इसे भारतीय सशस्त्र बलों में संयुक्त कार्यक्षमता, एकीकरण और थियेटराइजेशन को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
तीन संयुक्त सिद्धांतों के बारे में
- विशेष बलों (Special Forces: SF) वाले ऑपरेशंस के लिए संयुक्त सिद्धांत:
- इसका उद्देश्य थल सेना के पैरा-SF, नौसेना के मरीन कमांडो (MARCOS) और भारतीय वायुसेना के गरुड़ के बीच साझा समझ, शब्दावली और बुनियादी प्रक्रियाओं को बढ़ावा देना है।
- इसमें डुप्लीकेशन को कम करने, भविष्य के हथियारों के स्वरूप के साथ-साथ स्थल, जल और वायु क्षेत्रों में कमांड एवं नियंत्रण रणनीतियों के लिए संयुक्त प्रशिक्षण शामिल है।
- एयरबोर्न (AB) और हेलीबोर्न (H) ऑपरेशंस के लिए संयुक्त सिद्धांत:
- इसका उद्देश्य थल सेना, नौसेना और वायु सेना के बीच सुचारू समन्वय सुनिश्चित करना है।
- यह योजना और क्रियान्वयन संबंधी प्रक्रियाओं को समान बनाकर सैद्धांतिक कमियों को दूर करने का प्रयास करता है। साथ ही, यह नए आधुनिक हवाई वाहनों और मानवरहित प्रणालियों को एकीकृत भी करता है।
- मल्टी-डोमेन ऑपरेशंस (MDO) के लिए संयुक्त सिद्धांत:
- यह स्थल, जल, वायु, साइबर, अंतरिक्ष और संज्ञानात्मक (Cognitive) डोमेन में सैन्य बलों एवं गैर-सैन्य राष्ट्रीय क्षमताओं को शामिल करता है।
- इसमें राजनीतिक-सैन्य उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए सैन्य और गैर-सैन्य साझेदारों को एकीकृत करते हुए “संपूर्ण राष्ट्र” दृष्टिकोण (Whole-Of-Nation Approach: WONA) पर जोर दिया गया है।
चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) के बारे में
- चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ चीफ ऑफ स्टाफ कमेटी का स्थायी अध्यक्ष होता है।
- CDS तीनों सैन्य बलों के मामले में रक्षा मंत्री के प्रधान सैन्य सलाहकार के रूप में कार्य करता है।
