इस संयंत्र का विकास अमेरिकी निजी फर्म माइक्रोन (Micron) ने किया है। यह संयंत्र सेमीकंडक्टर चिप्स की असेंबली, टेस्टिंग, मार्किंग और पैकेजिंग (ATMP) की सुविधा प्रदान करेगा।
भारत के लिए महत्त्व
- आपूर्ति श्रृंखला में आत्मनिर्भरता: इससे चिप्स के लिए विशेषकर चीन पर भारी आयात निर्भरता में कमी होगी। साथ ही, वैश्विक व्यवधानों (जैसे व्यापार युद्ध) के खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता प्राप्त होगी।
- रणनीतिक महत्त्व: रक्षा, दूरसंचार (5G/6G), AI, अंतरिक्ष और डिजिटल अवसंरचना के लिए महत्वपूर्ण होगा। इससे राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूती मिलेगी।
- आर्थिक और निर्यात वृद्धि: इससे इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को बढ़ावा मिलेगा तथा प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) आकर्षित होगा। इससे भारत को 2030 तक $1 ट्रिलियन के सेमीकंडक्टर बाजार में बड़ी हिस्सेदारी हासिल करने में मदद मिलेगी।
- अन्य: यह उच्च-कुशल रोजगार सृजित करेगा; 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान का समर्थन करेगा आदि।
भारत में सेमीकंडक्टर उद्योग के लिए शुरू की गई पहलें
- इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) 1.0 और 2.0: एक व्यापक सेमीकंडक्टर विनिर्माण तंत्र बनाने के लिए अम्ब्रेला कार्यक्रम।
- ISM 2.0 (बजट 2026-27): यह उपकरणों, सामग्रियों, फुल-स्टैक (शुरुआत से अंत तक संपूर्ण तंत्र) भारतीय बौद्धिक संपदा (IP) डिजाइन, आपूर्ति श्रृंखला लचीलापन और कौशल विकास को मजबूत करने पर केंद्रित है।
- सेमीकंडक्टर और डिस्प्ले फैब्स योजनाएं: भारत में सेमीकंडक्टर वेफर फैब्रिकेशन और डिस्प्ले विनिर्माण इकाइयां स्थापित करने के लिए राजकोषीय सहायता।
- कंपाउंड सेमीकंडक्टर और ATMP/OSAT योजना: घरेलू मूल्य श्रृंखला को मजबूत करने के लिए चिप असेंबली, परीक्षण, पैकेजिंग और विशेषीकृत सेमीकंडक्टर खंडों (सेग्मेंट्स) के लिए सहायता।
- डिजाइन से संबद्ध प्रोत्साहन (DLI) योजना: स्वदेशी चिप डिजाइन और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए स्टार्ट-अप्स एवं MSMEs को प्रोत्साहन।
- वैश्विक साझेदारी और कौशल पहल: भारत-अमेरिका iCET सहयोग; 'सेमीकॉन इंडिया' प्लेटफॉर्म; तथा C2S एवं VLSI पाठ्यक्रम सुधार जैसे कार्यक्रम, ताकि कुशल कार्यबल तैयार किया जा सके और निवेश आकर्षित किया जा सके।
चुनौतियां जिनका समाधान किया जाना आवश्यक है
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