सीबीएसई का कम्प्यूटेशनल थिंकिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर आधारित नया पाठ्यक्रम
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने कक्षा III से VIII तक के लिए कम्प्यूटेशनल थिंकिंग (CT) और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर केंद्रित एक नया पाठ्यक्रम शुरू किया है, जिसे 2026-27 के शैक्षणिक सत्र में लागू किया जाना है।
उद्देश्य एवं लक्ष्य
- शिक्षार्थियों में तार्किक सोच, समस्या-समाधान और पैटर्न पहचान की क्षमता विकसित करना।
- रोजमर्रा की जिंदगी में एआई की भूमिका और अनुप्रयोग की समझ को बढ़ाना।
पाठ्यचर्या संबंधी चिंताएँ
हालांकि पाठ्यक्रम का उद्देश्य बच्चों में AI के उपयोग से संबंधित सुरक्षा, गोपनीयता और आलोचनात्मक सोच संबंधी चिंताओं को दूर करना है, लेकिन इसकी व्यावहारिक प्रभावशीलता को लेकर सवाल अभी भी बने हुए हैं।
पाठ्यक्रम संरचना
- कक्षा III से V: कम्प्यूटेशनल थिंकिंग का परिचय।
- कक्षा VI से VIII तक:
- एडवांस्ड सीटी और AI का मूलभूत ज्ञान।
- कृत्रिम बुद्धिमत्ता की नैतिकता पर जोर।
सीखने के परिणाम और चुनौतियाँ
- कक्षा VI: मशीन और मानव बुद्धिमत्ता के बीच अंतर पहचानें, स्वचालन बनाम कृत्रिम बुद्धिमत्ता को समझें, और पर्यवेक्षित और गैर-पर्यवेक्षित शिक्षण जैसी कृत्रिम बुद्धिमत्ता पद्धतियों में अंतर करें।
- कक्षा VII: प्रतिगमन, वर्गीकरण और क्लस्टरिंग जैसी पूर्वानुमान तकनीकों में अंतर स्पष्ट कीजिए।
- कक्षा VIII: वास्तविक दुनिया की समस्याओं को हल करने के लिए नो-कोड टूल्स का उपयोग करें और एआई पूर्वाग्रह को समझें।
इस बात को लेकर संदेह है कि क्या बच्चे AI की इतनी जटिल अवधारणाओं और कार्य-प्रणालियों को प्रभावी ढंग से समझ पाएंगे।
एकीकरण और शैक्षिक चुनौतियाँ
पाठ्यक्रम में गणित जैसे मौजूदा विषयों के साथ कनेक्टेड टेक्नोलॉजी (CT) को एकीकृत करने का प्रयास किया गया है, लेकिन विज्ञान और सामाजिक अध्ययन के साथ इसका सफल एकीकरण वैश्विक स्तर पर अभी भी समीक्षाधीन है।
- सिंबॉलिक नेटवर्क-आधारित और न्यूरल नेटवर्क-आधारित लर्निंग की अलग-अलग प्रकृति को देखते हुए, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की नींव होने के दावों पर विवाद है।
- प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालय स्तर पर AI पढ़ाने पर अपर्याप्त शोध मौजूद है।
कार्यान्वयन में चुनौतियाँ
- डिजिटल विभाजन और AI तथा डिजिटल उपकरणों में शिक्षकों की तैयारी की कमी महत्वपूर्ण चुनौतियां पेश करती हैं।
- माध्यमिक विद्यालय के छात्रों द्वारा AI के उपयोग से संबंधित मूल मुद्दों का समाधान किए बिना सूचनाओं के अत्यधिक प्रवाह की संभावना बढ़ जाती है।