एक राष्ट्र एक चुनाव विधेयक
संसद की संयुक्त समिति 'एक राष्ट्र एक चुनाव' विधेयक की जांच कर रही है, जिसमें लोक सभा और राज्य/केंद्र शासित प्रदेश विधान सभा चुनावों को एक साथ कराने का प्रस्ताव है।
पूर्व मुख्य न्यायाधीशों के साथ परामर्श
- भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई और पांच अन्य पूर्व मुख्य न्यायाधीशों ने कहा है कि ये विधेयक संविधान की मूल संरचना का उल्लंघन नहीं करते हैं।
- जिन अन्य पूर्व CJI से परामर्श किया गया उनमें यूयू ललित, रंजन गोगोई, जेएस खेहर, डीवाई चंद्रचूड़ और संजीव खन्ना शामिल हैं।
विधेयकों की संवैधानिकता
- न्यायमूर्ति गवई ने पुष्टि की कि विधेयक संवैधानिक हैं और अनुच्छेद 368 के तहत संसद की संशोधन करने की क्षमता के दायरे में आते हैं।
- उन्होंने कहा कि ये विधेयक लोकतंत्र, संघवाद या संविधान की मूल संरचना का उल्लंघन नहीं करते हैं।
- प्रस्तावित बदलाव केवल चुनाव चक्र को प्रभावित करेंगे, राज्यों की शक्ति को नहीं।
संशोधन विधेयकों की प्रमुख विशेषताएं
- कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल द्वारा 17 दिसंबर, 2024 को पेश किए गए दो विधेयक:
- संविधान (129वाँ संशोधन) विधेयक, 2024
- केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2024
- संविधान संशोधन विधेयक में एक बार के उपाय का प्रस्ताव है जिसके तहत किसी विशिष्ट लोक सभा चुनाव के बाद चुनी गई सभी राज्य और केंद्र शासित प्रदेश विधान सभाओं का कार्यकाल लोक सभा के कार्यकाल के साथ संरेखित किया जाएगा।
समिति की प्रगति
संयुक्त समिति ने पूर्व मुख्य न्यायाधीशों, न्यायाधीशों, मुख्यमंत्रियों, कानूनी विशेषज्ञों और अर्थशास्त्रियों सहित विभिन्न हितधारकों के साथ विचार-विमर्श किया है।