अंतर्राष्ट्रीय डेटा गोपनीयता दिवस प्रतिवर्ष 28 जनवरी को 'कन्वेंशन 108' पर हस्ताक्षर की स्मृति में मनाया जाता है। इसका उद्देश्य डिजिटल युग में व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा के महत्त्व के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।
- कन्वेंशन 108: इसे 1981 में यूरोप की परिषद ने अपनाया था। यह डेटा सुरक्षा पर विश्व की प्रथम कानूनी रूप से बाध्यकारी अंतर्राष्ट्रीय संधि है। इसका मुख्य लक्ष्य व्यक्तियों के निजी डेटा को दुरुपयोग से बचाना है।
भारत में डेटा गोपनीयता की अनिवार्यता
- भारत विश्व की तीसरी सबसे बड़ी डिजिटल अर्थव्यवस्था है।
- भारत का बढ़ता डिजिटल फुटप्रिंट:
- आधार कार्ड: लगभग 143 करोड़;
- डिजिलॉकर साइन-अप्स: लगभग 14 करोड़;
- UPI लेन-देन: लगभग 28 लाख करोड़ रुपये;
- ब्रॉडबैंड ग्राहक: लगभग 101 करोड़;
- बजट आवंटन: साइबर सुरक्षा के लिए ₹782 करोड़ (2025-26) आदि।
भारत के विकसित होते डिजिटल तंत्र में विश्वास को मजबूत करना
- सूचना प्रौद्योगिकी (IT) अधिनियम, 2000: यह ई-गवर्नेंस, साइबर सुरक्षा और CERT-In के माध्यम से साइबर घटना के खिलाफ प्रतिक्रिया के लिए कानूनी आधार प्रदान करता है।
- सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021: यह मध्यवर्तियों (Intermediaries) के लिए उचित तत्परता की आवश्यकताओं और प्लेटफार्म की जवाबदेही सुनिश्चित करने हेतु शिकायत निवारण के नियम निर्धारित करता है।
- डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण (DPDP) अधिनियम, 2023:
- यह डिजिटल माध्यमों से एकत्र किए गए व्यक्तिगत डेटा के प्रसंस्करण (processing) को नियंत्रित करता है। इसमें ऑफलाइन स्रोतों से डिजिटाइज़ किया गया डेटा भी शामिल है। इसका उद्देश्य भारतीय डेटा संरक्षण बोर्ड की स्थापना करना है।
- यह अधिनियम SARAL दृष्टिकोण का पालन करता है: Simple (सरल), Accessible (सुलभ), Rational (तर्कसंगत), और Actionable (कार्रवाई योग्य)। इसका उद्देश्य सभी हितधारकों के लिए स्पष्टता, समझने में आसानी और व्यावहारिक अनुपालन सुनिश्चित करना है।
नोट: डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण नियम, 2025, DPDP अधिनियम 2023 को क्रियान्वित करते हैं।

चूंकि, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (DPI) देश भर में शासन, सेवा वितरण और दैनिक जीवन को तेजी से आकार दे रही है, ऐसे में व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा करना केवल एक तकनीकी आवश्यकता नहीं बल्कि एक लोकतांत्रिक अनिवार्यता भी है।