिए।
- रणनीतिक योजना: दीर्घकालिक निरंतरता सुनिश्चित करने हेतु राष्ट्रीय कौशल विकास योजना (NSDP) की तैयारी को शीघ्र पूर्ण किया जाए।
- UDISE के साथ एकीकरण: स्कूल/कॉलेज छोड़ने वाले छात्रों की बेहतर पहचान और सत्यापन के लिए यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इनफार्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन (UDISE) डेटाबेस का उपयोग किया जाना चाहिए।
- सख्त IT नियंत्रण: डुप्लिकेट या अमान्य डेटा प्रविष्टियों को रोकने के लिए अनिवार्य आधार-आधारित e-KYC और सिस्टम सत्यापन जांच लागू किया जाना चाहिए।
- उन्नत निगरानी: एक डेटा प्रतिधारण नीति बनाने और प्रशिक्षण के बाद की मूल्यांकन गतिविधियों की निगरानी को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है।
निष्कर्ष
यद्यपि PMKVY ने भारत में अल्पकालिक कौशल विकास के लिए एक विशाल अवसंरचना तैयार की है, किंतु CAG की लेखा-परीक्षा रिपोर्ट ने डेटा प्रबंधन और परिणाम ट्रैकिंग में महत्वपूर्ण प्रणालीगत कमजोरियों को उजागर किया है। PMKVY 4.0 की ओर संक्रमण, इन चुनौतियों को दूर करने का एक महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है। स्किल इंडिया डिजिटल हब (SIDH) के प्रभावी उपयोग के माध्यम से अधिक पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सकती है, जिससे कौशल विकास के प्रयास केवल प्रमाणन तक सीमित न रहकर वास्तविक एवं सार्थक रोजगार सृजन की दिशा में अग्रसर हों।
