"ऑपरेशन एपिक फ्यूरी" के तहत ईरान पर अमेरिकी हवाई हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता, अयातुल्ला अली खामनेई की मृत्यु हो गई है। इससे मध्य पूर्व में तनाव काफी बढ़ गया है।
- इन हमलों के खिलाफ प्रतिक्रिया में ईरान ने मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं। इससे क्षेत्रीय स्थिति अत्यंत गंभीर हो गई है।
वर्तमान तनाव की पृष्ठभूमि
- 1979 के बाद की शत्रुता: 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद से अमेरिका-ईरान संबंध तनावपूर्ण रहे हैं। ये संबंध प्रतिबंधों, कूटनीतिक विच्छेद और वैचारिक प्रतिद्वंद्विता से चिह्नित हैं।
- परमाणु विवाद: ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर विवाद तब और बढ़ गया जब अमेरिका 2015 की 'संयुक्त व्यापक कार्य योजना' (JCPOA) से पीछे हट गया और ईरान पर पुनः सख्त प्रतिबंध लागू कर दिए।
- छद्म युद्ध (Proxy Warfare) व क्षेत्रीय प्रभाव: लेबनान, सीरिया, इराक और यमन में हमास एवं हिजबुल्लाह जैसे सहयोगी समूहों को ईरान के समर्थन ने उसके क्षेत्रीय प्रभाव को बढ़ाया है। इससे अमेरिका और इजरायल के लिए सुरक्षा चिंताएं उत्पन्न हो गई हैं।

संघर्ष के परिणाम
- क्षेत्रीय अस्थिरता: इस तनाव से मध्य पूर्व में व्यापक संघर्ष का खतरा बढ़ गया है। उदाहरण के लिए- संयुक्त अरब अमीरात (UAE) जैसे खाड़ी देशों में अमेरिकी सैन्य अड्डों और सहयोगी स्थानों पर मिसाइल एवं ड्रोन हमले।
- ऊर्जा सुरक्षा को खतरा: ईरान ने रणनीतिक होर्मुज जलडमरूमध्य को प्रभावी रूप से बंद कर दिया है। यह एक महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है, जहां से विश्व का 20% तेल व्यापार होता है।
- वैश्विक व्यापार एवं कनेक्टिविटी: खाड़ी में समुद्री असुरक्षा से माल ढुलाई और बीमा लागत बढ़ सकती है, प्रमुख पोत परिवहन मार्ग बाधित हो सकते हैं तथा पश्चिम एशियाई ऊर्जा प्रवाह पर निर्भर वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हो सकती है।
- परमाणु विस्तार का जोखिम: संघर्ष से रणनीतिक शंकाएं और संभावित परमाणु विस्तार का खतरा बढ़ गया है।
- भारत पर प्रभाव:
- आर्थिक प्रभाव: भारत अपने कच्चे तेल की आवश्यकता का लगभग 85% आयात करता है। इसका एक बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया से आता है। तेल की बढ़ती कीमतें चालू खाता घाटे (CAD) को बढ़ा सकती हैं और मुद्रास्फीति (महंगाई) को प्रेरित कर सकती हैं।
- भारतीय प्रवासियों की सुरक्षा: खाड़ी क्षेत्र में लगभग 80-90 लाख भारतीय रहते हैं। उनकी सुरक्षा, विप्रेषण (remittances) की स्थिरता और आवश्यकता पड़ने पर उनके निष्कासन की व्यवस्था करना भारत के लिए प्रमुख नीतिगत चिंताएं हैं।