वित्त वर्ष 2026 में भारत की निर्यात विविधीकरण रणनीति
वित्त वर्ष 2025-26 में भारत की निर्यात रणनीति में उत्पाद श्रेणियों और भौगोलिक बाजारों में महत्वपूर्ण विविधीकरण देखने को मिला, जिसके परिणामस्वरूप विभिन्न उत्पाद-देश संयोजनों से 202.2 मिलियन डॉलर का नया निर्यात हुआ।
प्रमुख वस्तुएं और बाजार
- जहाज, नावें और तैरती संरचनाएं
- 19 नए बाजारों से 57 मिलियन डॉलर का राजस्व प्राप्त हुआ।
- दूरसंचार उपकरण
- 5.8 मिलियन डॉलर के निर्यात के साथ 20 नए बाजारों में विस्तार किया।
- परमाणु रिएक्टर और औद्योगिक बॉयलर
- 13 नए बाजारों से 14.3 मिलियन डॉलर की कमाई हुई।
क्षेत्रीय विस्तार
यह प्रवृत्ति पारंपरिक वस्तु निर्यात से उच्च मूल्य वाले विनिर्माण, इंजीनियरिंग, कृषि-प्रसंस्करण और प्रौद्योगिकी-प्रधान क्षेत्रों की ओर बदलाव का संकेत देती है।
उल्लेखनीय बाजार वृद्धि
- सोना और आभूषण : 17 नए देश।
- सिल्वर : 19 नए गंतव्य।
- हथकरघा उत्पाद : 29 नए बाजार, जो अब तक का सबसे अधिक है।
- अन्य तिलहन : 24 नए बाजार।
कृषि और खाद्य उत्पाद
इन क्षेत्रों में व्यापक स्तर पर विविधीकरण देखने को मिला, विशेष रूप से नए गंतव्यों में ताजे फलों और गैर-बासमती चावल की बढ़ती मांग के साथ।
उभरते क्षेत्र
- विमान और अंतरिक्ष यान के पुर्जे
- उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स
इन क्षेत्रों ने नए बाजारों में अपनी पकड़ मजबूत की।
भौगोलिक विविधीकरण
- उत्तरी अमेरिका : भारत के निर्यात बास्केट में इसका दबदबा रहा, जिसका मूल्य 97.7 बिलियन डॉलर (कुल निर्यात का 22.1%) था।
- पूर्वोत्तर एशिया : निर्यात में 21.6% की वृद्धि हुई और यह 41.6 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया, जिससे कुल निर्यात में इस क्षेत्र की हिस्सेदारी बढ़कर 9.4% हो गई।
- लैटिन अमेरिका : शिपमेंट में 7.8% की वृद्धि हुई और यह 16.4 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया, जिससे कुल निर्यात में 3.7% का योगदान हुआ।
एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका में हो रही वृद्धि भारतीय इलेक्ट्रॉनिक्स, इंजीनियरिंग सामान, रसायन और औद्योगिक उत्पादों की बढ़ती मांग को उजागर करती है।