यह सर्वेक्षण जुलाई 2026 से जून 2027 के दौरान किया जाएगा। इसमें प्रवासन की सीमा/ प्रकृति, ग्रामीण-शहरी और अंतर्राज्यीय आवागमन, प्रमुख कारणों आदि पर विस्तृत जानकारी एकत्र की जाएगी।
भारत में प्रवासन के हालिया रुझान
- कुल प्रवासन दर: आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (PLFS) 2020-21 के अनुसार, कुल प्रवासन दर 28.9% रही। इसमें (PLFS) प्रवासन के पैटर्न में पुरुषों और महिलाओं के बीच एक बहुत बड़ा अंतर दिखाई देता है।
- पुरुष बनाम महिला: प्रवासन दर पुरुषों में 10.7% और महिलाओं में 47.9% अनुमानित की गई थी।
प्रवासन के लिए जिम्मेदार महत्वपूर्ण कारक
- लैंगिक रूप से विशिष्ट कारक: महिलाओं में प्रवासन का मुख्य कारण विवाह (86.8%) था, जबकि पुरुषों में मुख्य कारण रोजगार (22.8%) (श्रम बाजार के अवसर) रहा।
- अपकर्ष कारक (Pull factors): यह मुख्य रूप से नौकरी के अवसरों और बेहतर जीवन की संभावनाओं से प्रेरित होता है। उदाहरण के लिए- ग्रामीण से शहरी क्षेत्रों में प्रवासन।
- आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार, 2020-21 में लगभग चार में से एक ग्रामीण भारतीय (26.8%) प्रवासी था।
- प्रतिकर्ष कारक (Push factors): लोग रोजगार के अवसरों की कमी, कम वेतन, प्रतिकूल पर्यावरणीय परिस्थितियों, प्राकृतिक आपदाओं आदि के कारण अपना मूल स्थान छोड़ने को विवश होते हैं।

चुनौतियों से निपटने के लिए उठाए गए प्रमुख कदम
- संचालित ग्रामीण विकास पहलें: दीनदयाल अंत्योदय योजना - राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM); ग्रामीण रोजगार को मजबूत करने के लिए विकसित भारत- रोजगार और आजीविका की गारंटी मिशन (ग्रामीण) विधेयक, 2025 आदि।
- शहरी समुत्थानशीलता पहलें: अटल कायाकल्प और शहरी परिवर्तन मिशन (AMRUT); स्मार्ट सिटीज़ मिशन; पारगमन-उन्मुख विकास (ToD) का कार्यान्वयन आदि।
- श्रमिकों का कल्याण: प्रधान मंत्री श्रम योगी मान-धन योजना (PMSYM); प्रधान मंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (PMGKAY); प्रवासियों के लिए एक मजबूत सुरक्षा जाल सुनिश्चित करने हेतु एक राष्ट्र एक राशन कार्ड (ONORC) योजना आदि।