संयुक्त राष्ट्र की 'वैश्विक मूल्यांकन रिपोर्ट 2018' में आगजनी को प्रमुख खतरों में से एक माना गया है।
आगजनी से होने वाले खतरे

- आगजनी केवल वस्तुओं को जलाती ही नहीं, बल्कि आसपास के ऑक्सीजन स्तर को कम कर देती है, जिससे लोगों का दम घुटने लगता है।
- आग लगने से निकलने वाला धुआं और विषाक्त गैसें फेफड़ों को जाम कर देती हैं।
- आग लगने से गैस सिलेंडर या अन्य रसायनों में विस्फोट का खतरा होता है।
- राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की रिपोर्ट के अनुसार, 2024 में पूरे भारत में आग लगने की घटनाओं में 5,888 लोगों की मौत हो गई।
भारत में अग्नि सुरक्षा के नियम
- संवैधानिक और विधिक ढांचा:
- संवैधानिक प्रावधान: संविधान के अनुच्छेद 243W और 12वीं अनुसूची के तहत, अग्नि की रोकथाम और अग्निशमन सेवाएं शहरी स्थानीय निकायों (नगरपालिकाओं) की जिम्मेदारी हैं।
- राज्य अग्नि सेवा अधिनियम: अग्नि सुरक्षा को विनियमित करने के लिए प्रत्येक राज्य का अपना 'अग्निशमन सेवा अधिनियम' है।
- राष्ट्रीय भवन संहिता (NBC), 2016: भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) द्वारा तैयार की गई यह संहिता अग्नि से सुरक्षा और जीवन सुरक्षा, बचाव के उपायों और सुरक्षित भवन डिजाइन के लिए मानक तय करती है।
- संस्थागत रूपरेखा:
- राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA): यह अग्निशमन सेवाओं को सुदृढ़ करने, उनके आधुनिकीकरण और क्षमता निर्माण के लिए दिशा-निर्देश जारी करता है।
- स्थायी अग्नि सलाहकार परिषद (SFAC): केंद्रीय गृह मंत्रालय के अंतर्गत यह सर्वोच्च सलाहकार संस्था है। यह संस्था फायर स्टेशन, उपकरण, नई तकनीक, अग्निशमन दल और प्रशिक्षण के मानक तय करती है।
- अग्निशमन सेवाओं का विस्तार और आधुनिकीकरण योजना: 15वें वित्त आयोग की सिफारिशों के आधार पर केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा यह योजना चलाई जा रही है, ताकि अग्निशमन अवसंरचनाओं को बेहतर बनाया जा सके।