प्रधान मंत्री ने 1026 ईस्वी में सोमनाथ मंदिर पर हुए प्रथम हमले के 1000 वर्ष पूरा होने पर सोमनाथ मंदिर को श्रद्धांजलि अर्पित की।
सोमनाथ मंदिर के बारे में
- अवस्थिति: यह गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्र में वेरावल के निकट प्रभास पाटन में समुद्र तट पर स्थित है।
- धार्मिक महत्त्व: भगवान शिव के 12 पवित्र ज्योतिर्लिंगों में से एक सोमनाथ में स्थित है।
- इतिहास: इस पर पहली बार 11वीं शताब्दी में महमूद गजनवी ने हमला किया था। इसका उल्लेख अल-बिरूनी ने भी किया है। इसके उपरांत कालांतर में इस पर कई बार हमले हुए थे। इस कारण इसका कई बार पुनर्निर्माण किया गया है।
- पुनर्निर्माण: तत्कालीन उप-प्रधान मंत्री वल्लभभाई पटेल ने 12 नवंबर, 1947 को सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का आदेश दिया था।
- 11 मई, 1951 को भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने मंदिर में प्रतिष्ठापन समारोह (प्राण-प्रतिष्ठा) संपन्न किया था।
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1 sourceसरकार ने यह अधिसूचित किया कि यदि एयर कंडीशनर (AC), टेलीविजन (TV) आदि के निर्माता अपने उत्पादों की वास्तविक ऊर्जा खपत को उनके 'एनर्जी स्टार रेटिंग लेबल' में दी गई घोषणा से अलग पाते हैं, तो उन पर दंड आरोपित किया जाएगा।
मानक और लेबलिंग कार्यक्रम के बारे में
- मंत्रालय: विद्युत मंत्रालय।
- प्रशासक: ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (BEE)। यह विद्युत मंत्रालय के अधीन ऊर्जा संरक्षण अधिनियम, 2001 के अंतर्गत एक सांविधिक निकाय है।
- उद्देश्य:
- उपकरणों की ऊर्जा खपत को कम करना; तथा
- उपभोक्ताओं को उपकरणों की लागत-प्रभावशीलता और ऊर्जा प्रदर्शन के बारे में सूचित निर्णय लेने में सक्षम बनाना।
- कवरेज: वर्तमान में इसके तहत अनिवार्य और स्वैच्छिक उपकरणों की सूची में 40 से अधिक उपकरण शामिल हैं।
- स्टार लेबलिंग के लिए अनिवार्य उपकरण: रेफ्रिजरेटर, डीप-फ्रीजर, एयर कंडीशनर, पंखे, टेलीविजन, वाशिंग मशीन, चिलर, इलेक्ट्रिक गीजर, डिस्ट्रीब्यूशन ट्रांसफॉर्मर, ट्यूबलर फ्लोरोसेंट लैंप, LED लैंप, इंडक्शन हॉब, सोलर इन्वर्टर, घरेलू एलपीजी स्टोव आदि।
बढ़ते भू-राजनीतिक तनावों के बावजूद, OPEC+ तेल उत्पादन को स्थिर बनाए रखने पर सैद्धांतिक रूप से सहमत हो गया।
पेट्रोलियम निर्यातक देशों का संगठन (ओपेक/ OPEC) + के बारे में
- यह 12 तेल निर्यातक विकासशील देशों का एक स्थायी अंतर-सरकारी संगठन है।
- भारत इसका सदस्य नहीं है।
- स्थापना: ओपेक की स्थापना बगदाद सम्मेलन (1960) में ईरान, इराक, कुवैत, सऊदी अरब और वेनेजुएला ने मिलकर की थी।
- उद्देश्य: पेट्रोलियम उत्पादकों के लिए उचित और स्थिर कीमतें सुरक्षित करने हेतु सदस्य देशों के बीच पेट्रोलियम नीतियों का समन्वय एवं एकीकरण करना।
- मुख्यालय: विएना, ऑस्ट्रिया।
- OPEC+: अमेरिकी शेल तेल (shale oil) उत्पादन में महत्वपूर्ण वृद्धि के कारण गिरती तेल कीमतों के जवाब में, 2016 में, ओपेक ने 10 अन्य तेल उत्पादक देशों के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। इस समझौते के बाद इन अन्य देशों के साथ इस समूह को ओपेक+ नाम दिया गया।
- ये देश हैं: रूस, मैक्सिको, कजाकिस्तान, ओमान, अजरबैजान, मलेशिया, बहरीन, दक्षिण सूडान, ब्रुनेई और सूडान।
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1 sourceपांच देश बहरीन, कोलंबिया, कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य, लातविया और लाइबेरिया संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के अस्थायी सदस्य के रूप में 2 वर्ष के कार्यकाल के लिए चुने गए।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के बारे में
- स्थापना: संयुक्त राष्ट्र चार्टर के माध्यम से 1945 में संयुक्त राष्ट्र के 6 प्रमुख अंगों में से एक के रूप में स्थापित।
- उद्देश्य: अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखना।
- सदस्य: 5 स्थायी सदस्य (P5) और 10 अस्थायी सदस्य।
- P5 में चीन, फ्रांस, रूस, संयुक्त राज्य अमेरिका और यूनाइटेड किंगडम शामिल हैं।
