दूषित स्थल प्रबंधन के लिए नए नियम अधिसूचित किए गए | Current Affairs | Vision IAS
मेनू
होम

यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के लिए प्रासंगिक राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय विकास पर समय-समय पर तैयार किए गए लेख और अपडेट।

त्वरित लिंक

High-quality MCQs and Mains Answer Writing to sharpen skills and reinforce learning every day.

महत्वपूर्ण यूपीएससी विषयों पर डीप डाइव, मास्टर क्लासेस आदि जैसी पहलों के तहत व्याख्यात्मक और विषयगत अवधारणा-निर्माण वीडियो देखें।

करंट अफेयर्स कार्यक्रम

यूपीएससी की तैयारी के लिए हमारे सभी प्रमुख, आधार और उन्नत पाठ्यक्रमों का एक व्यापक अवलोकन।

ESC

पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के तहत शक्तियों का प्रयोग करते हुए पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने पर्यावरण संरक्षण (दूषित स्थलों का प्रबंधन) नियम, 2025 अधिसूचित किए हैं।  

  • ये नियम यह सुनिश्चित करेंगे कि दूषित स्थलों की सफाई (उपचार) जिम्मेदार व्यक्तियों द्वारा की जाए।
  • दूषित स्थल ऐसे क्षेत्र हैं, जहां पहले खतरनाक अपशिष्ट का निपटान किया जा चुका है, जिससे मिट्टी और पानी प्रदूषित हो रहे हैं। साथ ही, स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए खतरा पैदा हो रहा है।

मुख्य नियमों पर एक नजर 

  • कवर किए गए प्रदूषक: खतरनाक और अन्य अपशिष्ट (प्रबंधन एवं सीमा-पार संचलन) नियम, 2016 के अनुसार 189 खतरनाक पदार्थ।
  • कवर नहीं किए गए प्रदूषक: रेडियोधर्मी अपशिष्ट, खनन, समुद्र में तेल रिसाव तथा ठोस अपशिष्ट डंपों से होने वाला संदूषण। ये सभी अलग-अलग कानूनों द्वारा शासित हैं।
  • प्रतिक्रिया स्तर: कृषि, आवासीय, वाणिज्यिक और औद्योगिक क्षेत्रों के लिए अलग-अलग प्रतिक्रिया स्तर निर्धारित किए गए हैं।
  • दूषित स्थल प्रबंधन
    • स्थल की पहचान: स्थानीय निकायों/ जिला प्रशासन द्वारा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों (SPCBs) को वर्ष में दो बार संदिग्ध स्थलों की सूचना देनी होगी। 
    • स्थल का मूल्यांकन: SPCBs संदिग्ध स्थलों का निरीक्षण करेंगे और संभावित दूषित स्थलों की सूची बनाएंगे तथा केंद्रीयकृत ऑनलाइन पोर्टल पर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) को सूचना देंगे।
    • प्रदूषक की पहचान: SPCBs प्रदूषक की पहचान करेंगे। यदि जमीन बेची जाती है, तो नया भू-स्वामी जिम्मेदार होगा। 
    • सफाई की योजना: प्रदूषणकर्ता को एक अनुमोदित एजेंसी की सहायता से सफाई योजना लागू करनी होगी तथा इसके लिए भुगतान करना होगा।
      • हालांकि, यदि प्रदूषणकर्ता की पहचान नहीं हो पाती है, तो संबंधित SPCB सफाई की योजना को लागू करेगा।
  • मूल्यांकन और सुधार के लिए वित्त-पोषण: प्रारंभिक आकलन लागत को लोक दायित्व बीमा अधिनियम, 1991 के तहत पर्यावरण राहत कोष से केंद्र सरकार और राज्य सरकार द्वारा भी वहन किया जा सकता है। 
    • यदि प्रदूषणकर्ता की पहचान हो जाती है, तो ये लागतें 3 महीने के भीतर चुकानी होंगी।
  • दंड: विशेषकर यदि स्वास्थ्य को खतरा हो तो, राज्य बोर्ड सफाई न करने पर जुर्माना लगा सकता है।
  • ये नियम, पुराने दूषित स्थलों के सुधार के संबंध में अनुपस्थित कानून की समस्या का समाधान करते हैं। साथ ही, ये स्वैच्छिक सुधार के लिए प्रावधान भी करते हैं। 
Watch Video News Today
Title is required. Maximum 500 characters.

Search Notes

Filter Notes

Loading your notes...
Searching your notes...
Loading more notes...
You've reached the end of your notes

No notes yet

Create your first note to get started.

No notes found

Try adjusting your search criteria or clear the search.

Saving...
Saved

Please select a subject.

Referenced Articles

linked

No references added yet