इस अवसर पर प्रधान मंत्री ने सुजुकी के भारत में निर्मित पहले वैश्विक रणनीतिक बैटरी इलेक्ट्रिक वाहन (BEV) “e-VITARA” को हरी झंडी दिखाई। इसे 100 से अधिक देशों में निर्यात किया जाएगा।
- इसके अलावा, प्रधान मंत्री ने गुजरात में TDS लिथियम-आयन बैटरी प्लांट में हाइब्रिड बैटरी इलेक्ट्रोड्स के स्थानीय उत्पादन का भी उद्घाटन किया।
- इससे यह सुनिश्चित होगा कि 80% से ज्यादा बैटरियों का निर्माण अब भारत में ही होगा।
बैटरी इलेक्ट्रिक वाहनों (BEVs) के बारे में:
- ये पूरी तरह से बैटरी-संचालित इलेक्ट्रिक ड्राइवट्रेन पर चलते हैं। इन्हें बिजली के ग्रिड में प्लग करके चार्ज किया जा सकता है।
- मुख्य घटक: इलेक्ट्रिक मोटर, इन्वर्टर, बैटरी, कंट्रोल मॉड्यूल, ड्राइव ट्रेन आदि।
- कार्य सिद्धांत: इलेक्ट्रिक मोटर के लिए बिजली को DC (डायरेक्ट करंट यानी दिष्ट धारा) बैटरी से AC (अल्टरनेटिंग करंट यानी प्रत्यावर्ती धारा) में बदला जाता है।
चुनौतियां:
- परिचालन संबंधी समस्याएं: सीमित ड्राइविंग रेंज और अपर्याप्त चार्जिंग अवसंरचना।
- EV की शुरुआती लागत ज्यादा होना: उदाहरण के लिए- EV में बैटरियों की लागत वाहन की कुल पूंजी लागत का लगभग 40% होती है।
- पर्याप्त जागरूकता की कमी: EV प्रदर्शन को लेकर सार्वजनिक और निजी हितधारकों के बीच जानकारी का अभाव।
- पर्यावरण संबंधी चिंताएं: बैटरी अपशिष्ट, उसके फिर से उपयोग या पुनर्चक्रण प्रक्रियाओं आदि से जुड़ी चिंताएं।
- मौजूदा बिजली ग्रिड पर दबाव: EV चार्जिंग की बढ़ती मांग से मौजूदा ग्रिड पर दबाव पड़ रहा है।
ज़रूरी क़दम:
- वित्त:
- बैटरी की लागत को वाहन की लागत से अलग करना (जैसे बैटरियों को लीज पर देना)।
- ई-ट्रकों और ई-बसों के लिए पूंजी लागत घटाने हेतु एक मिश्रित कोष बनाना तथा उसका संचालन करना।
- नई बैटरी प्रौद्योगिकियों पर अनुसंधान और विकास को बढ़ाना: इससे बैटरी की कीमत कम करने, ऊर्जा घनत्व बढ़ाने और आयातित दुर्लभ भू खनिजों पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।
- चार्जिंग अवसंरचना का रणनीतिक विस्तार: विभिन्न स्थानों पर इसकी व्यवहार्यता का उचित मूल्यांकन करने के बाद ही इसका विस्तार किया जाना चाहिए।
भारत में ग्रीन मोबिलिटी से जुड़ी पहलें
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