NGT ने परियोजना के "रणनीतिक महत्त्व" को ध्यान में रखते हुए, इसकी पर्यावरणीय मंजूरी और ICRZ (द्वीप तटीय विनियमन क्षेत्र) तथा CRZ मानदंडों के अनुपालन को बरकरार रखा है।
ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट के बारे में
- अवस्थिति: यह प्रोजेक्ट ग्रेट निकोबार द्वीप में निर्मित की जा रही है। यह अंडमान और निकोबार द्वीप समूह का सबसे दक्षिणी द्वीप है। इसमें गलाथिया खाड़ी, कैंपबेल बे और ग्रेट निकोबार बायोस्फीयर रिज़र्व के हिस्से शामिल हैं।
- उद्देश्य: इस दूरस्थ क्षेत्र को एक प्रमुख ट्रांसशिपमेंट और रक्षा केंद्र में बदलना। इसमें एकीकृत टाउनशिप; 450 MVA गैस और सौर-आधारित विद्युत संयंत्र; दोहरे उपयोग वाला (असैन्य-सैन्य) हवाई अड्डा आदि शामिल हैं।
- कार्यान्वयन एजेंसी: अंडमान और निकोबार द्वीप समूह एकीकृत विकास निगम (ANIIDCO) तथा नीति (NITI) आयोग।
परियोजना से जुड़ी चिंताएं
- विनियामक कमियां:
- पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (EIA) व्यापक बहु-सांस्कृतिक मूल्यांकन की बजाय केवल एक मौसम के डेटा पर आधारित था।
- हरियाणा में प्रस्तावित प्रतिपूरक वनीकरण एक उष्णकटिबंधीय वर्षावन पारिस्थितिकी-तंत्र के नुकसान की भरपाई के लिए अपर्याप्त है।
- वन अधिकार अधिनियम (FRA): जनजातीय परिषद द्वारा अपनी सहमति वापस लेने के बावजूद भी सरकार परियोजना को आगे बढ़ा रही है।
- पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (EIA) व्यापक बहु-सांस्कृतिक मूल्यांकन की बजाय केवल एक मौसम के डेटा पर आधारित था।
- जैव विविधता को खतरा: इस परियोजना में लगभग 130 वर्ग किमी उष्णकटिबंधीय वर्षावन का गैर-वन उद्देश्यों के लिए उपयोग शामिल है। इसमें लगभग 10 लाख वृक्षों की कटाई की जाएगी। यह वर्षावन निकोबार मेगापोड, निकोबार ट्री श्रू, विशाल लेदरबैक कछुए और मूंगों (corals) का आश्रय स्थल है।
- सामाजिक प्रभाव: परियोजना का जनजातीय आबादी, जैसे शोंपेन (विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह - PVTG) और निकोबारी पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
- प्राकृतिक आपदा के प्रति सुभेद्यता: यह द्वीप उच्चतम भूकंपीय-जोखिम क्षेत्र (जोन V) में आता है।
भारत के लिए परियोजना का महत्त्व
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