सरकार जल्द ही पुडुचेरी विधान सभा के लिए नेशनल ई-विधान एप्लीकेशन (NeVA) शुरू करेगी।
- नागालैंड पहला राज्य था जिसने NeVA को सफलतापूर्वक लागू किया।
NeVA के बारे में:
- कार्यान्वयन मंत्रालय: संसदीय कार्य मंत्रालय
- उद्देश्य: देश के सभी 37 राज्यों/ केंद्रशासित प्रदेशों की विधान सभाओं की कार्यप्रणाली को एकीकृत डिजिटल प्लेटफार्म के माध्यम से सुव्यवस्थित और पेपरलेस बनाना और ‘वन नेशन-वन एप्लिकेशन’ की परिकल्पना को साकार करना।
- तकनीकी आधार: NIC क्लाउड ‘मेघराज’ पर होस्ट किया गया है। यह सदन के अध्यक्ष को सदन की कार्यवाही सहजता से डिजिटल रूप में संचालित करने में सक्षम बनाता है।
- वित्तपोषण: यह एक केंद्र प्रायोजित योजना है। इसमें सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को समान रूप से वित्तीय सहायता मिलती है।
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1 sourceकेंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री ने वक्फ संपत्तियों के रीयल-टाइम अपलोडिंग, सत्यापन और निगरानी के लिए 'उम्मीद' केंद्रीय पोर्टल लॉन्च किया।
- वक्फ का आशय ऐसी किसी भी चल या अचल संपत्ति से है, जिसका उपयोग मुस्लिम क़ानून के अनुसार धार्मिक, परोपकारी या नेक कार्यों के लिए किया जाता है।
उम्मीद (UMEED) पोर्टल के बारे में:
- कानून: यह एकीकृत वक्फ प्रबंधन, सशक्तिकरण, दक्षता और विकास अधिनियम, 1995 (Unified Waqf Management, Empowerment, Efficiency and Development – UMEED Act, 1995) के अंतर्गत स्थापित किया गया है।
- प्रमुख विशेषताएं: सभी वक्फ संपत्तियों की जियो-टैगिंग के साथ एक डिजिटल इन्वेंट्री का निर्माण, ऑनलाइन शिकायत निवारण, GIS मैपिंग जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं।
- महत्व: यह पोर्टल पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ाता है। साथ ही यह वक्फ संपत्तियों के बेहतर उपयोग को प्रोत्साहित करता है; जैसे कि स्वास्थ्य-देखभाल सेवाओं, आजीविका सृजन और सामाजिक कल्याण में भागीदारी।
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1 sourceहाल ही में ब्रासीलिया (ब्राजील) में 11वां ब्रिक्स संसदीय फोरम आयोजित किया गया।
- भारत को अगले साल 12वें ब्रिक्स संसदीय फोरम की मेजबानी का जिम्मा सौंपा गया।
ब्रिक्स संसदीय फोरम के बारे में:
- उद्देश्य: ब्रिक्स सदस्य देशों की संसदों के बीच विधायी सहयोग के लिए एक मंच के रूप में कार्य करना।
- पहला ब्रिक्स संसदीय फोरम 2015 में रूस की अध्यक्षता में मास्को में आयोजित किया गया था।
ब्रिक्स के बारे में:
- स्थापना: ब्रिटिश अर्थशास्त्री जिम ओ' नील ने 2001 ने सबसे पहले 'ब्रिक्स' (BRICs) शब्दावली का उपयोग किया था। उन्होंने ब्राजील, रूस, भारत और चीन जैसी उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं को इसमें शामिल किया था।
- ब्रिक्स का गठन 2009 में ब्राजील, रूस, भारत और चीन द्वारा किया गया था। 2010 में दक्षिण अफ्रीका इस समूह का सदस्य बना।
- वर्तमान सदस्य: ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात।
कनाडा के प्रधानमंत्री ने भारत के प्रधानमंत्री को आगामी G-7 शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया है। यह सम्मेलन कनाडा के कनानसकीस में आयोजित होगा।
G-7 के बारे में:
- स्थापना: G-7 की स्थापना 1975 के तेल संकट को देखते हुए इससे निपटने के लिए की गई थी।
- अनौपचारिक समूह: यह सात देशों का एक अनौपचारिक समूह है। इसके सदस्य हैं; संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान और यूनाइटेड किंगडम।
- 1998 में रूस के शामिल होने से यह G-8 बन गया था। हालांकि 2014 में क्रीमिया पर कब्ज़े के बाद रूस को निलंबित कर दिया गया और यह समूह फिर से G-7 बन गया।
- यूरोपीय संघ भी इसके शिखर सम्मेलनों में भाग लेता है।
- उद्देश्य: विदेश नीति, सुरक्षा, अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक नीति आदि पर चर्चा करना।
- G-7 देशों की सामूहिक रूप से वैश्विक GDP में 40% की हिस्सेदारी है, जबकि दुनिया की केवल 10% जनसंख्या इन देशों में निवास करती है।
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1 sourceप्रधान मंत्री ने चिनाब नदी पर बने दुनिया के सबसे ऊंचे रेलवे आर्च ब्रिज का उद्घाटन किया। साथ ही उन्होंने अंजी नदी पर भारत के पहले केबल-स्टेन्ड रेल पुल "अंजी ब्रिज" का उद्घाटन भी किया।
