'महा' (MAHA) जल मिशन अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (ANRF) और केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय द्वारा शुरू किया गया एक कार्यक्रम है। इसका परिव्यय 200 करोड़ रुपये है।
- इस मिशन में 'महा' (MAHA) से आशय है; मिशन फॉर एडवांसमेंट इन हाई-इम्पैक्ट एरियाज।
'महा' जल मिशन की मुख्य विशेषताएं
- उद्देश्य: अलग-अलग क्षेत्रों के चयनित समूहों (विश्वविद्यालयों, स्टार्टअप्स, MSMEs, उद्योगों आदि) को उच्च प्रभाव वाले नवाचारी (इनोवेटिव) और विस्तार योग्य जल सुरक्षा समाधानों के तकनीकी विकास, क्षेत्र में परीक्षण, सत्यापन और कार्यान्वयन के लिए 20 करोड़ रुपये तक की सहायता प्रदान करना।

- पांच प्राथमिक विषय (थीम्स):
- जल संसाधन का आकलन और सतत प्रबंधन;
- पेयजल;
- जल की गुणवत्ता और पारिस्थितिक स्वास्थ्य;
- जल उपयोग दक्षता (वाटर यूज एफिशिएंसी) और चक्रीय अर्थव्यवस्था (सर्कुलर इकोनॉमी);
- जलवायु लचीलापन और अनुकूलन।
जल प्रबंधन में आधुनिक प्रौद्योगिकियों को शामिल करने वाली मुख्य पहलें:
- डेटा-आधारित वैज्ञानिक संरक्षण: 'जल शक्ति अभियान: कैच द रेन' (JSA: CTR) के तहत जल निकायों (तालाब, नदियों आदि) की गणना, जियो-टैगिंग करना और प्रोत्साहन देना जैसे कार्य किए जाते हैं।
- इसके लिए राष्ट्रीय सुदूर संवेदन एजेंसी (NRSA) और भौगोलिक सूचना प्रणाली (GIS) आदि से मिलने वाले रिमोट सेंसिंग डेटा का उपयोग किया जाता है।
- रियल-टाइम आधार पर भूजल स्तर की निगरानी: केंद्रीय भूमि जल बोर्ड (CGWB) द्वारा टेलीमेट्री सिस्टम से युक्त डिजिटल वाटर लेवल रिकॉर्डर्स (DWLRs) के राष्ट्रव्यापी नेटवर्क से निगरानी की जाती है।
- सैटेलाइट का उपयोग:
- GRACE (ग्रेविटी रिकवरी एंड क्लाइमेट एक्सपेरिमेंट) जैसे प्लेटफार्मों का उपयोग भूजल संसाधन का व्यापक तरीके से आकलन करने के लिए किया जाता है।
- 'निसार/NISAR' (नासा-इसरो सिंथेटिक अपर्चर रडार) मिशन से भूजल में व्यापक स्तर पर होने वाले परिवर्तनों का पता लगाया जाता है।
- संधारणीय शहरी विकास में स्मार्ट तत्व: अमृत मिशन के दिशा-निर्देशों में जलापूर्ति और सीवरेज परियोजनाओं के अंतर्गत ‘सुपरवाइजरी कंट्रोल एंड डेटा एक्विजिशन (SCADA)’ जैसी स्मार्ट तकनीकों को शामिल करने का प्रावधान है।