नीति आयोग ने आकांक्षी ब्लॉक्स के लिए वाटर बजटिंग पर एक रिपोर्ट जारी की।
वाटर बजटिंग के बारे में
- यह एक व्यापक दृष्टिकोण प्रदान करता है कि विभिन्न स्रोतों से कितना जल उपलब्ध है, इसका उपयोग कैसे किया जाता है, और कहां जल की कमी या जल की अधिकता हो सकती है।
- यह मांग व आपूर्ति के अंतर की पहचान करने में मदद करता है तथा जल सुरक्षा और एकीकृत जल संसाधन प्रबंधन (IWRM) का समर्थन करता है।
- यह अटल भूजल योजना के तहत प्रमुख गतिविधियों में से एक है।
Article Sources
1 sourceकेरल की अष्टमुडी झील में हंपबैक डॉल्फिन सहित वाइल्ड डॉल्फिन और पारंपरिक मछुआरों के बीच देखे गए व्यवहार संबंधी तंत्रों को समझने के लिए एक अध्ययन किया गया था।
हंपबैक डॉल्फिन के बारे में
- भौगोलिक वितरण: ऑस्ट्रेलिया, अफ्रीका और एशिया के अधिकांश समुद्र तटों के अपेक्षाकृत उथले तटीय जल में पाई जाती हैं।
- भारतीय समुद्र तट पर दो किस्में पाई जाती हैं:
- हिन्द महासागर हंपबैक डॉल्फिन (सूसा प्लम्बिया: IUCN स्थिति एंडेंजर्ड।
- हिन्द-प्रशांत हंपबैक डॉल्फिन (सूसा चीनेंसिस): IUCN: स्थिति वल्नरेबल।
भारत में नदी डॉल्फिन
- गंगा नदी डॉल्फिन: यह ताज़े पानी की प्रजाति है, जो गंगा-ब्रह्मपुत्र-मेघना और कर्णफुली-सांगु नदी प्रणालियों में पाई जाती है।
- IUCN स्थिति: एंडेंजर्ड।
- सिंधु नदी डॉल्फिन: पाकिस्तान में सिंधु नदी प्रणाली और पंजाब की ब्यास नदी में एक छोटी आबादी के रूप में पाई जाती है।
- IUCN स्थिति: एंडेंजर्ड।
Article Sources
1 sourceविशेषज्ञों का कहना है कि उत्तराखंड में हिमालयी काले भालू के हमलों का एक संभावित कारण जलवायु परिवर्तन हो सकता है।
हिमालयी काले भालू के बारे में
- इसे एशियाई काला भालू या मून बेयर भी कहा जाता है, क्योंकि इसकी छाती पर सफेद रंग का अर्धचंद्राकार निशान होता है।
- विशेषताएं:
- यह मुख्य रूप से निशाचर और एकांतवासी होता है, लेकिन कभी-कभी दिन के समय भी देखा जाता है।
- इसका जीवनकाल 15-25 वर्ष होता है और गर्भकाल 200 से 240 दिन का होता है।
- पर्यावास: चौड़ी पत्ती वाले सघन वनों और शंकुधारी (coniferous) जंगलों में पाया जाता है।
- वितरण: तिब्बत, भारत, चीन और भूटान के हिमालयी क्षेत्र में पाया जाता है।
- संरक्षण स्थिति:
- IUCN: वल्नरेबल।
- वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972: अनुसूची-I में सूचीबद्ध।
- खतरे: इसके पित्त (bile) के लिए इसका अवैध शिकार किया जाता है।
यह रिपोर्ट संयुक्त राष्ट्र आर्थिक और सामाजिक मामलों के विभाग (UN DESA) ने जारी की है।
रिपोर्ट के मुख्य बिंदुओं पर एक नजर
- वैश्विक आबादी (लगभग 8.2 अरब) का 45% हिस्सा शहरों में निवास करता है।
- मेगासिटीज़ की संख्या 1975 में आठ थी, जो चौगुनी होकर 2025 में 33 हो गई है।
- मेगासिटी वह शहर होता है, जिसकी आबादी दस मिलियन (यानी एक करोड़) से अधिक होती है।
- जकार्ता (इंडोनेशिया) अब विश्व का सबसे अधिक आबादी वाला शहर है। इसके बाद ढाका (बांग्लादेश), टोक्यो (जापान) और नई दिल्ली का स्थान है।
- भारत से संबंधित निष्कर्ष
- भारत में 44 प्रतिशत आबादी कस्बों में रहती है।
- छह अन्य देशों के साथ-साथ भारत में भी 2025 और 2050 के बीच 500 मिलियन (50 करोड़) से अधिक शहरी निवासी होंगे।
चिली की पूर्व राष्ट्रपति मिशेल बाचेले को इंदिरा गांधी शांति पुरस्कार 2024 से सम्मानित किया गया।
इंदिरा गांधी शांति पुरस्कार के बारे में
- शांति, निरस्त्रीकरण और विकास के लिए इंदिरा गांधी पुरस्कार प्रतिवर्ष प्रदान किया जाता है।
