जल जीवन मिशन (JJM) का पुनर्गठन और विस्तार
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जल जीवन मिशन (JJM) के पुनर्गठन और 2028 तक इसके विस्तार को मंजूरी दे दी है। जल शक्ति मंत्रालय द्वारा 2019 में शुरू किए गए इस मिशन ने ग्रामीण क्षेत्रों में पाइप से पानी की उपलब्धता में उल्लेखनीय वृद्धि की है, जिससे ग्रामीण घरों के कवरेज में 17% से बढ़कर 81% से अधिक की वृद्धि हुई है।
JJM 2.0: अवलोकन और वित्तपोषण
- बढ़ी हुई राशि: ₹8.69 ट्रिलियन, जिसमें से ₹3.59 ट्रिलियन केंद्रीय सहायता के रूप में है, जबकि शुरुआत में यह ₹2.08 ट्रिलियन थी।
- नागरिक-केंद्रित दृष्टिकोण: कार्यक्रम को उपयोगिता-आधारित बनाने पर ध्यान केंद्रित करना।
- सुजलम भारत: जल आपूर्ति की बेहतर निगरानी के लिए गांवों को विशिष्ट सेवा-क्षेत्र आईडी आवंटित करने हेतु एक प्रस्तावित राष्ट्रीय डिजिटल ढांचा।
सामुदायिक भागीदारी और जवाबदेही
- ग्राम पंचायतों की भूमिका: जल और स्वच्छता प्रबंधन में सुदृढ़ीकरण।
- सामुदायिक भागीदारी: जल प्रणाली की समीक्षा में समुदाय को शामिल करने के लिए "जल उत्सव" जैसी पहल।
कार्यान्वयन में चुनौतियाँ
- स्थायित्व संबंधी समस्याएं: अनियमित जल आपूर्ति और अपर्याप्त बुनियादी ढांचा रखरखाव।
- बजट उपयोग: आवंटित राशि की तुलना में व्यय में कमी आई है, जो कार्यान्वयन में बाधाओं को इंगित करता है।
जल स्थिरता संबंधी चिंताएँ
भारत में पानी की भारी कमी है, और ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की आपूर्ति में भूजल की महत्वपूर्ण भूमिका है।
- भूमिगत जल पर निर्भरता: ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल की 85% से अधिक मांग भूमिगत जल से पूरी होती है।
- स्थिरता उपाय: दीर्घकालिक जल उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए जलभंडार पुनर्भरण, वर्षा जल संचयन और जलसंभर विकास की आवश्यकता।
वैश्विक लक्ष्यों के साथ संरेखण
इस मिशन का उद्देश्य सतत विकास लक्ष्य 6.1 को आगे बढ़ाना है, जिसके तहत 2030 तक सभी को सुरक्षित और किफायती पेयजल उपलब्ध कराना सुनिश्चित किया जाएगा, साथ ही ग्रामीण जल सुरक्षा को भी बढ़ाया जाएगा।