केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने “भारत में सड़क दुर्घटना 2024” रिपोर्ट जारी की | Current Affairs | Vision IAS

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इस रिपोर्ट में भारत में सड़क दुर्घटनाओं से उत्पन्न गंभीर लोक-स्वास्थ्य (पब्लिक हेल्थ) और सामाजिक-आर्थिक चुनौतियों को रेखांकित किया गया है।

  • रिपोर्ट के अनुसार, सड़क दुर्घटनाएँ विशेष रूप से देश के युवाओं और उत्पादक कार्यबल को प्रभावित कर रही हैं, जिससे मानव जीवन की हानि के साथ-साथ आर्थिक उत्पादकता पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।

सड़क दुर्घटनाओं के कारण

  • तेज गति से गाड़ी चलाना (ओवरस्पीडिंग): यह सड़क दुर्घटनाओं का प्रमुख कारण है। यह सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली 70.3% मौतों के लिए जिम्मेदार था, जबकि हिट-एंड-रन इन दुर्घटनाओं में होने वाली 19.2% मौतों के लिए जिम्मेदार था।
  • सुरक्षा नियमों का उल्लंघन: हेलमेट और सीटबेल्ट का उपयोग न करने के कारण क्रमशः 54,000 से अधिक और 14,000 लोगों की मौतें हुईं।
  • अयोग्य चालक: लगभग 10.6% सड़क दुर्घटनाएँ ऐसे चालकों के कारण हुईं, जिनके पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस नहीं था या जो केवल लर्नर लाइसेंस के आधार पर वाहन चला रहे थे।
  • सड़क एवं वाहन संबंधी कमियां: उच्च गति वाले खुले मार्ग, असुरक्षित सड़क संरचनाएं (जैसे चौराहे, तीखे मोड़ और गड्ढे), अधिक भार वाले वाहन  तथा अनफिट एवं पुराने वाहन सड़क दुर्घटनाओं का कारण बनते हैं।

सड़क सुरक्षा को बढ़ावा देने हेतु सरकारी पहलें

  • इंजीनियरिंग और वाहन सुरक्षा: भारत में न्यू कार असेसमेंट प्रोग्राम (BNCAP) लागू किया गया। इसके अलावा एयरबैग्स, एंटी-लॉक ब्रेकिंग सिस्टम, सीट-बेल्ट रिमाइंडर और रिवर्स पार्किंग अलर्ट जैसे सुरक्षा फीचर्स को अनिवार्य किया गया।
  • आपातकालीन देखभाल और मुआवजा: कैशलेस उपचार योजना, 2025 के तहत सड़क दुर्घटना पीड़ितों को दुर्घटना के बाद 7 दिनों के भीतर उपचार हेतु ₹1.5 लाख तक की सहायता प्रदान की जाती है। हिट-एंड-रन मामलों में मृत्यु होने पर मुआवजे की राशि बढ़ाकर ₹2 लाख कर दी गई है।
  • यातायात नियमों को लागू करना एवं डिजिटलीकरण: यातायात नियमों के उल्लंघन पर कड़े दंड का प्रावधान किया गया है। ई-चालान और इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS) का एकीकरण किया गया है।  eDAR (एकीकृत सड़क दुर्घटना डेटाबेस) के माध्यम से सड़क दुर्घटनाओं की त्वरित रिपोर्टिंग की जाती है और डेटा संग्रह किया जाता है।
  • गुड समैरिटन या नेक व्यक्तियों की सुरक्षा: राह-वीर योजना के तहत दुर्घटना पीड़ितों की सहायता करने वाले व्यक्तियों को कानूनी सुरक्षा प्रदान की जाती है।

आगे की राह 

  • बहुआयामी रणनीति: '4E'—शिक्षा (Education), इंजीनियरिंग (Engineering), प्रवर्तन (Enforcement), और आपातकालीन देखभाल (Emergency Care) के माध्यम से सड़क सुरक्षा प्रणाली में सुधार करना चाहिए।
  • क्षमता निर्माण: मान्यता प्राप्त चालक प्रशिक्षण केंद्रों  का विस्तार किया जाए। चालक के बेहतर प्रशिक्षण के लिए सिम्युलेटर-आधारित प्रशिक्षण को प्रोत्साहित किया जाए।
  • स्वचालित परीक्षण व्यवस्था: वाहनों की फिटनेस जांच के लिए देशभर में निरीक्षण एवं प्रमाणन केंद्र तथा स्वचालित परीक्षण स्टेशन (ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशंस- ATS) स्थापित किए जाएँ। 
  • अनुसंधान और सहयोग: IIT मद्रास में 'सड़क सुरक्षा उत्कृष्टता केंद्र' जैसे संस्थानों के साथ साझेदारी करके साक्ष्य यानी डेटा आधारित सड़क सुरक्षा को बढ़ावा देना चाहिए।
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सड़क सुरक्षा उत्कृष्टता केंद्र

यह एक विशेष संस्थान है, जैसे IIT मद्रास में स्थापित, जो सड़क सुरक्षा में सुधार के लिए अनुसंधान, विकास और ज्ञान साझा करने पर ध्यान केंद्रित करता है।

स्वचालित परीक्षण स्टेशन (Automated Testing Stations- ATS)

ये ऐसे केंद्र हैं जो वाहनों की फिटनेस, उत्सर्जन और सुरक्षा मानकों की जांच स्वचालित प्रणालियों का उपयोग करके करते हैं, जिससे मानवीय हस्तक्षेप कम होता है और सटीकता बढ़ती है।

4E

सड़क सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए एक बहुआयामी रणनीति जो चार प्रमुख स्तंभों पर आधारित है: शिक्षा (Education), इंजीनियरिंग (Engineering), प्रवर्तन (Enforcement), और आपातकालीन देखभाल (Emergency Care)।

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