‘तमिलनाडु पावर डिस्ट्रीब्यूशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड बनाम भारत संघ’ मामले में न्यायालय ने कहा कि लाभार्थियों के बीच बिना किसी अंतर के बांटे जाने वाली मुफ्त सुविधाएं दीर्घकालिक आर्थिक विकास में बाधा उत्पन्न करेंगी।
मुफ्त सुविधाओं के बारे में
- RBI ने मुफ्त सुविधाओं को "एक लोक कल्याणकारी उपाय, जो नि:शुल्क प्रदान किया जाता है" के रूप में परिभाषित किया है।
- RBI के अनुसार, मुफ्त सुविधाओं को शिक्षा जैसी 'सार्वजनिक वस्तु' या 'मेरिट गुड्स' से अलग किया जा सकता है, जिनके व्यापक और दीर्घकालिक लाभ होते हैं।
मुफ्त सुविधाओं से जुड़ी चिंताएं
- राजकोषीय बोझ: आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार, राज्यों का संयुक्त सकल राजकोषीय घाटा वित्त वर्ष 2022 में सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के 2.6% से बढ़कर वित्त वर्ष 2025 में 3.2% हो गया।
- विकास में बाधा: आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार, धन को अवसंरचना और रोजगार सृजन में निवेश करने की बजाय अल्पकालिक लाभ के लिए व्यय किया जाता है।
- संधारणीयता को खतरा: उदाहरण के लिए, कैग (CAG) की रिपोर्ट ने पंजाब में नि:शुल्क विद्युत को भूजल स्तर में गिरावट से जोड़ा है।
- संस्थाओं को कमजोर करना: उदाहरण के लिए- ऋण माफी और नि:शुल्क विद्युत बैंकों एवं विद्युत वितरण कंपनियों (DISCOMs) की आर्थिक स्थिति को कमजोर करते हैं।
आगे की राह
- सुब्रमण्यम बालाजी बनाम तमिलनाडु (2013): राज्यों को गैर-मेरिट मुफ्त सुविधाएं देने की बजाय रोजगार के अवसर (कल्याण) उपलब्ध कराने पर कार्य करना चाहिए।
- न्यायालय ने यह भी कहा कि मुफ्त सुविधाओं को रिश्वत या भ्रष्टाचार नहीं माना जा सकता और अदालतें सरकार को यह नहीं बता सकतीं कि सार्वजनिक धन कैसे खर्च किया जाए।
- भारत निर्वाचन आयोग (ECI): 2014 और 2022 के आदेशों के माध्यम से आयोग ने राजनीतिक दलों से उनके वादों के पीछे के तर्क और वित्त-पोषण तंत्र को समझाने की आवश्यकता जताई थी।
- आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26: निरंतर बढ़ते अनिश्चितकालीन अंतरणों की बजाय आय और उत्पादकता में अधिक स्थायी लाभ प्रदान करने पर जोर दिया जाना चाहिए।
- सफल उदाहरण: मेक्सिको के 'प्रोग्रेसा' या ब्राजील के 'बोल्सा फैमिलिया' की तरह नकद अंतरण को स्कूल में उपस्थिति और स्वास्थ्य जांच से जोड़ा जाना चाहिए।