पांच वर्षों की लगभग निष्क्रियता के बाद, उच्चतम न्यायालय ने नदियों के प्रदूषण निवारण पर अपनी 2021 की स्वतः संज्ञान कार्यवाही को बंद कर दिया है। साथ ही, प्राथमिक निगरानी की जिम्मेदारी राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) को स्थानांतरित कर दी है।
- न्यायालय ने यह भी टिप्पणी की कि 'मानवीय गरिमा के साथ स्वच्छ वातावरण और स्वच्छ परिस्थितियों में जीने का अधिकार', संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत 'जीवन के अधिकार' का हिस्सा है।
भारत में नदी प्रदूषण (केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड/CPCB की 2025 की रिपोर्ट के अनुसार)
- प्रदूषित नदी खंड (Polluted River Stretch: PRS): इन्हें उन क्षेत्रों के रूप में परिभाषित किया जाता है, जहां बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड (BOD) 3 mg/L से अधिक होती है।
- BOD (जल गुणवत्ता का मुख्य संकेतक): यह एक विशिष्ट अवधि में जल में मौजूद कार्बनिक पदार्थों को अपघटित करने के लिए वायवीय सूक्ष्मजीवों (aerobic microorganisms) द्वारा आवश्यक घुलनशील ऑक्सीजन की मात्रा है।
- स्थिति: 32 राज्यों और संघ राज्यक्षेत्रों में आकलित 645 नदियों में से 271 नदियों पर 296 नदी खंड प्रदूषित पाए गए हैं। सबसे अधिक प्रदूषित खंड महाराष्ट्र (54) में हैं।
- इनमें दिल्ली में यमुना, अहमदाबाद में साबरमती, मध्य प्रदेश में चंबल, कर्नाटक में तुंगभद्रा और तमिलनाडु में सरबंगा शामिल हैं।
नदी प्रदूषण के प्रमुख स्रोत
- अनुपचारित सीवेज: CPCB के अनुसार, प्रतिदिन 60% से अधिक अनुपचारित सीवेज का अपशिष्ट जल नदियों में छोड़ा जाता है।
- अनुपचारित औद्योगिक अपशिष्ट: रसायन, चीनी, कागज और चमड़ा उद्योग अपशिष्ट जल उत्पन्न करते हैं।
- अन्य: नगरपालिका ठोस अपशिष्ट, कृषि अपवाह, रेत खनन और अवैध अतिक्रमण।
नदियों की सफाई और कायाकल्प के लिए पहलें
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