वैज्ञानिक विधि आधारित रिवर रैंचिंग के माध्यम से गंगा नदी में स्वदेशी मछली भंडार का पुनर्स्थापन | Current Affairs | Vision IAS

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  • आईसीएआर-सीआईएफआरआई ने गंगा नदी में मछलियों की संख्या बढ़ाने और पारिस्थितिक संतुलन बहाल करने के लिए नमामि गंगा कार्यक्रम के तहत वैज्ञानिक नदी पशुपालन का संचालन किया।
  • नदी में मछली पालन एक टिकाऊ मत्स्य पालन पद्धति है जिसमें बंदी बनाकर पाली गई मछलियों को वृद्धि और कटाई के लिए नदियों में छोड़ा जाता है, जिससे लुप्तप्राय प्रजातियों के संरक्षण और टिकाऊ मत्स्य पालन में सहायता मिलती है।
  • नमामि गंगा कार्यक्रम (एनजीएम 2.0), जिसे मार्च 2026 तक बढ़ाया गया है, का उद्देश्य प्रदूषण नियंत्रण के माध्यम से गंगा का पुनरुद्धार करना है, जिसका कार्यान्वयन एनएमसीजी और राज्य/जिला निकायों द्वारा किया जाएगा।

In Summary

नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद–केंद्रीय अंतर्देशीय मात्स्यिकी अनुसंधान संस्थान (ICAR-CIFRI) ने वैज्ञानिक रिवर रैंचिंग का एक कार्यक्रम आरंभ किया है।

  • इसका उद्देश्य गंगा नदी में जलीय जीवन में वृद्धि करना और इसके पारिस्थिकीय संतुलन को पुनर्स्थापित करना है।  

रिवर रैंचिंग के बारे में

  • रिवर रैंचिंग एक सतत जलीय कृषि पद्धति है। ,इसमें मछलियों का उनके जीवन के शुरुआती चरणों में संरक्षण में पालन किया जाता है, और फिर उन्हें प्राकृतिक पर्यावास में बढ़ने के लिए नदियों में छोड़ दिया जाता है, जहां वयस्क होने पर उनका मत्स्यन किया जाता है।
    • यह जलीय जीवन संरक्षण के बाह्य-स्थाने (Ex-situ) तरीकों में से एक है।
  • महत्त्व: रैंचिंग नदीय मात्स्यिकी को पुनर्जीवित करने और खतरे में पड़ी देशी प्रजातियों के संरक्षण के लिए सबसे महत्वपूर्ण विकल्पों में से एक है।
    • यह सतत मत्स्यन, पर्यावास क्षरण को कम करने और सामाजिक-आर्थिक लाभों को अधिकतम करने में मदद करती है।

नमामि गंगे कार्यक्रम (NGM) के बारे में

  • पृष्ठभूमि: यह एक एकीकृत संरक्षण मिशन है। इसे 2014 में मार्च 2021 तक की अवधि के लिए अनुमोदित किया गया था और बाद में इसे NGM 2.0 के रूप में 31 मार्च 2026 तक बढ़ा दिया गया है।
  • उद्देश्य: गंगा नदी के प्रदूषण का प्रभावी उन्मूलन और नदी का कायाकल्प करना।
  • मुख्य स्तंभ: सीवेज उपचार, रिवर-फ्रंट विकास, नदी की सतह की सफाई, वनीकरण, जैव विविधता, लोक जागरूकता, अपशिष्ट प्रबंधन और गंगा ग्राम।
  • कार्यान्वयन एजेंसी: राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (NMCG) और जल शक्ति मंत्रालय के तहत इसके राज्य एवं जिला समकक्ष।

भारत में अंतर्देशीय मत्स्य क्षेत्रक

  • भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा मत्स्य उत्पादक देश है। इसकी वैश्विक मत्स्य उत्पादन में लगभग 8% हिस्सेदारी है।
    • कुल मत्स्य उत्पादन में अंतर्देशीय मत्स्य पालन का योगदान 75% से अधिक है।
  • प्रमुख पहलें:
    • मत्स्य पालन और जलीय कृषि अवसंरचना विकास कोष (FIDF): अवसंरचना के निर्माण के लिए धन प्रदान करता है।
    • प्रधान मंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY): मत्स्य उत्पादन और उत्पादकता, प्रौद्योगिकी, हार्वेस्टिंग के बाद की अवसंरचना आदि में महत्वपूर्ण कमियों को दूर करती है।
    • अन्य: राष्ट्रीय समुद्री मत्स्य नीति 2017, नीली क्रांति योजना, आदि।
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प्रधान मंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY)

यह भारत सरकार की एक प्रमुख योजना है जिसका उद्देश्य मत्स्य क्षेत्र के सतत विकास को बढ़ावा देना है। यह 'नीली क्रांति' को सशक्त बनाने और अवसंरचना की कमियों को दूर करने पर केंद्रित है।

मत्स्य पालन और जलीय कृषि अवसंरचना विकास कोष (FIDF)

यह एक वित्तीय सहायता ढाँचा है जिसकी स्थापना समुद्री और अंतर्देशीय मत्स्य पालन में आवश्यक बुनियादी ढाँचे के निर्माण के लिए की गई है, जैसे कि मछली पकड़ने वाले बंदरगाह, कोल्ड स्टोरेज और प्रसंस्करण इकाइयाँ।

अंतर्देशीय मत्स्य पालन

यह मीठे पानी (नदियों, झीलों, तालाबों) या खारे पानी (बैकवाटर, लैगून) में मछली पालन को संदर्भित करता है। भारत के कुल मत्स्य उत्पादन में इसका योगदान 75% से अधिक है।

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