सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशा-निर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) संशोधन नियम, 2026
IT नियमों में हाल ही में किए गए संशोधन से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर AI द्वारा उत्पन्न छवियों के संबंध में महत्वपूर्ण बदलाव आए हैं।
मुख्य आवश्यकताएँ
- सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को एआई द्वारा उत्पन्न छवियों को प्रमुखता से लेबल करना होगा।
- इस संशोधन में अब प्रकटीकरण लेबल के लिए कोई विशिष्ट आकार निर्धारित नहीं किया गया है।
- यह आवश्यकता कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) द्वारा निर्मित ऐसी सामग्री पर लागू नहीं होती है जिसका उद्देश्य वास्तविक होने का भ्रामक प्रमाण प्रस्तुत करना नहीं है।
- लेबलिंग की अनिवार्यता को एक सकारात्मक कदम के रूप में देखा जा रहा है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उपयोगकर्ताओं को पता चले कि सामग्री कृत्रिम है या कृत्रिम।
नियामक दृष्टिकोण
- भारत का लक्ष्य AI को न्यूनतम रूप से विनियमित करना है, जो AI इम्पैक्ट समिट में अपनाए गए दृष्टिकोण के अनुरूप है।
- प्रौद्योगिकी के तीव्र विकास को देखते हुए, सरकार प्लेटफार्मों द्वारा कृत्रिम सामग्री का सक्रिय रूप से पता लगाने से संबंधित नियमों की समीक्षा करने की योजना बना रही है।
अनुपालन समयसीमा से संबंधित चिंताएँ
- नए नियमों के तहत सामग्री हटाने की समयसीमा घटाकर दो या तीन घंटे कर दी गई है।
- इस बदलाव के कारण प्लेटफॉर्म को निम्नलिखित में से किसी एक विकल्प को चुनना होगा:
- हर समय सशक्त प्रतिनिधि उपलब्ध रहें।
- "पहले हटा दो, बाद में सवाल पूछो" वाला दृष्टिकोण अपनाएं।
- इन परिवर्तनों को लागू करने से पहले सार्वजनिक परामर्श का अभाव एक समस्या के रूप में सामने आया है।
- कम समय सीमा सोशल मीडिया क्षेत्र में नए प्रवेशकों के लिए बाधाएं खड़ी करती है, जिससे नवाचार और प्रतिस्पर्धा बाधित हो सकती है।
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर प्रभाव
ऐसी आशंकाएं हैं कि ये नियम अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को प्रभावित कर सकते हैं, खासकर तब जब सूचना प्रौद्योगिकी नियम वर्तमान में कानूनी जांच के दायरे में हैं। संसदीय बहस के बिना अचानक किए गए बदलावों का सोशल मीडिया प्रशासन पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।