विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) के नेटिंग पर SEBI का प्रस्ताव
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) को एक ही दिन में किए गए नकद बाजार लेन-देन में धनराशि का निपटान करने की अनुमति देने का प्रस्ताव रखा है। इस कदम का उद्देश्य तरलता के दबाव को कम करना और वित्त-पोषण लागत को घटाना है, विशेष रूप से अधिक मात्रा वाले ट्रेडिंग सत्रों के दौरान।
वर्तमान ढांचा
- FPI को सभी खरीद और बिक्री लेन-देन का निपटान सकल आधार पर करना होगा, भले ही खरीद और बिक्री मूल्य एक दूसरे को संतुलित कर दें।
- इससे वित्त-पोषण लागत में वृद्धि होती है और परिचालन संबंधी अक्षमताएं उत्पन्न होती हैं।
प्रस्तावित परिवर्तन
- FPI को बिक्री से प्राप्त आय का उपयोग उसी दिन खरीदारी के लिए करने की अनुमति दें, जिससे केवल शुद्ध निधि दायित्व पूरा हो सके।
- यह केवल विभिन्न प्रतिभूतियों के बीच "सीधे" लेन-देन तक ही सीमित है।
- जहां FPI एक ही निपटान-चक्र के भीतर एक ही प्रतिभूति को खरीदते और बेचते हैं, वहां नेटिंग लागू नहीं होगी।
परिचालन और निपटान संबंधी विचार
- भारत में T+1 निपटान-चक्र का पालन किया जाता है, जिसके तहत लेन-देन की तारीख के एक कारोबारी दिन बाद ट्रेड को अंतिम रूप दिया जाता है।
- क्लियरिंग कॉरपोरेशन्स के डिफॉल्ट वॉटरफॉल मैकेनिज्म जैसे मौजूदा सुरक्षा उपाय परिचालन जोखिमों को कम करेंगे।
- संरक्षकों को संयुक्त दायित्वों को संभालने के लिए सिस्टम अपग्रेड की आवश्यकता होगी।
निरंतर अभ्यास
- FPI और कस्टोडियन के बीच प्रतिभूतियों का निपटान सकल आधार पर ही रहेगा।
- प्रतिभूति लेनदेन कर (STT) और स्टाम्प शुल्क अपरिवर्तित रहेंगे और डिलीवरी-आधारित लेन-देन पर लगाए जाएंगे।
कार्यान्वयन और अतिरिक्त पहल
- इसके कार्यान्वयन के लिए SEBI और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा संशोधन की आवश्यकता है।
- SEBI ने डिजिटल हस्ताक्षर, FI प्लेटफॉर्म और निवेशकों के लिए सरलीकृत पंजीकरण मानदंडों के माध्यम से FPI के प्रवेश को आसान बनाया है।