भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौता
संवेदनशील क्षेत्रों का अवलोकन एवं संरक्षण
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री के अनुसार, भारत ने हाल ही में संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ संपन्न व्यापार समझौते में अपने संवेदनशील कृषि और डेयरी क्षेत्रों की सफलतापूर्वक रक्षा की है। इस समझौते का उद्देश्य विभिन्न क्षेत्रों में व्यापक अवसर प्रदान करते हुए भारतीय हितों की रक्षा करना है।
शुल्क में कटौती और संवेदनशील क्षेत्र
- शुल्क में कटौती:
- नई दिल्ली औद्योगिक और कृषि उत्पादों पर टैरिफ कम करेगी लेकिन डेयरी, मुर्गी पालन और आनुवंशिक रूप से संशोधित खाद्य पदार्थों जैसे संवेदनशील क्षेत्रों की रक्षा करना जारी रखेगी।
- गैर-संवेदनशील कृषि उत्पादों पर टैरिफ घटाकर शून्य कर दिया जाएगा, जबकि संवेदनशील वस्तुओं पर श्रेणीबद्ध कटौती और कोटा लागू होंगे।
- ऑटोमोबाइल और शराब जैसे उद्योगों में चरणबद्ध तरीके से टैरिफ में कमी की जाएगी।
- औद्योगिक वस्तुओं पर औसत शुल्क: पिछले 13.5% से घटाकर 98-99% उत्पादों के लिए शून्य कर दिया गया है।
भारतीय उद्योगों के लिए अवसर
इस व्यापार समझौते से भारत के श्रम-प्रधान क्षेत्रों, जैसे कि वस्त्र, प्लास्टिक, परिधान, गृह सज्जा, चमड़ा और जूते, रत्न और आभूषण, जैविक रसायन, रबर उत्पाद, मशीनरी और विमान के पुर्जे, के लिए महत्वपूर्ण अवसर खुलने की उम्मीद है, क्योंकि इन क्षेत्रों पर शुल्क में भारी कमी की जाएगी।
भारतीय निर्यात पर प्रभाव
यह समझौता कई भारतीय निर्यातों पर अमेरिका द्वारा लगाए गए 50% तक के शुल्क के बाद हुआ है। गौरतलब है कि भारत ने 2024-25 वित्तीय वर्ष में अमेरिका को 86.5 अरब डॉलर मूल्य का सामान निर्यात किया था। शुल्क में कमी का उद्देश्य भारत को क्षेत्रीय प्रतिस्पर्धियों के बराबर लाना है, जिससे भारतीय निर्यात अधिक प्रतिस्पर्धी बन सके।
भविष्य की संभावनाएं और समझ
- संयुक्त वक्तव्य: दोनों देश समझौते के पहले चरण के विवरण को रेखांकित करते हुए एक संयुक्त वक्तव्य जारी करेंगे।
- अमेरिका-भारत व्यापार का विस्तार:
- भारत का लक्ष्य अगले पांच वर्षों में अमेरिका से 500 अरब डॉलर मूल्य का सामान खरीदना है।
- इसमें प्रौद्योगिकी उत्पादों, तेल और गैस तथा बहुमूल्य धातुओं में महत्वपूर्ण निवेश शामिल हैं।
- गैर-व्यापारिक बाधाएं: भारत की तकनीकी गैर-टैरिफ बाधाओं को कम करने के लिए अमेरिकी मानकों को स्वीकार करने की सहमति है।
बाजार की गतिशीलता और अतिरिक्त शुल्क
अमेरिकी घरेलू कानून की धारा 232 के तहत इस्पात, एल्युमीनियम, तांबा, ऑटोमोबाइल और ऑटो पार्ट्स जैसे उत्पादों पर अतिरिक्त शुल्क लागू होते रहेंगे। हालांकि, ये शुल्क किसी विशेष देश पर लागू नहीं होते, जिससे भारतीय निर्यातकों को होने वाली असुविधाएं कम हो जाती हैं।