यह बदलाव वन (संरक्षण एवं संवर्धन) अधिनियम, 1980 (पूर्व में वन संरक्षण अधिनियम) के समेकित दिशा-निर्देशों में संशोधन करके लागू किया गया है।
प्रमुख संशोधन
- यह सरकारी या गैर-सरकारी संस्थाओं द्वारा किए जाने वाले 'सहायता प्राप्त प्राकृतिक पुनरुत्पादन', जिसमें वनीकरण और वृक्षारोपण शामिल है, को "वानिकी गतिविधियों" के रूप में मानने की अनुमति देता है।
- इसके परिणामस्वरूप, ऐसी गतिविधियों पर प्रतिपूरक वनीकरण की अनिवार्यता और निवल वर्तमान मूल्य (NPV) का भुगतान लागू नहीं होंगे।
- प्रतिपूरक वनीकरण (Compensatory Afforestation: CA): इसका अर्थ है गैर-वन उद्देश्यों के लिए वन भूमि के उपयोग के बदले में किया गया वनीकरण।
- यह वन भूमि के नुकसान की भरपाई के लिए 'भूमि के बदले भूमि' तथा 'वृक्षों के बदले वृक्ष' के नियम को अनिवार्य बनाता है और गैर-वन भूमि पर संपन्न किया जाता है।
- निवल वर्तमान मूल्य (NPV): यह एक अनिवार्य शुल्क है, जिसका उद्देश्य कार्बन प्रच्छादन (carbon sequestration), जल पुनर्भरण और जैव विविधता जैसी पारिस्थितिकी-तंत्र सेवाओं के नुकसान की भरपाई करना है।
- प्रतिपूरक वनीकरण और NPV के माध्यम से एकत्र की गई धनराशि को राज्य प्रतिपूरक वनीकरण कोष प्रबंधन और योजना प्राधिकरण (CAMPA) में जमा किया जाता है। CAMPA को प्रतिपूरक वनीकरण कोष (CAF) अधिनियम, 2016 के तहत स्थापित किया गया है।
- प्रतिपूरक वनीकरण (Compensatory Afforestation: CA): इसका अर्थ है गैर-वन उद्देश्यों के लिए वन भूमि के उपयोग के बदले में किया गया वनीकरण।
- राज्य सरकार ऐसे वृक्षारोपण के उपयोग और राजस्व साझा करने के लिए एक रूपरेखा तैयार कर सकती है।
वन (संरक्षण एवं संवर्धन) अधिनियम, 1980वन (संरक्षण) संशोधन अधिनियम, 2023 ने 'वन (संरक्षण) अधिनियम, 1980' का नाम बदल दिया है। अन्य प्रमुख संशोधनों में निम्नलिखित शामिल हैं:
|