भारत-साइप्रस रणनीतिक साझेदारी
भारत और साइप्रस ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक बढ़ा दिया है, जिसमें विभिन्न क्षेत्रों, विशेष रूप से रक्षा और व्यापार में सहयोग बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया गया है।
रक्षा सहयोग
- दोनों देशों ने रक्षा सहयोग के लिए पांच साल की कार्ययोजना की घोषणा की।
- भारतीय रक्षा उद्योग यूरोपीय बाजार में प्रवेश के लिए साइप्रस को एक रणनीतिक प्रवेश बिंदु के रूप में उपयोग करने के लिए तैयार है।
- साइप्रस डिफेंस एंड स्पेस इंडस्ट्रीज क्लस्टर (CyDSIC) और सोसाइटी ऑफ इंडियन डिफेंस मैन्युफैक्चरर्स (SIDM) के बीच समझौते पर हस्ताक्षर किए गए।
आर्थिक और व्यापारिक संबंध
- 2029 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने की प्रतिबद्धता।
- मुंबई में साइप्रस व्यापार केंद्र स्थापित करने की योजना है।
- साइप्रस खुद को भारतीय फिनटेक, डिजिटल सेवाओं और निवेश फंडों के लिए यूरोपीय संघ में प्रवेश द्वार के रूप में स्थापित कर रहा है।
- पिछले एक दशक में साइप्रस से भारत में होने वाला निवेश लगभग दोगुना हो गया है, और अगले पांच वर्षों में इसे फिर से दोगुना करने का लक्ष्य है।
सहयोग और समझौते
- साइप्रस के चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री और भारतीय संस्थाओं जैसे कॉन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री (CII) और फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (फिक्की) के बीच समझौते पर हस्ताक्षर किए गए।
- भारतीय जहाजरानी हितों के लिए यूरोपीय समुद्री प्रवेश द्वार के रूप में साइप्रस की संभावित भूमिका को स्वीकार किया गया।
निवेश सांख्यिकी
साइप्रस भारत में शीर्ष नौ निवेशकों में से एक है, जिसने अप्रैल 2000 से जून 2025 तक कुल मिलाकर 15.76 बिलियन डॉलर का निवेश किया है।