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भारत ने रूसी और अमेरिकी कंपनियों के साथ 858 करोड़ रुपये के रक्षा सौदे पर हस्ताक्षर किए।

28 Mar 2026
1 min

भारत में हाल ही में हुए रक्षा अनुबंध

27 मार्च, 2026 को रक्षा मंत्रालय ने सचिव राजेश कुमार सिंह के नेतृत्व में नई दिल्ली में भारत की रक्षा क्षमताओं को बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण अनुबंधों पर हस्ताक्षर किए। ये समझौते वायु रक्षा और समुद्री टोही पर केंद्रित हैं।

तुंगुस्का वायु रक्षा मिसाइल प्रणाली की खरीद

  • अनुबंध मूल्य: ₹445 करोड़
  • भागीदार: रूसी एजेंसी जेएससी रोसोबोरोनएक्सपोर्ट
  • उद्देश्य:
    • विमान, ड्रोन और क्रूज मिसाइलों जैसे खतरों के खिलाफ हवाई रक्षा क्षमताओं को बढ़ाना।
    • भारत-रूस रणनीतिक रक्षा साझेदारी को मजबूत करें।

पी-8आई लंबी दूरी के समुद्री टोही विमान के लिए रखरखाव सहायता

  • अनुबंध मूल्य: ₹413 करोड़
  • साझेदार: अमेरिकी कंपनी बोइंग इंडिया डिफेंस प्राइवेट लिमिटेड
  • उद्देश्य:
    • भारत में डिपो स्तर पर निरीक्षण और रखरखाव का कार्य करें।
    • नौसेना के P-8 I बेड़े की परिचालन तत्परता को बढ़ाना।
    • सरकार की आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया पहलों के साथ तालमेल बिठाते हुए 100% स्वदेशी सामग्री का उपयोग करें।

समझौतों का महत्व

कुल ₹858 करोड़ के ये अनुबंध भारत की सैन्य क्षमताओं को मजबूत करने और रूस तथा संयुक्त राज्य अमेरिका जैसी प्रमुख वैश्विक शक्तियों के साथ संतुलित रक्षा साझेदारी को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता को रेखांकित करते हैं। यह कदम घरेलू रक्षा अवसंरचना को मजबूत करने में भी सहायक है।

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बोइंग इंडिया डिफेंस प्राइवेट लिमिटेड

यह अमेरिकी एयरोस्पेस कंपनी बोइंग की भारतीय सहायक कंपनी है। यह भारत में रक्षा क्षेत्र में सेवाएं और उत्पाद प्रदान करती है, जिसमें P-8I विमानों के लिए रखरखाव सहायता शामिल है।

जेएससी रोसोबोरोनएक्सपोर्ट

यह रूस की एक राज्य-स्वामित्व वाली कंपनी है जो रक्षा उपकरणों के निर्यात और आयात से संबंधित है। यह भारत के लिए तुंगुस्का वायु रक्षा मिसाइल प्रणाली की आपूर्तिकर्ता है।

मेक इन इंडिया

मेक इन इंडिया (Make in India) भारत सरकार द्वारा शुरू की गई एक पहल है जिसका उद्देश्य भारत में विनिर्माण को बढ़ावा देना, निवेश आकर्षित करना और देश में रोजगार के अवसर पैदा करना है।

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