ग्रेट निकोबार परियोजना का अवलोकन
ग्रेट निकोबार परियोजना ने विकास की आकांक्षाओं और पर्यावरण संरक्षण संबंधी चिंताओं के बीच संतुलन बनाने के प्रयास में काफी विवाद खड़ा कर दिया है। राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (NGT) की कोलकाता बेंच ने परियोजना के पक्ष में फैसला सुनाते हुए कहा कि सभी पर्यावरणीय सुरक्षा उपाय लागू हैं और इसकी "रणनीतिक उपयोगिता" पर प्रकाश डाला।
परियोजना के प्रमुख घटक
- ट्रांस-शिपमेंट पोर्ट: समुद्री व्यापार को सुगम बनाने के उद्देश्य से बनाई गई परियोजना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा।
- अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा: इसका उद्देश्य संपर्क और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देना है।
- टाउनशिप विकास: बढ़ती जनसंख्या और व्यावसायिक गतिविधियों को समर्थन देने के लिए प्रस्तावित।
- विद्युत संयंत्र: सतत ऊर्जा आवश्यकताओं के लिए 450 मेगावोल्ट-एम्पीयर (MVA) क्षमता वाला गैस और सौर ऊर्जा आधारित विद्युत संयंत्र।
ऐतिहासिक मिसालें और चिंताएँ
यह परियोजना ब्रिटिश फॉस्फेट कमिश्नरों द्वारा नौरू और बनाबा में किए गए फॉस्फेट खनन जैसी पिछली घटनाओं से तुलना करती है, जिसके कारण मूल निवासियों का विनाश और विस्थापन हुआ था।
पर्यावरण और सामाजिक चिंताएँ
- जैव विविधता का नुकसान: 130 वर्ग किलोमीटर में फैले लगभग नौ लाख पेड़ काटे जा सकते हैं, जिससे प्राचीन उष्णकटिबंधीय वन प्रभावित होंगे।
- वन्यजीवों पर प्रभाव: लेदरबैक कछुओं के घोंसला बनाने के स्थानों और प्रवाल पारिस्थितिक तंत्रों के लिए खतरे।
- जनजातीय अधिकार: वन अधिकार अधिनियम के तहत शोम्पेन और निकोबारी जनजातियों के अनसुलझे सामुदायिक अधिकारों को लेकर चिंताएं।
- दबाव के आरोप: जनजातीय परिषद के सदस्यों को भूमि हस्तांतरण के लिए "समर्पण प्रमाण पत्र" पर हस्ताक्षर करने के लिए मजबूर किए जाने की रिपोर्टें।
एनजीटी के आदेश की आलोचना
राष्ट्रीय पर्यावरण परिषद (NGT) के फैसले की आलोचना इस आधार पर की जा रही है कि इसमें पर्यावरण संबंधी चिंताओं की स्वतंत्र रूप से जांच नहीं की गई, बल्कि सरकार के आश्वासनों पर भरोसा किया गया। इस आदेश को स्वतंत्र चिंताओं के लिए निष्पक्ष मूल्यांकन प्रक्रिया का अभाव माना जा रहा है, जिससे परियोजना के कुल लाभ पर संदेह पैदा होता है।