आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26: मुख्य बिंदु
मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन द्वारा प्रस्तुत आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26, भारत की घरेलू वृद्धि के लिए आशावादी दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है, लेकिन संभावित वैश्विक आर्थिक चुनौतियों को भी स्वीकार करता है।
भारत का घरेलू विकास दृष्टिकोण
- भारत के लिए मध्यम अवधि के विकास के अनुमान को पिछले 6.5% से बढ़ाकर 7% कर दिया गया है।
- विकास के कारकों में शामिल हैं:
- पूंजी में वृद्धि और श्रम की भागीदारी में सुधार।
- संसाधनों के उपयोग में अधिक दक्षता।
- 2025-26 में विकास का अनुमान 7.4% है, जिसमें तीसरी तिमाही के लिए 7% की वृद्धि का पूर्वानुमान है।
- 2026-27 के लिए विकास का अनुमान 6.8-7.2% के बीच है।
सुधार और पहलें
- पिछले तीन वर्षों में हुए महत्वपूर्ण सुधारों ने विकास को बढ़ावा दिया है:
- उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजनाएँ।
- प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) उदारीकरण और लॉजिस्टिक्स सुधार।
- अवसंरचना में सार्वजनिक निवेश और कर कानूनों का सरलीकरण।
- लघु एवं मध्यम उद्यमों के लिए ऋण संबंधी बाधाओं को कम करने के उद्देश्य से उपाय।
वैश्विक आर्थिक परिदृश्य
- 2008 के वित्तीय संकट से भी बदतर संकट की आशंका 10-20% के बीच आंकी गई है।
- सर्वोत्तम परिदृश्य के अनुसार, 2025 में भी स्थितियां और अधिक नाजुकता के साथ जारी रहने की 40-45% संभावना है।
- रणनीतिक प्रतिद्वंद्विता में वृद्धि के साथ "अव्यवस्थित बहुध्रुवीय विघटन" की संभावना भी 40-45% है।
- कृत्रिम बुद्धिमत्ता में अत्यधिक निवेश और भू-राजनीतिक तनाव से उत्पन्न चुनौतियाँ।
भारत के लिए निहितार्थ
- बेहतर स्थिति के बावजूद, भारत को निम्नलिखित जोखिमों का सामना करना पड़ता है:
- पूंजी प्रवाह में व्यवधान और रुपये पर प्रभाव।
- आयात खर्चों की भरपाई के लिए निवेशकों की रुचि जगाना और निर्यात से होने वाली आय को बढ़ाना महत्वपूर्ण है।