- अंजी, चिनाब की एक सहायक नदी है।
- चिनाब या चंद्रभागा सिंधु की सबसे बड़ी सहायक नदी है। यह नदी चंद्र और भागा नामक दो जल-धाराओं से मिलकर बनी है। ये दोनों जल धाराएं हिमाचल प्रदेश के केलांग के पास टांडी में मिलती हैं।
चिनाब रेल ब्रिज के बारे में
- ऊंचाई और लंबाई: चिनाब नदी के जलस्तर से 359 मीटर ऊपर और 1,315 मीटर लंबा।
- मुख्य विशेषताएं: इस स्टील आर्क ब्रिज को भूकंप और पवन की प्रबल गति को सहने में सक्षम बनाया गया है।
- यह जम्मू और श्रीनगर के बीच कनेक्टिविटी बढ़ाएगा।
- अंजी और चिनाब, दोनों पुल उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल लिंक (USBRL) परियोजना का हिस्सा हैं।
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1 sourceयूनेस्को और MeitY ने भारत में AI रेडीनेस असेसमेंट मेथोडोलॉजी (RAM) पर 5वीं हितधारक परामर्श बैठक आयोजित की।
AI RAM पहल के बारे में:
- यह एक व्यापक फ्रेमवर्क है, जिसे यूनेस्को और इंडियाAI मिशन (MeitY) ने विकसित किया है। इसका उद्देश्य देश के AI इकोसिस्टम की तत्परता का आकलन करना है।
- AI RAM एक नैदानिक उपकरण की भांति कार्य करता है। यह सरकारों की AI से जुड़ी नियामक और संस्थागत क्षमताओं को मजबूत करने में मदद करता है।
- इसका उद्देश्य एक भारत-विशिष्ट AI नीति रिपोर्ट तैयार करना है, जो सभी क्षेत्रकों में AI के नैतिक और जिम्मेदार अंगीकरण हेतु कार्रवाई योग्य सिफारिशें पेश करना है।
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1 sourceकेरल राज्य सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रयोगशाला ने घातक अमीबा की पहचान के लिए आणविक (मॉलिक्यूलर) परीक्षण विकसित किए हैं।
अमीबा के बारे में
- अमीबा एकल कोशिकीय यूकैरियोटिक जीव है। यह प्रोटोजोआ नामक जीवों के समूह से संबंधित है।
- पर्यावास: अमीबा ताज़े जल, समुद्री जल, मिट्टी, और मानव-निर्मित जल प्रणालियों में पाया जाता है।
- संरचना और गति: इसका आकार अनियमित होता है। यह गति करने और आहार ग्रहण करने के लिए स्यूडोपोडिया का उपयोग करता है। स्यूडोपोडिया इसके साइटोप्लाज्म का अस्थायी विस्तार हैं।
- पोषण: अमीबा एक परपोषी जीव है। यह आहार के लिए बैक्टीरिया, शैवाल, पादप कोशिकाओं और सूक्ष्म प्रोटोजोआ पर निर्भर हैं।
- प्रजनन: अमीबा अलैंगिक रूप से बाइनरी फिशन नामक प्रक्रिया से प्रजनन करता है।
- प्रजनन में पहले नाभिक का माइटोसिस द्वारा विभाजन होता है। इसके बाद साइटोप्लाज्म (साइटोकाइनेसिस) का विभाजन होता है।
- इससे दो समान अमीबा कोशिकाएं बनती हैं।
हाल ही में, एक रिपोर्ट ने 2030 तक वैश्विक महासागरों के 30% की सुरक्षा के 30x30 लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सालाना 15.8 बिलियन डॉलर निवेश करने की आवश्यकता का उल्लेख किया है। यह निवेश राशि वार्षिक वैश्विक रक्षा बजट के लगभग 0.5% के बराबर है।
30x30 लक्ष्य के बारे में
- यह लक्ष्य कुनमिंग-मॉन्ट्रियल ग्लोबल बायोडायवर्सिटी फ्रेमवर्क (KMGBF) का हिस्सा है। इस फ्रेमवर्क में 2050 तक के लिए 4 प्रमुख लक्ष्य और 2030 तक के लिए 23 कार्रवाई-उन्मुख वैश्विक लक्ष्य शामिल हैं।
- KMGBF को जैविक विविधता अभिसमय (CBD) के कॉन्फ्रेंस ऑफ पार्टीज (COP 15) के दौरान अपनाया गया था।
- लक्ष्य 3 का उद्देश्य 2030 तक भूमि, जल और समुद्र के 30% हिस्से का संरक्षण करना है।
तमिलनाडु के मेलूर में उत्तर पांड्य काल के 800 साल प्राचीन शिव मंदिर और दो शिलालेख मिले है।
शिलालेखों के बारे में
- समय काल: 1217-1218 ई. के ये शिलालेख मारवर्मन सुंदर पांड्य प्रथम के शासनकाल के हैं।
- मारवर्मन सुंदर पांड्य प्रथम 1216 ई. में सिंहासन पर आसीन हुए। इसने चोल साम्राज्य पर भी आक्रमण किया।
- मारवर्मन ने कलियुगरमण और आदिसयापंडियादेवन और सोनादुगोंडन (चोल देश के विजेता) की उपाधियां धारण की।
- मुख्य निष्कर्ष
- शिलालेख में एक जल स्रोत "नागनकुडी" की बिक्री का विवरण है, जिसे 64 कासु (मुद्राएं) में बेचा गया था।
- इससे मंदिर का नाम "तेन्नावनीश्वरम" होने का पता चलता है।
- "तेन्नवन" पांड्य शासकों द्वारा प्रयुक्त एक उपाधि थी।
- इस शिलालेख में उडमपट्टी नामक स्थान का प्राचीन नाम "अत्तूर" मिलता है।