असाधारण विस्तार और तीव्र विकास को दर्शाते हुए, UPI प्रणाली भारत की डिजिटल भुगतान प्रणाली की रीढ़ बनकर उभरी है।
UPI के बारे में
- प्रारंभ: अप्रैल 2016 में भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (National Payments Corporation of India: NPCI) द्वारा। यह भुगतान प्रणाली भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के विनियामक पर्यवेक्षण में कार्य करती है।
- अर्थ: UPI एक ऐसी प्रणाली है जो कई बैंक खातों को एक ही मोबाइल ऐप (किसी भी भाग लेने वाले बैंक के) से जोड़ती है। यह विभिन्न बैंकिंग सुविधाओं को एक साथ लाकर पैसे का आसानी से ट्रांसफर और व्यापारियों को भुगतान एक ही प्लेटफॉर्म पर संभव बनाती है।

UPI की प्रमुख उपलब्धियां
- वार्षिक लेनदेन की मात्रा (संख्या): वित्तीय वर्ष 2016-17 में 2 करोड़ से बढ़कर वित्तीय वर्ष 2025-26 में 24,162 करोड़ हो गई।
- वर्ष 2025 में, इसने लगभग 22,000 करोड़ लेनदेन संसाधित (प्रोसेस) किए, जिसमें औसत दैनिक लेनदेन लगभग 60 करोड़ रहा।
- UPI से जुड़े बैंक: वित्त वर्ष 2016-17 में 44 बैंकों से बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 तक 703 बैंक हो गए हैं। इनमें सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक, निजी क्षेत्र के बैंक, लघु वित्त बैंक, पेमेंट्स बैंक और सहकारी बैंक, आदि शामिल हैं।
- वैश्विक पहुंच: वर्ष 2024 में विश्व के लगभग 49% रियल-टाइम भुगतान लेनदेन (संख्या के अनुसार) UPI के जरिए हुए। इसकी पुष्टि अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने भी की है।
- यह कई देशों में संचालित हो चुका है, जैसे— संयुक्त अरब अमीरात, सिंगापुर, फ्रांस, भूटान, नेपाल, श्रीलंका, मॉरीशस, कतर। इससे इसकी वैश्विक स्वीकार्यता बढ़ी है।
भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) के बारे में
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