नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद–केंद्रीय अंतर्देशीय मात्स्यिकी अनुसंधान संस्थान (ICAR-CIFRI) ने वैज्ञानिक रिवर रैंचिंग का एक कार्यक्रम आरंभ किया है।
- इसका उद्देश्य गंगा नदी में जलीय जीवन में वृद्धि करना और इसके पारिस्थिकीय संतुलन को पुनर्स्थापित करना है।
रिवर रैंचिंग के बारे में
- रिवर रैंचिंग एक सतत जलीय कृषि पद्धति है। ,इसमें मछलियों का उनके जीवन के शुरुआती चरणों में संरक्षण में पालन किया जाता है, और फिर उन्हें प्राकृतिक पर्यावास में बढ़ने के लिए नदियों में छोड़ दिया जाता है, जहां वयस्क होने पर उनका मत्स्यन किया जाता है।
- यह जलीय जीवन संरक्षण के बाह्य-स्थाने (Ex-situ) तरीकों में से एक है।
- महत्त्व: रैंचिंग नदीय मात्स्यिकी को पुनर्जीवित करने और खतरे में पड़ी देशी प्रजातियों के संरक्षण के लिए सबसे महत्वपूर्ण विकल्पों में से एक है।
- यह सतत मत्स्यन, पर्यावास क्षरण को कम करने और सामाजिक-आर्थिक लाभों को अधिकतम करने में मदद करती है।
नमामि गंगे कार्यक्रम (NGM) के बारे में
- पृष्ठभूमि: यह एक एकीकृत संरक्षण मिशन है। इसे 2014 में मार्च 2021 तक की अवधि के लिए अनुमोदित किया गया था और बाद में इसे NGM 2.0 के रूप में 31 मार्च 2026 तक बढ़ा दिया गया है।
- उद्देश्य: गंगा नदी के प्रदूषण का प्रभावी उन्मूलन और नदी का कायाकल्प करना।
- मुख्य स्तंभ: सीवेज उपचार, रिवर-फ्रंट विकास, नदी की सतह की सफाई, वनीकरण, जैव विविधता, लोक जागरूकता, अपशिष्ट प्रबंधन और गंगा ग्राम।
- कार्यान्वयन एजेंसी: राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (NMCG) और जल शक्ति मंत्रालय के तहत इसके राज्य एवं जिला समकक्ष।
भारत में अंतर्देशीय मत्स्य क्षेत्रक
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