भारत में कौशल त्वरण पहल
कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय (MSDE) ने भारत में कौशल त्वरण कार्यक्रम शुरू करने के लिए विश्व आर्थिक मंच (WEF) के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। यह पहल छह अन्य देशों में चल रहे इसी तरह के प्रयासों में शामिल होती है।
कौशल त्वरण कार्यक्रम का उद्देश्य
- बहु-हितधारक मंच: इसका उद्देश्य नवोन्मेषी समाधानों और सार्वजनिक-निजी भागीदारी की पहचान करना, उनका विस्तार करना और उन्हें गति प्रदान करना है।
- कौशल अंतराल को समाप्त करना: आजीवन सीखने, उद्योग-अनुरूप प्रशिक्षण और बड़े पैमाने पर कौशल विकास पर ध्यान केंद्रित करता है।
- वर्तमान प्रतिभागी: अजरबैजान, बहरीन, ब्राजील, इंडोनेशिया, नाइजीरिया और कतर जैसे देश इस पहल का हिस्सा हैं।
भारत को लाभ
- तकनीकी और व्यावसायिक शिक्षा: कौशल विकास संबंधी पहलों को उद्योग की मांगों और वैश्विक अर्थव्यवस्था के अनुरूप बनाती है।
- वैश्विक रोजगार क्षमता: कृत्रिम बुद्धिमत्ता, हरित ऊर्जा, रोबोटिक्स और उन्नत विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में रोजगार क्षमता को बढ़ाता है।
- उद्योग से जुड़ा प्रशिक्षण: समावेशी विकास को बढ़ावा देता है और भारत को कुशल मानव संसाधन के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करता है।
रणनीतियाँ और कार्यान्वयन
- मुख्य फोकस क्षेत्र: आजीवन सीखना, कौशल विकास, कौशल पुनर्विकास और विजन @2047 तथा NEP 2020 के साथ तालमेल बिठाना।
- लचीला पाठ्यक्रम: व्यावसायिक और उच्च शिक्षा के मार्गों का एकीकरण, योग्यताओं की पारस्परिक मान्यता।
- नवाचारी वित्तपोषण: हितधारकों के बीच कौशल विकास और रणनीतिक समन्वय के लिए तंत्रों का समर्थन करता है।
- भविष्य के कार्य क्षेत्रों में सहयोग: कृत्रिम बुद्धिमत्ता, रोबोटिक्स, हरित ऊर्जा, साइबर सुरक्षा और उन्नत विनिर्माण पर जोर।
शासन और रणनीतिक दिशा
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WEF) के साथ मिलकर एक शासन ढांचा स्थापित किया जाएगा जिसमें सरकार और निजी क्षेत्र के सह-अध्यक्ष शामिल होंगे। यह ढांचा रणनीतिक दिशा तय करेगा और कार्यान्वयन की देखरेख करेगा।