टाइगर ग्लोबल-फ्लिपकार्ट शेयर बिक्री मामले पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला
हाल ही में सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले ने दोहरे कराधान से बचाव समझौते (DTAA) के तहत कर लाभ के लिए कर निवास प्रमाण-पत्र (TRC) पर निर्भरता के संबंध में निर्णय लेकर भारत की कर संधियों पर ध्यान आकर्षित किया है।
न्यायालय का फैसला
- सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि विदेशी निवेशक कर लाभ का दावा करने के लिए केवल TRC पर निर्भर नहीं रह सकते।
- संधि संबंधी दावों का मूल्यांकन करते समय कर अधिकारी निवेश संरचनाओं के वाणिज्यिक सार की जांच कर सकते हैं।
- यह जांच 1 अप्रैल, 2017 से पहले किए गए निवेशों पर भी लागू होती है, जब GAAR औपचारिक रूप से लागू हुआ था।
प्रमुख शब्दों की व्याख्या
- DTAA: एक कर संधि जो यह निर्धारित करके आय पर दो बार कर लगने से रोकती है कि कौन सा देश निवेशक की आय पर कर लगा सकता है।
- वाणिज्यिक सार: दावा किए गए कर निवास देश में वास्तविक व्यावसायिक गतिविधि की आवश्यकता।
- GAAR: यदि कोई संरचना मुख्य रूप से वाणिज्यिक सार के बिना कर से बचने के लिए बनाई गई है, तो कर लाभ से इनकार करने की अनुमति देता है।
इस फैसले के निहितार्थ
- यह इस धारणा को अमान्य करता है कि केवल एक TRC ही संधि के लाभों को सुनिश्चित करता है।
- व्यापारिक सार की जांच के कारण मॉरीशस, सिंगापुर और साइप्रस के माध्यम से निजी इक्विटी निकास प्रभावित होते हैं।
- चिंताएं केवल PE फर्मों तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि मॉरीशस और सिंगापुर के माध्यम से डेरिवेटिव में व्यापार करने वाले FPIs तक भी फैली हुई हैं।
संधि का इतिहास और परिवर्तन
- भारत-मॉरीशस DTAA समझौता 2016 में निवास-आधारित कराधान प्रणाली से स्रोत-आधारित कराधान प्रणाली में परिवर्तित हो गया।
- 2017 से पहले किए गए निवेशों को भारत में पूंजीगत लाभ कर से छूट प्राप्त है।
वर्तमान बाजार प्रतिक्रिया
- इस फैसले से FPI के लिए कराधान ढांचे में कोई बदलाव नहीं आएगा।
- व्यापारिक महत्व से जुड़े प्रश्नों के आधार पर संधि के लाभों से वंचित किए जाने की आशंकाएं मौजूद हैं।