RBI के अनुसार, देश में अप्रैल 2025 से फरवरी 2026 के बीच सकल प्रत्यक्ष विदेशी निवेश 88.3 बिलियन डॉलर रहा, जबकि निवल प्रत्यक्ष विदेशी निवेश केवल 6.3 बिलियन डॉलर रहा।
प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) के बारे में
- अर्थ: प्रत्यक्ष विदेशी निवेश वह निवेश है जिसमें भारत के बाहर रहने वाला व्यक्ति/संस्था किसी भारतीय कंपनी में निवेश करता है:
- किसी गैर-सूचीबद्ध (अनलिस्टेड) भारतीय कंपनी में इक्विटी (शेयर खरीद) के माध्यम से; या
- स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध किसी भारतीय कंपनी में पूरी तरह से डाइल्यूटेड आधार पर इश्यू के बाद की 10% या उससे अधिक पेड-अप इक्विटी कैपिटल खरीद के माध्यम से।
- पोस्ट-इश्यू पेड-अप इक्विटी कैपिटल किसी कंपनी की कुल शेयर पूंजी होती है, जो नए निवेश (post-issue) के बाद मानी जाती है।
- विनियमन: समेकित FDI नीति (2020); विदेशी मुद्रा प्रबंधन (गैर-ऋण लिखत) नियम, 2019 के तहत।
- सकल (Gross) FDI बनाम निवल (Net) FDI:
- सकल FDI: विदेशी संस्थाओं द्वारा भारत की उत्पादक परिसंपत्तियों में प्रत्यक्ष रूप से किया गया कुल निवेश।
- निवल FDI: यह देश में आकर्षित प्रत्यक्ष विदेशी निवेश और देश से बाहर जाने वाले प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के बीच का अंतर है।
- देश से बाहर जाने वाले प्रत्यक्ष विदेशी निवेश में विदेशी कंपनियों द्वारा अपना लाभ वापस अपने मूल देश भेजना और भारतीय कंपनियों द्वारा विदेशों में किया गया निवेश शामिल हैं।
कम निवल FDI के प्रमुख कारण
- निवेशकों द्वारा निवेश की निकासी: इसमें विदेशी निवेशकों द्वारा विनिवेश शामिल है, जो भारत में निवल प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को सीमित करता है। हालांकि, यह एक परिपक्व बाजार का संकेत है जहां निवेशक सुचारू रूप से प्रवेश और निकास कर सकते हैं।
- भारतीय कंपनियों द्वारा विदेशों में उच्च प्रत्यक्ष निवेश (ODI): भारतीय कंपनियों का विदेशों में विस्तार हुआ है और वे वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं से जुड़ी हैं। कंपनियों के बैलेंस शीट मजबूत होना और उदारीकृत ODI फ्रेमवर्क (2022) इसके मुख्य कारक हैं।
- भू-राजनीतिक संकट: वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक संघर्ष और सख्त वित्तीय स्थितियों की वजह से नई (Greenfield) परियोजनाओं की घोषणाओं को धीमा कर दिया है।
भारत में FDI बढ़ाने के प्रमुख उपाय
- अलग-अलग क्षेत्रकों में सुधार: रक्षा, बीमा, पेंशन, कोयला खनन, नागरिक विमानन जैसे क्षेत्रकों में FDI की ऊपरी सीमा में वृद्धि की गई है।
- कई क्षेत्रकों में स्वचालित मार्ग (सरकारी अनुमति के बिना) से लगभग 90% FDI की अनुमति दी गई है।
- व्यावसायिक माहौल में सुधार: इसके लिए व्यवसाय सुधार कार्य योजना (BRAP) 2024 रैंकिंग; लॉजिस्टिक्स ईज अक्रॉस डिफरेंट स्टेट्स (LEADS) 2024; जन विश्वास (प्रावधानों में संशोधन) अधिनियम, 2023 जैसे कदम उठाए गए हैं।
- विश्व में भागीदारी: भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता (FTA); भारत-ओमान व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौता (CEPA), आदि पर हस्ताक्षर किए गए हैं।