भारत-चिली व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) की वार्ता
वर्तमान वार्ता की स्थिति
भारत और चिली के बीच सीईपीए (CEPA) पर बातचीत चिली द्वारा कुछ संवेदनशील उत्पादों के लिए बाजार पहुंच की मांग के कारण बाधित हुई है। दोनों देश इन मुद्दों को हल करने और अक्टूबर तक व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के लिए उत्सुक हैं।
चिली की बाजार पहुंच संबंधी मांगें
- चिली निम्नलिखित उत्पादों के लिए बाजार पहुंच प्राप्त करना चाहता है:
- सोना
- सैमन
- शराब
- सेब
- अखरोट
- एवोकैडो
- अन्य फल और बेरीज
- चिली इन उत्पादों पर अधिकतम संभव रियायतें चाहता है।
भारत की प्रतिक्रिया
- भारत फलों और शराब पर रियायतें देने पर विचार कर सकता है:
- कोटा
- आयात कीमतों को घरेलू कीमतों से ऊपर रखने के लिए न्यूनतम आयात मूल्य तंत्र लागू किया जाएगा।
टैरिफ रियायतें
- चिली, भारत को 90% से अधिक टैरिफ लाइनों पर टैरिफ में छूट की पेशकश कर रहा है।
- भारत द्वारा लगभग 70% वस्तुओं पर शुल्क में कटौती की पेशकश किए जाने की संभावना है, जिसमें चिली के हित वाले उत्पादों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
- चिली अपनी शराब के निर्यात के लिए बाजार तक पहुंच सुरक्षित करने में विशेष रूप से रुचि रखता है।
राजनीतिक कारक
- चिली में आम चुनाव और सरकार परिवर्तन के कारण बातचीत में देरी हुई।
- चिली के राष्ट्रपति जोस एंटोनियो कास्ट का प्रशासन समझौते को अंतिम रूप देने के लिए उत्सुक है।
प्रगति और आगे की बातचीत
- महत्वपूर्ण खनिजों और बाजार तक पहुंच से संबंधित मुद्दों को छोड़कर, बातचीत 80% पूरी हो चुकी है।
भारत की व्यापक रणनीतिक पहलें
- भारत अन्य लैटिन अमेरिकी देशों के साथ व्यापार समझौतों पर बातचीत कर रहा है, जिनमें शामिल हैं:
- पेरू
- मर्कोसुर ब्लॉक (अर्जेंटीना, ब्राजील, पैराग्वे, उरुग्वे, बोलीविया)
- इसका उद्देश्य MERCOSUR के साथ तरजीही व्यापार समझौते को पूर्ण विकसित मुक्त व्यापार समझौते (FTA) में विस्तारित करना है।
रणनीतिक महत्व
- भारत चीन के अलावा अन्य महत्वपूर्ण खनिजों, विशेष रूप से तांबा और लिथियम के स्रोतों में विविधता लाने का प्रयास कर रहा है।
- चीन दुर्लभ-पृथ्वी खनिजों की वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला के लगभग 70% हिस्से को नियंत्रित करता है, जिसके कारण निर्यात प्रतिबंधों के चलते पिछले वर्ष आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान उत्पन्न हुआ था।
आर्थिक सहभागिता
- वित्त वर्ष 2026 में भारत का लैटिन अमेरिका से आयात 44% बढ़कर 34.62 अरब डॉलर हो गया।
- इस वृद्धि का मुख्य कारण तांबे के अयस्क के शिपमेंट में 82% की वृद्धि और इस क्षेत्र से सोने के आयात की शुरुआत थी।
- भारत ने पिछले वित्तीय वर्ष में लैटिन अमेरिका को 16.36 अरब डॉलर मूल्य का सामान निर्यात किया।