उच्चतम न्यायालय ने राज्य सरकारों की 'मुफ्त सुविधा संस्कृति' (Freebies Culture) पर कठोर आपत्ति प्रकट की | Current Affairs | Vision IAS

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In Summary

  • तमिलनाडु पावर डिस्ट्रीब्यूशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड बनाम भारत संघ के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मुफ्त सुविधाएं बिना किसी भेदभाव के दीर्घकालिक आर्थिक विकास में बाधा डालती हैं।
  • चिंताओं में राजकोषीय बोझ, विकास में बाधा, स्थिरता को कमजोर करना (सीएजी ने मुफ्त बिजली और भूजल की कमी को लेकर चिंता जताई) और संस्थानों का कमजोर होना शामिल हैं।
  • आगे का रास्ता गैर-योग्यता आधारित मुफ्त योजनाओं (सुब्रमण्यम बालाजी मामला) के बजाय रोजगार के अवसर प्रदान करने और चुनाव आयोग द्वारा वादों के लिए वित्तपोषण के औचित्य की मांग करने का सुझाव देता है।

In Summary

‘तमिलनाडु पावर डिस्ट्रीब्यूशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड बनाम भारत संघ’ मामले में न्यायालय ने कहा कि लाभार्थियों के बीच बिना किसी अंतर के बांटे जाने वाली मुफ्त सुविधाएं दीर्घकालिक आर्थिक विकास में बाधा उत्पन्न करेंगी। 

मुफ्त सुविधाओं के बारे में

  • RBI ने मुफ्त सुविधाओं को "एक लोक कल्याणकारी उपाय, जो नि:शुल्क प्रदान किया जाता है" के रूप में परिभाषित किया है।
  • RBI के अनुसार, मुफ्त सुविधाओं को शिक्षा जैसी 'सार्वजनिक वस्तु' या 'मेरिट गुड्स' से अलग किया जा सकता है, जिनके व्यापक और दीर्घकालिक लाभ होते हैं।

मुफ्त सुविधाओं से जुड़ी चिंताएं

  • राजकोषीय बोझ: आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार, राज्यों का संयुक्त सकल राजकोषीय घाटा वित्त वर्ष 2022 में सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के 2.6% से बढ़कर वित्त वर्ष 2025 में 3.2% हो गया।
  • विकास में बाधा: आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार, धन को अवसंरचना और रोजगार सृजन में निवेश करने की बजाय अल्पकालिक लाभ के लिए व्यय किया जाता है।
  • संधारणीयता को खतरा: उदाहरण के लिए, कैग (CAG) की रिपोर्ट ने पंजाब में नि:शुल्क विद्युत को भूजल स्तर में गिरावट से जोड़ा है।
  • संस्थाओं को कमजोर करना: उदाहरण के लिए- ऋण माफी और नि:शुल्क विद्युत बैंकों एवं विद्युत वितरण कंपनियों (DISCOMs) की आर्थिक स्थिति को कमजोर करते हैं।

आगे की राह

  • सुब्रमण्यम बालाजी बनाम तमिलनाडु (2013): राज्यों को गैर-मेरिट मुफ्त सुविधाएं देने की बजाय रोजगार के अवसर (कल्याण) उपलब्ध कराने पर कार्य करना चाहिए।
    • न्यायालय ने यह भी कहा कि मुफ्त सुविधाओं को रिश्वत या भ्रष्टाचार नहीं माना जा सकता और अदालतें सरकार को यह नहीं बता सकतीं कि सार्वजनिक धन कैसे खर्च किया जाए।
  • भारत निर्वाचन आयोग (ECI): 2014 और 2022 के आदेशों के माध्यम से आयोग ने राजनीतिक दलों से उनके वादों के पीछे के तर्क और वित्त-पोषण तंत्र को समझाने की आवश्यकता जताई थी।
  • आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26: निरंतर बढ़ते अनिश्चितकालीन अंतरणों की बजाय आय और उत्पादकता में अधिक स्थायी लाभ प्रदान करने पर जोर दिया जाना चाहिए। 
    • सफल उदाहरण: मेक्सिको के 'प्रोग्रेसा' या ब्राजील के 'बोल्सा फैमिलिया' की तरह नकद अंतरण को स्कूल में उपस्थिति और स्वास्थ्य जांच से जोड़ा जाना चाहिए।
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प्रोग्रेसा (Progresa) / बोल्सा फैमिलिया (Bolsa Família)

ये क्रमशः मेक्सिको और ब्राजील की सामाजिक कल्याण योजनाएं हैं, जो नकद अंतरण (cash transfers) को स्कूल में उपस्थिति और स्वास्थ्य जांच जैसी शर्तों से जोड़ती हैं। इन्हें सफल उदाहरणों के रूप में प्रस्तुत किया गया है।

भारत निर्वाचन आयोग (ECI - Election Commission of India)

यह एक स्वायत्त संवैधानिक निकाय है जो भारत में संघ और राज्य विधायिकाओं के लिए चुनावों का संचालन करता है। इसने राजनीतिक दलों से उनके चुनावी वादों के वित्त-पोषण तंत्र को स्पष्ट करने की आवश्यकता पर जोर दिया है।

DISCOMs (Electricity Distribution Companies)

ये वे कंपनियाँ हैं जो बिजली उत्पादन गृहों से बिजली खरीदकर अंतिम उपभोक्ताओं तक पहुँचाती हैं। ऋण माफी और मुफ्त बिजली जैसी नीतियां इनकी वित्तीय स्थिति को प्रभावित कर सकती हैं।

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