कम्प्यूटेशनल थिंकिंग व्यवस्थित समस्या-समाधान का एक तरीका है। इसमें जटिल समस्याओं को छोटे-छोटे तर्कसंगत हिस्सों में बाँटा जाता है, ताकि उन्हें इंसान या मशीन आसानी से समझकर हल कर सके।
- इसमें शामिल हैं:
- विभाजन या डिकम्पोजिशन (बड़ी समस्या को छोटे हिस्सों में तोड़ना),
- पैटर्न की पहचान करना,
- सार निकालना (जरूरी जानकारी पर ध्यान देना और अनावश्यक को हटाना),
- एल्गोरिदम आधारित सोच (चरणबद्ध तरीके से समाधान तैयार करना)।
नए पाठ्यक्रम के बारे में
- कार्यान्वयन: कक्षा 3 से 8वीं तक।
- यह राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के उद्देश्यों और राष्ट्रीय स्कूली शिक्षा पाठ्यचर्या रूपरेखा (NCF-SE) 2023 के अनुरूप है। इसका उद्देश्य AI जैसे उभरते क्षेत्रों को स्कूली शिक्षा में एकीकृत करके भारत को विश्व में अग्रणी बनाना है।
- लक्ष्य: ऐसे शिक्षार्थियों को तैयार करना जो AI के उपयोग के लिए तैयार हों। इसके लिए तर्कसंगत सोच, डिजिटल साक्षरता और तकनीक के जिम्मेदार उपयोग की मजबूत नींव विकसित की जाती है; साथ ही नवाचार, आलोचनात्मक सोच और नैतिक निर्णयन की क्षमता को बढ़ावा दिया जाता है।
- शिक्षा में कम्प्यूटेशनल थिंकिंग (CT) और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का महत्व: यह बहु-विषयक (interdisciplinary) शिक्षा को बढ़ावा देता है, AI आधारित समाधान विकसित करने के लिए सोच का एक मजबूत ढांचा तैयार करता है, और शुरुआती स्तर पर सीखने के द्वारा बच्चों के संज्ञानात्मक (कॉग्निटिव) विकास को प्रोत्साहित करता है।
- अंतर्राष्ट्रीय सर्वोत्तम कार्य-पद्धतियां: फिनलैंड, सिंगापुर और दक्षिण कोरिया जैसे मजबूत आधारभूत साक्षरता वाले देशों ने स्कूलों में AI की शुरुआत की है।
शिक्षा में कम्प्यूटेशनल थिंकिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस शुरू करने की चुनौतियां
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