वृद्धावस्था एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, जिसमें व्यक्ति की शारीरिक और मानसिक क्षमता धीरे-धीरे कम होने लगती है तथा बीमारियों और मृत्यु का जोखिम बढ़ जाता है।
- यह जीवन में होने वाले बदलावों; जैसे सेवानिवृत्ति, स्थान परिवर्तन और मित्रों या जीवनसाथी की मृत्यु/वियोग से भी जुड़ा होता है।
- UNFPA 2023 के अनुमान के अनुसार भारत की कुल आबादी में वृद्धजनों का अनुपात 2050 तक 20% (347 मिलियन) तक हो जाएगा, जो 2011 में 8.6% था।
वृद्धावस्था स्वास्थ्य देखभाल से जुड़ी चुनौतियां
- अस्पताल-केंद्रित मॉडल: मौजूदा प्रणालियों में एकल रोगों का उपचार होता है, जबकि वृद्धजन प्रायः कई दीर्घकालिक स्वास्थ्य संबंधी बीमारियों से पीड़ित होते हैं, जिनके लिए निरंतर और एकीकृत देखभाल की आवश्यकता होती है।
- मानसिक स्वास्थ्य और सामाजिक अलगाव: प्रायः डिमेंशिया, अल्जाइमर और अवसाद जैसे रोगों का निदान नहीं हो पाता है।
- एकल परिवारों के प्रति बढ़ती प्राथमिकता ने सामाजिक अलगाव और "एम्प्टी नेट सिंड्रोम" (empty nest syndrome) में वृद्धि की है।
- वित्तीय असुरक्षा: स्वास्थ्य पर जेब से किया जाने वाला अत्यधिक खर्च परिवारों को बार-बार गरीबी में ले जाता है।
- 78% वृद्धों को पेंशन नहीं मिलती है और 70% आर्थिक रूप से आश्रित हैं।
- वृद्धावस्था का नारीकरण: महिलाओं की जीवन प्रत्याशा अधिक है, लेकिन अक्सर उनके पास कम संपत्ति और स्वास्थ्य देखभाल तक कम पहुंच होती है, जिससे उन्हें अधिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
- अन्य: वृद्धावस्था संबंधी प्रशिक्षित चिकित्सकों की कमी, सामाजिक सुरक्षा का अभाव, डिजिटल सुविधाओं की कमी, ग्रामीण-शहरी विभाजन आदि।
आगे की राह
- दीर्घकालिक देखभाल (LTC) प्रणाली को सुदृढ़ करना: आवश्यक अवसंरचना और वित्तीय सहायता को शामिल करते हुए एकीकृत वृद्धजन-देखभाल प्रणाली विकसित की जाए।
- डिजिटल स्वास्थ्य देखभाल को सुदृढ़ करना: आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM) के तहत टेलीपरामर्श और एकीकृत इलेक्ट्रॉनिक स्वास्थ्य रिकॉर्ड को बढ़ावा देना चाहिए।
वृद्धावस्था स्वास्थ्य-देखभाल का महत्व | |||
जीवन की गुणवत्ता गरिमा, स्वतंत्रता और सेहतमंदी यह वरिष्ठ नागरिकों को उनके आत्म-सम्मान और स्वायत्तता बनाए रखने में मदद करती है।
| स्वास्थ्य देखभाल के बोझ में कमी प्रारंभिक और निरंतर देखभाल यह जटिलताओं को रोकती है और अस्पताल में भर्ती होने तथा आपातकालीन स्थिति में अस्पताल जाने की आवृत्ति को कम करती है।
| क्रोनिक-रोग प्रबंधन उच्च रक्तचाप, मधुमेह और डिमेंशिया जैसी बीमारियों के उपचार में सहायता करता है (आंकड़े: 75% से अधिक वृद्धजन क्रोनिक बीमारियों से पीड़ित हैं; केवल 18% के पास बीमा कवरेज है- नीति आयोग, 2024)
| अन्य समावेशी विकास और पारिवारिक सहायता यह एक अनुकूल परिवेश को बढ़ावा देता है और परिवारों पर बोझ को कम करता है।
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सरकार द्वारा उठाए गए कदम | |||
आयुष्मान भारत - PMJAY 70 वर्ष से अधिक आयु के लगभग 6 करोड़ वरिष्ठ नागरिकों के लिए प्रति वर्ष 5 लाख रुपये तक का निशुल्क उपचार की सुविधा। | वृद्धों के स्वास्थ्य देखभाल के लिए राष्ट्रीय कार्यक्रम (NPHCE) सुलभ, वहनीय और उच्च गुणवत्ता वाली देखभाल। वृद्धजन आबादी के लिए समर्पित सेवाएं। | सीनियर केयर एजिंग ग्रोथ इंजन (SAGE) पोर्टल युवा उद्यमियों को विश्वसनीय वृद्धावस्था देखभाल समाधान विकसित करने और सिल्वर इकोनॉमी में प्रवेश करने के लिए प्रोत्साहित करता है।
| राष्ट्रीय वयोश्री योजना (RVY) आयु संबंधी दिव्यांगता वाले वरिष्ठ नागरिकों को सहायक उपकरण प्रदान करती है।
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