चिनाब नदी को लेकर भारत-पाकिस्तान के बीच जल विवाद
पृष्ठभूमि
पाकिस्तान ने भारत की चिनाब नदी से ब्यास नदी में पानी मोड़ने की योजना पर चिंता जताई है, इसे अंतरराष्ट्रीय समझौतों का संभावित उल्लंघन मानते हुए।
प्रमुख बिंदु
- सिंधु जल संधि (IWT):
विश्व बैंक की मध्यस्थता से 1960 में हुई इस संधि के तहत सिंधु नदी और उसकी सहायक नदियों के जल अधिकार भारत और पाकिस्तान के बीच आवंटित किए गए हैं। - भारत की प्रस्तावित परियोजना:
भारत का इरादा चिनाब-ब्यास लिंक टनल का निर्माण करने का है ताकि चिनाब से ब्यास नदी में प्रतिवर्ष 1.9 मिलियन एकड़-फीट (एमएएफ) पानी स्थानांतरित किया जा सके। - पाकिस्तान की चिंताएँ:
- अंतर्राष्ट्रीय जल निकासी समझौते का उल्लंघन, विशेष रूप से पश्चिमी नदियों (चेनाब, झेलम, सिंधु) से जल आवंटन को प्रभावित करता है, जिन पर पाकिस्तान का अधिकार है।
- संधियों के कानून पर वियना कन्वेंशन और अंतरराष्ट्रीय जल कानून का उल्लंघन, जिसमें 1977 के जलमार्ग संबंधी संयुक्त राष्ट्र कन्वेंशन के सिद्धांत भी शामिल हैं।
- सलाला बांध का मुद्दा:
पाकिस्तान ने सलाल बांध की गाद निकालने की भारत की योजना पर भी आपत्ति जताई है, उसका दावा है कि यह अंतर्राष्ट्रीय जल निकासी नीति और 1978 के सलाल समझौते का उल्लंघन है। - संचार का अभाव:
भारत ने न तो पाकिस्तान को परियोजनाओं के बारे में आधिकारिक रूप से सूचित किया है और न ही परामर्श मांगा है। - बाढ़ की चेतावनी:
पाकिस्तान के प्रांतीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (PDMA) ने भारतीय अधिकारियों से प्राप्त सूचना के आधार पर 21 से 30 मई की अवधि के लिए पानी के बढ़ते प्रवाह के बारे में चेतावनी जारी की है।