टाइगर ग्लोबल मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा सामान्य कर चोरी रोधी नियम (GAAR) की व्याख्या
टाइगर ग्लोबल मामले में GAAR पर सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले ने भारत के कर प्रवर्तन ढांचे में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया है। इस व्याख्या से कर संधियों और सीमा पार लेन-देन संरचना पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ने की उम्मीद है। करदाताओं को इस निर्णय के आधार पर अपने मौजूदा और भविष्य के लेन-देन का पुनर्मूल्यांकन करने की सलाह दी जाती है।
फैसले से प्राप्त मुख्य निष्कर्ष
- सर्वोच्च न्यायालय ने GAAR को "रूप से अधिक सार (Substance over Form)" के न्यायिक सिद्धांत के पूरक के रूप में स्थापित किया है। इसका तात्पर्य यह है कि कर अधिकारी किसी लेन-देन की कानूनी संरचना पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय उसके वास्तविक आर्थिक उद्देश्य पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं।
- इस फैसले से संधि के लाभ प्रभावित होते हैं और पुराने प्रावधानों द्वारा दी जाने वाली सुरक्षा कमजोर हो जाती है, जिससे करदाताओं को पुनर्मूल्यांकन करने की आवश्यकता होती है।
- GAAR तब लागू हो सकता है जब किसी व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य कर लाभ प्राप्त करना हो, विशेष रूप से यदि उसमें निम्नलिखित शामिल हों:
- कानून का दुरुपयोग
- व्यावसायिक महत्व का अभाव
- निष्पक्ष लेन-देन नहीं
- वास्तविक उद्देश्य का अभाव
- इन परीक्षणों की व्यापक रूपरेखा निश्चितता के बारे में चिंताएं पैदा करती है, जो व्यक्तिपरकता को कम करने के लिए व्यापक दिशा-निर्देशों और उदाहरणों की आवश्यकता का सुझाव देती है।
कर निवास प्रमाण-पत्रों (TRC) पर प्रभाव
- इस फैसले से संधि लाभों का दावा करने में कर-संधि समितियों की भूमिका कम हो जाती है। केवल एक कर-संधि समिति ही कर लाभों की गारंटी नहीं देती, विशेष रूप से उन व्यवस्थाओं के लिए जिनसे 1 अप्रैल, 2017 के बाद लाभ प्राप्त होते हैं।
इस फैसले के व्यापक निहितार्थ
- विशेषज्ञों का कहना है कि GAAR का उपयोग अब केवल अंतिम उपाय के रूप में नहीं, बल्कि एक प्रमुख बचाव साधन के रूप में किया जा रहा है।
- घरेलू मामलों में भी, जिनमें विलय और पुनर्गठन शामिल होते हैं, यही दृष्टिकोण देखने को मिलता है।
- यह निर्णय प्रत्यक्ष कर के परिप्रेक्ष्य से GAAR की प्रयोज्यता को सुदृढ़ करता है और घरेलू जांच से सुरक्षा के लिए अकेले TRC की अपर्याप्तता पर जोर देता है।
विशेषज्ञों की राय
- इस फैसले से भविष्य में कर संधियों और सीमा पार समझौतों के अनुप्रयोगों पर प्रभाव पड़ने की उम्मीद है।
- इस निर्णय के आलोक में करदाताओं को अपनी मौजूदा व्यवस्थाओं का मूल्यांकन करने की आवश्यकता हो सकती है।
- सार को रूप से अधिक महत्व देने के सिद्धांत के साथ-साथ GAAR के संचालन का उन लेन-देनों पर व्यापक प्रभाव पड़ता है जहां संधि लाभों का दावा किया जाता है।