राष्ट्रीय औद्योगिक वर्गीकरण (NIC) | Current Affairs | Vision IAS
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हाल ही में केंद्रीय सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) ने NIC 2025 का ड्राफ्ट जारी किया है। यह NIC 2008 का संशोधित संस्करण है।

राष्ट्रीय औद्योगिक वर्गीकरण (NIC) के बारे में

  • NIC कोड वास्तव में संख्यात्मक वर्गीकरण प्रणाली है। इसका उपयोग आर्थिक गतिविधियों को अलग-अलग क्षेत्रकों में वर्गीकृत करने के लिए किया जाता है।
  • यह सांख्यिकीय सर्वेक्षणों और जनगणनाओं में, आर्थिक अनुसंधान में, पंजीकरण प्रक्रियाओं में; केंद्र और राज्य सरकार की नीतिगत रूपरेखा तैयार करने जैसे अलग-अलग क्षेत्रों में उपयोग किया जाता है। 
  • भारत का पहला मानक औद्योगिक वर्गीकरण (Standard Industrial Classification) 1962 में जारी किया गया था।
  • इसके बाद समय-समय पर इसमें संशोधन किए गए, ताकि इसे अंतर्राष्ट्रीय मानक औद्योगिक वर्गीकरण (ISIC) के अनुरूप रखा जा सके।

हाल ही में, शोधकर्ताओं ने पश्चिमी घाट में ब्लैक एस्परगिलस की दो नई प्रजातियों की पहचान की है।

एस्परगिलस के बारे में:

  • एस्परगिलस एक प्रकार के फिलामेंटस कवक (fungi) का समूह है, जो सैप्रोफाइट्स, एंडोफाइट्स, और अवसरवादी रोगजनक (Opportunistic pathogens) के रूप में काम कर सकते हैं।
  • बायोटेक्नोलॉजी में उपयोग: ब्लैक एस्परगिलस साइट्रिक एसिड उत्पादन, खाद्य पदार्थ के किण्वन (एंजाइम, कार्बनिक अम्ल आदि का उत्पादन), और कृषि (फॉस्फेट स्थिरीकरण क्षमता) में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
  • इसकी कुछ प्रजातियाँ खतरनाक फंगल रोगजनक का कारण बन सकती हैं और यह कैंसरजनक भी हो सकती हैं।

केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्रालय ने “आदि संस्कृति” का बीटा संस्करण लॉन्च किया।

  • आदि संस्कृति जनजातीय कला रूपों के लिए विश्व का पहला डिजिटल लर्निंग प्लेटफॉर्म है। 

मुख्य घटक:

  • आदि विश्वविद्यालय (डिजिटल कला अकादमी): अभी इसमें जनजातीय नृत्य, चित्रकला, शिल्प, संगीत और लोककथाओं पर 45 विस्तृत पाठ्यक्रम (कोर्स) उपलब्ध हैं।
  • आदि संपदा (सामाजिक-सांस्कृतिक दस्तावेजों का भंडार): यह चित्रकला, नृत्य, वस्त्र एवं परिधान, कलाकृतियाँ और आजीविका जैसे पाँच विषयों पर आधारित 5,000 से अधिक चयनित दस्तावेजों का संग्रह है।
  • आदि हाट (ऑनलाइन मार्केटप्लेस): वर्तमान में यह ट्राइफेड से जुड़ा हुआ है। भविष्य में इसे एक स्वतंत्र ऑनलाइन मार्केटप्लेस के रूप में विकसित किया जाएगा, जहाँ जनजातीय शिल्पकारों को सीधे उपभोक्ता तक पहुँच बनाने और सतत आजीविका का अवसर मिलेगा।

ईरान और अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) ने एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं, जिससे दोनों पक्षों के बीच परमाणु क्षेत्र में सहयोग फिर से शुरू करने का मार्ग प्रशस्त होगा। इसमें ईरान के परमाणु केंद्रों के पुनः निरीक्षण की व्यवस्था भी शामिल है।

  • इससे पहले, ईरान ने इजरायल और संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ विवाद के बाद IAEA के साथ परमाणु सहयोग निलंबित करने के लिए एक कानून बनाया था।

अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के बारे में

  • IAEA परमाणु अप्रसार के मामले में अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा उपायों का प्रशासन करता है। यह सुनिश्चित करता है कि परमाणु अप्रसार संधि (NPT) के परमाणु-हथियार रहित पक्षकार देश परमाणु-अप्रसार के प्रति अपनी प्रतिबद्धताओं का पालन करें।
    • IAEA विशेषकर NPT के परमाणु हथियार रहित पक्षकार देशों में परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोगों के विकास में भी मदद करता है।

ईरान परमाणु समझौता (JCPOA) के बारे में

  • इसे जॉइंट कॉम्प्रिहेंसिव प्लान ऑफ एक्शन (JCPOA) भी कहा जाता है।
  • इसके तहत ईरान ने अपनी परमाणु गतिविधियों को कम करने और निरीक्षकों को अपने परमाणु केंद्रों के अधिक निरीक्षण की अनुमति देने पर सहमति दी थी।

हाल ही में, अटल इनोवेशन मिशन के तहत भारत का पहला अंतर्राष्ट्रीय अटल इनोवेशन सेंटर, संयुक्त अरब अमीरात स्थित IIT दिल्ली-अबू धाबी कैंपस में खोला गया है।

अटल इनोवेशन मिशन (AIM) के बारे में:

  • यह भारत सरकार की एक प्रमुख पहल है, जिसे नीति आयोग द्वारा संचालित किया जाता है।
  • लक्ष्य: देश में नवाचार और उद्यमिता की संस्कृति को बढ़ावा देना। 
  • AIM के प्रमुख कार्यक्रम:
  • अटल टिंकरिंग लैब: स्कूल के स्तर (6वीं से 12वीं कक्षा) पर नवाचार को बढ़ावा देने के लिए।
  • अटल इन्क्यूबेशन सेंटर: विश्वविद्यालयों, संस्थानों और कंपनियों में युवाओं के बीच उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए।
  • ARISE-ANIC कार्यक्रम: MSMEs और स्टार्टअप्स में नवाचार को समर्थन देने के लिए।

ISRO ने हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के साथ SSLV तकनीक के हस्तांतरण पर एक समझौता किया है।

SSLV के बारे में:

  • SSLV को शीघ्र और मांग के आधार पर प्रक्षेपण वाले लॉन्च व्हीकल के रूप में डिजाइन किया गया है। औद्योगिक जरूरत के अनुरूप उत्पादन का प्रभावी ढंग से विस्तार किया जा सकता है।
  • इसमें तीन ठोस प्रणोदन चरण, और एक तरल प्रणोदन आधारित वेलोसिटी ट्रिमिंग मॉड्यूल (VTM) होता है, जो टर्मिनल स्टेज के रूप में कार्य करता है।
  • यह 500 किलोग्राम तक के वजन वाले उपग्रहों को लोअर अर्थ ऑर्बिट (LEO) में लॉन्च करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

इनोवेशन फॉर डिफेंस एक्सीलेंस - डिफेंस इनोवेशन ऑर्गनाइजेशन (iDEX-DIO) ने EdCIL (इंडिया) लिमिटेड के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। यह समझौता एस्पायर/ASPIRE (एक्सीलरेटिंग स्ट्रेटेजिक प्रोग्रेस इन रिसर्च एंड एजुकेशन) कार्यक्रम से प्रेरित है।

  • इस MoU का उद्देश्य ड्यूल-यूज़ वाली अत्याधुनिक तकनीकों के विकास को बढ़ावा देना है, जो रक्षा क्षेत्रक संबंधी विशेषज्ञता को नए एजु-टेक समाधानों के साथ जोड़ता है।

iDEX-DIO के बारे में:

  • iDEX योजना 2021 में शुरू की गई थी। इसका उद्देश्य लगभग 300 स्टार्टअप्स, MSMEs, और इनोवेटर्स को वित्तीय सहायता प्रदान करना तथा लगभग 20 साझेदार इनक्यूबेटर्स को सहयोग देना है।
  • iDEX को डिफेंस इनोवेशन ऑर्गनाइजेशन (DIO) द्वारा वित्तपोषित और प्रबंधित किया जा रहा है।DIO रक्षा उत्पादन विभाग के तहत एक "नॉट-फॉर-प्रॉफिट" कंपनी के रूप में स्थापित किया गया है।
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