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1 sourceनासा के OSIRIS-REx मिशन द्वारा क्षुद्रग्रह बेन्नू से लाए गए नमूनों के विश्लेषण से पता चला है कि इसमें शर्करा, अमीनो एसिड और DNA एवं RNA के सभी पांच न्यूक्लिओबेस मौजूद हैं। यह जीवन के लिए आवश्यक पूर्ण आणविक सूची (molecular inventory) का संकेत देता है।
OSIRIS-REx (ओरिजिन्स, स्पेक्ट्रल इंटरप्रिटेशन, रिसोर्स आइडेंटिफिकेशन, एंड सिक्योरिटी-रेगोलिथ एक्सप्लोरर) के बारे में
- यह किसी क्षुद्रग्रह से नमूना एकत्र करने वाला संयुक्त राज्य अमेरिका का प्रथम मिशन है।
- वापसी: 24 सितंबर, 2023 को इसने क्षुद्रग्रह बेन्नू से प्राप्त नमूनों वाले कैप्सूल को पृथ्वी पर छोड़ा था।
- नया मिशन: इस अंतरिक्ष यान का नाम बदलकर OSIRIS-APEX कर दिया गया है। इसे 2029 में क्षुद्रग्रह एपोफिस (Apophis) के अन्वेषण के लिए भेजा गया है।
क्षुद्रग्रह बेन्नू के बारे में
- उत्पत्ति: बेन्नू का निर्माण करने वाली चट्टानें लगभग 4.6 अरब वर्ष पूर्व सौर मंडल के प्रारंभिक सृजन के दौरान निर्मित हुई थीं। यह एक प्राचीन 'जनक पिंड' (parent body) का हिस्सा था, जो बाद में एक विशाल टक्कर के कारण नष्ट हो गया था।
- निर्माण क्षेत्र: इसकी उत्पत्ति संभवतः मंगल और बृहस्पति के बीच स्थित मुख्य क्षुद्रग्रह पट्टी में हुई थी और बाद में यह पृथ्वी की ओर आ गया था।
- कक्षीय निकटता: बेन्नू प्रत्येक 6 वर्षों में पृथ्वी के सबसे निकट पहुंचता है।
हाल ही में, वुल्फ सुपरमून की घटना घटित हुई है।
वुल्फ सुपरमून के बारे में
- वुल्फ मून: यह जनवरी महीने की पहली पूर्णिमा का पारंपरिक नाम है।
- सुपरमून: जब चंद्रमा पृथ्वी के सबसे निकटतम बिंदु (Perigee) पर हो और उसी समय वह पूर्णिमा के रूप में दिखाई दे, तो उसे सुपरमून कहा जाता है। इसमें यह सामान्य से थोड़ा बड़ा और चमकीला दिखाई देता है।
- अतः वुल्फ सुपरमून एक प्रकार से वुल्फ मून व सुपरमून की मिश्र स्थिति है। इसमें जनवरी माह की प्रथम पूर्णिमा का चंद्रमा पृथ्वी के सबसे निकटतम बिंदु पर होता है।
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1 sourceभारतीय थल सेना ने एक निजी रक्षा उपकरण निर्माता NIBE लिमिटेड के साथ ₹293 करोड़ के अनुबंध पर हस्ताक्षर किए हैं। यह अनुबंध लंबी दूरी के उन्नत रॉकेट लॉन्चर सिस्टम 'सूर्यास्त्र' की आपूर्ति से संबंधित है। यह अनुबंध इजरायल के सहयोग से किया गया है।
सूर्यास्त्र के बारे में
- यह भारत का पहला 'मेड इन इंडिया' यूनिवर्सल मल्टी-कैलिबर रॉकेट लॉन्चर है।
- यह 300 किलोमीटर तक की दूरी पर सटीक सतह-से-सतह पर मार करने में सक्षम है।
- प्रमुख क्षमताएं:
- यह अलग-अलग दूरी पर स्थित कई लक्ष्यों पर एक साथ हमला कर सकता है।
- इसमें कई प्रकार के रॉकेट्स को एकीकृत कर फायर किया जा सकता है।
- इसकी मारक क्षमता इतनी सटीक है कि इसमें 5 मीटर से भी कम का विचलन होता है।
- यह 100 किलोमीटर तक लोइटरिंग म्यूनिशन दागने में सक्षम है।
केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय के पैनल ने कलाई-II जलविद्युत परियोजना के लिए पर्यावरण मंजूरी की सिफारिश की। यह परियोजना अरुणाचल प्रदेश में लोहित नदी पर निर्मित होगी।
- यह आशंका प्रकट की गई है कि इस परियोजना से सफेद पेट वाले बगुले प्रभावित होंगे। इस कारण उनके संरक्षण के लिए विरोध प्रदर्शन किए जा रहे हैं।

सफेद पेट वाले बगुले (White-bellied heron) के बारे में
- अन्य नाम: इंपीरियल हेरॉन, ग्रेट व्हाइट-बेलीड हेरॉन आदि।
- विशेषताएं: यह विशिष्ट सफेद पेट वाली दूसरी सबसे बड़ी जीवित बगुला प्रजाति है।
- यह प्रवासी पक्षी नहीं है, लेकिन यह स्थानीय स्तर पर और प्रजनन के उपरांत आवाजाही करता है।
- पर्यावास: पूर्वी हिमालय की तलहटी में मानवीय हस्तक्षेप से मुक्त नदियां और आर्द्रभूमियां।
- वितरण: भारतीय उपमहाद्वीप से दक्षिण-पूर्व एशिया तक {भारत (अरुणाचल प्रदेश व असम), भूटान, बांग्लादेश आदि}।
- संरक्षण स्थिति:
- IUCN लाल सूची: क्रिटिकली एंडेंजर्ड।
- भारत: वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के अंतर्गत अनुसूची-I में सूचीबद्ध है।