यह समझौता ज्ञापन RBI को दिल्ली सरकार के बैंकर, ऋण प्रबंधक और वित्तीय एजेंट के रूप में कार्य करने में सक्षम बनाएगा।
- उल्लेखनीय है कि RBI द्वारा राज्यों के सार्वजनिक ऋण के प्रबंधन जैसे कार्य राज्य सरकारों के साथ किए गए समझौते के तहत किए जाते हैं।
- वर्तमान में, सिक्किम को छोड़कर RBI और अन्य सभी राज्य सरकारों के बीच ऐसे समझौते मौजूद हैं।
सरकार के बैंकर के रूप में RBI की भूमिका
- केंद्र सरकार के लिए: RBI अधिनियम, 1934 की धारा 20 के तहत RBI पर प्राप्तियों व भुगतानों को संभालने तथा विनिमय, विप्रेषण (Remittance) और अन्य बैंकिंग कार्यों को संपन्न करने का उत्तरदायित्व है। इस जिम्मेदारी में केंद्र के सार्वजनिक ऋण का प्रबंधन भी शामिल है।
- प्रतिभूतियां (Securities) जारी करना: RBI सरकारी प्रतिभूतियों के माध्यम से वित्त जुटाने में मदद करता है।
- केंद्र सरकार ट्रेजरी बिल्स और बॉण्ड्स (या दिनांकित प्रतिभूतियां) दोनों जारी कर सकती है।
- इसके विपरीत, राज्य सरकारें केवल बॉण्ड्स (या दिनांकित प्रतिभूतियां) ही जारी कर सकती हैं, जिन्हें राज्य विकास ऋण (SDLs) कहा जाता है।
- खाता प्रबंधन: RBI अपने केंद्रीय लेखा अनुभाग (नागपुर) में केंद्र के साथ-साथ राज्य सरकारों के भी प्रधान खाते (Principal Accounts) रखता है।
RBI के अन्य कार्य
|