- इसे इंदिरा गांधी मेमोरियल ट्रस्ट द्वारा स्थापित किया गया है।
- यह पुरस्कार किसी भी व्यक्ति या संगठन को राष्ट्रीयता, नस्ल या धर्म के भेद के बिना निम्नलिखित दिशा में किए गए रचनात्मक प्रयासों की मान्यता में दिया जाता है:
- नस्लीय समानता को बढ़ावा देना,
- राष्ट्रों के बीच सद्भावना और सामंजस्य को बढ़ावा देना, आदि।
नागालैंड के मुख्यमंत्री ने केंद्रीय गृह मंत्री से संरक्षित क्षेत्र परमिट (PAP) व्यवस्था को फिर से लागू करने की आवश्यकता की तत्काल समीक्षा करने का आग्रह किया।
संरक्षित क्षेत्र परमिट (PAP) के बारे में
- परिभाषा: PAP एक विशेष परमिट है। विदेशी नागरिकों को भारत के कुछ संवेदनशील क्षेत्रों में जाने के लिए इसकी आवश्यकता होती है।
- कानूनी ढांचा: विदेशी विषयक (संरक्षित क्षेत्र) आदेश, 1958 के तहत।
- कवर किए गए क्षेत्र: वे सभी क्षेत्र, जो राज्य की 'इनर लाइन' और अंतर्राष्ट्रीय सीमा के बीच आते हैं।
- यह परमिट मिजोरम, मणिपुर जैसे विभिन्न राज्यों एवं संघ राज्यक्षेत्रों के लिए आवश्यक है।
- जारी करने वाला प्राधिकरण: केंद्रीय गृह मंत्रालय।
नोट: इनर लाइन परमिट (ILP) सरकार द्वारा जारी एक आधिकारिक यात्रा दस्तावेज होता है। यह भारतीय नागरिकों को सीमित अवधि के लिए संरक्षित क्षेत्रों में जाने की अनुमति देता है।
भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (ICAR) ने ट्रांसपोज़ॉन-एसोसिएटेड प्रोटीन (TnpB) आधारित जीनोम एडिटिंग तकनीक का पेटेंट कराया है।
- ट्रांसपोज़ॉन या जम्पिंग जीन डीएनए अनुक्रम होते हैं। ये एक ही कोशिका के जीनोम के भीतर स्वयं को नए स्थानों पर स्थानांतरित (transpose) कर सकते हैं। दूसरे शब्दों में DNA के एक हिस्से से स्वयं को अलग करके दूसरे हिस्से में जुड़ सकते हैं।
ट्रांसपोज़ॉन-एसोसिएटेड प्रोटीन (TnpB) के बारे में
- यह आणविक कैंची (molecular scissors) के रूप में कार्य करता है, जो एक पूर्वनिर्धारित लक्षित स्थल पर एक जीन के डीएनए को काटता है और इसके अनुक्रम को बदल देता है, जैसा कि क्रिस्पर-एसोसिएटेड कैस9 (CRISPR- Cas9) और Cas12a प्रोटीन करते हैं।
- इस तरह के संपादन (editing) का उद्देश्य उस जीन की अभिव्यक्ति (expression) और कार्य में वांछनीय परिवर्तन लाना है।
- महत्त्व
- कॉम्पैक्ट: यह Cas9 प्रोटीन की तुलना में बहुत छोटा होता है (प्रति अणु 400-500 अमीनो एसिड)।
- आसान स्थानांतरण: वायरल वाहकों के माध्यम से प्रोटीन का स्थानांतरण सीधे कोशिका के अंदर किया जाता है।
आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान (ARIES) के शोधकर्ताओं ने सूर्य के विगत ध्रुवीय चुंबकीय व्यवहार के पुनर्निर्माण के लिए कोडाइकनाल सौर वेधशाला से एक सदी पुराने डेटा का उपयोग किया।
कोडाइकनाल सौर वेधशाला के बारे में
- संचालक: भारतीय ताराभौतिकी संस्थान (Indian Institute of Astrophysics), जो विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (DST) का एक स्वायत्त संस्थान है।
- स्थान: दक्षिण भारत में पालनी पहाड़ियों में स्थित है।
- स्थापना: 1899 में हुई।
- दूरबीनें: WARM (व्हाइट लाइट एक्टिव रीजन मॉनिटर), H-अल्फा, ट्विन टेलिस्कोप।
- यह 1909 में एवरशेड प्रभाव की खोज के लिए जाना जाता है।
- एवरशेड प्रभाव: यह फोटोस्फेरिक परत में सूर्य के धब्बों (sunspots) की उपच्छाया (penumbrae) में देखी जाने वाली सामग्री का लगभग क्षैतिज बहिर्वाह (horizontal outflow) है।