UGC विनियम 2026 पर सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय
भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के 2026 के विनियमों पर रोक लगा दी है, जिनका उद्देश्य उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देना था।
प्रमुख चिंताएँ
- भेदभाव पर ध्यान केंद्रित:
- आरोप है कि ये नियम शैक्षणिक परिसरों के भीतर अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) और अन्य पिछड़ा समुदाय (ओबीसी) के खिलाफ जाति-आधारित भेदभाव पर ही केंद्रित हैं।
- इस बात को लेकर चिंता जताई जा रही है कि ये नियम उच्च जाति या सामान्य वर्ग के छात्रों की सुरक्षा करने में विफल रहे हैं।
- संभावित सामाजिक विभाजन:
- मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि इन नियमों के "व्यापक परिणाम" हो सकते हैं जो समाज को विभाजित कर सकते हैं।
रैगिंग और इसके कानूनी निहितार्थ
- रैगिंग संबंधी चिंताएँ:
- शैक्षणिक परिसरों में रैगिंग को एक महत्वपूर्ण मुद्दे के रूप में उजागर किया गया है।
- एक संभावित परिदृश्य यह है कि सामान्य श्रेणी के किसी नए छात्र द्वारा SC सीनियर द्वारा रैगिंग का विरोध करने पर 2026 के विनियमों के तहत शिकायतें दर्ज की जा सकती हैं।
- कानूनी परिणाम:
- याचिकाकर्ताओं के वकील ने तर्क दिया कि ऐसी स्थितियां पुलिस मामलों में तब्दील हो सकती हैं, जिसके परिणामस्वरूप नए छात्र पर आरोप लगाया जा सकता है, उसे जेल भेजा जा सकता है और कॉलेज जीवन की शुरुआत में ही उसका भविष्य खतरे में पड़ सकता है।
न्यायालय का अंतरिम निर्णय
- सुप्रीम कोर्ट इस बात से सहमत था कि 2026 के विनियमों की गहन जांच की आवश्यकता है।
- फिलहाल, 2012 के UGC विनियम प्रभावी रहेंगे।