बेंचमार्क 10-वर्षीय बॉण्ड यील्ड लगभग 6.77% पर बंद हुई। यह पिछले सत्र से बहुत अधिक है और मध्य जनवरी 2025 के बाद का सबसे ऊँचा स्तर है।
बॉण्ड यील्ड के बारे में
- बॉण्ड यील्ड वह वार्षिक लाभ यानी रिटर्न है, जो किसी निवेशक को बॉण्ड को परिपक्वता (maturity) तक रखने पर मिलता है। इसमें अर्जित ब्याज और मूलधन, दोनों शामिल होते हैं।
- बॉण्ड यील्ड और बॉण्ड की कीमतों में उल्टा या प्रतिकूल संबंध होता है।
- द्वितीयक बाज़ार में यील्ड बढ़ने पर बॉण्ड की कीमत घटती है।
- ऊँची बॉण्ड यील्ड का प्रभाव:
- पहले से जारी बॉण्ड का बाजार मूल्य घटता है।
- कंपनियों और सरकार के लिए उधार लेना महंगा (उच्च ब्याज दर के कारण) हो जाता है।
आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में पावर गैप इंडेक्स का उल्लेख किया गया है। इसमें यह दिखाया गया है कि भारत अपनी पूरी रणनीतिक क्षमता से कम स्तर पर कार्य कर रहा है।
पावर गैप इंडेक्स के बारे में
- यह एशिया पावर इंडेक्स से प्रेरित एक द्वितीयक विश्लेषण है।
- एशिया पावर इंडेक्स ऑस्ट्रेलिया स्थित लोवी इंस्टीट्यूट द्वारा प्रत्येक वर्ष जारी किया जाता है। यह एशियाई देशों के संसाधनों और प्रभाव के आधार पर उनकी सापेक्ष शक्ति को मापता है।
- इसमें 27 देशों और क्षेत्रों को 8 प्रमुख विषयों और 131 संकेतकों के आधार पर रैंक प्रदान की गई है। इन विषयों में शामिल हैं:
- सैन्य क्षमता और रक्षा नेटवर्क
- आर्थिक क्षमता और आर्थिक संबंध
- कूटनीतिक और सांस्कृतिक प्रभाव
- प्रतिरोधकता (Resilience) और भविष्य के संसाधन
- 2025 संस्करण के अनुसार, भारत का पावर गैप अंक –4.0 है। यह अंक दर्शाता है कि भारत अभी अपनी पूरी रणनीतिक क्षमता का पूरा उपयोग नहीं कर पा रहा है।
भारत 2030–31 तक ऋण–जीडीपी अनुपात 50±1 प्रतिशत तक सीमित रखने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। बजट अनुमान (BE) 2026–27 में यह अनुपात जीडीपी का 55.6 प्रतिशत आंका गया है।
- अब ऋण–जीडीपी अनुपात को मुख्य नीतिगत लक्ष्य के रूप में अधिक उपयोग किया जा रहा है। पहले राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन (FRBM) अधिनियम, 2003 के तहत राजकोषीय घाटा के प्रबंधन को मुख्य लक्ष्य रखा गया था।
- FRBM अधिनियम का उद्देश्य सरकार की राजकोषीय नीति को संतुलित और सतत बनाना है, ताकि अर्थव्यवस्था में स्थिरता बनी रहे।
ऋण–जीडीपी अनुपात के बारे में
- यह एक वित्तीय संकेतक है। यह किसी देश की जीडीपी की तुलना में उसका कुल सार्वजनिक (सरकारी) ऋण दर्शाता है।
- इससे यह पता चलता है कि देश की ऋण चुकाने की क्षमता कैसी है।
- जितना अधिक ऋण–जीडीपी अनुपात होता है, उतना ही ऋण चुकाने से जुड़ा जोखिम बढ़ता है और डिफॉल्ट (चूक) की आशंका भी अधिक हो जाती है।
केंद्रीय बजट ने अग्रिम मूल्य निर्धारण समझौता (Advance Pricing Agreement: APA) के नियमों को तर्कसंगत बनाया है। यह निवेशक-अनुकूल कर व्यवस्था का संकेत देता है।
आईटी (IT) क्षेत्रक के लिए प्रमुख बदलाव:
- विवादों और मुकदमों को कम करने के लिए आईटी सेवाओं को 'सूचना प्रौद्योगिकी सेवाओं' की एक ही श्रेणी में रखा गया है। इसके लिए एक समान 'सेफ हार्बर मार्जिन' तय किया गया है।
- सेफ हार्बर पात्रता की सीमा ₹300 करोड़ से बढ़ाकर ₹2,000 करोड़ कर दी गई है। साथ ही, स्वचालित और नियम-आधारित मंजूरी की व्यवस्था की गई है।
- अग्रिम मूल्य निर्धारण समझौते (APA) की प्रक्रिया को तेज किया गया है ताकि इसे 2 साल (6 महीने विस्तार के साथ) के भीतर पूरी की जा सके।
- अग्रिम मूल्य निर्धारण समझौता वास्तव में करदाता और कर विभाग के बीच पहले से किया गया समझौता होता है। इसमें तय किया जाता है कि कुछ लेनदेन के लिए ट्रांसफर प्राइसिंग की विधि क्या होगी। इससे कर में निश्चितता आती है और विवाद कम होते हैं।
- ट्रांसफर प्राइसिंग (Transfer Pricing) का अर्थ: एक ही समूह की अलग-अलग कंपनियों के बीच लेनदेन के लिए उचित मूल्य तय करना, ताकि कर से बचने के लिए मुनाफे को एक जगह से दूसरी जगह न भेजा जा सके।
- इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि समूह की कंपनियों के बीच कारोबार बाजार मूल्य को दर्शाए।
उच्चतम न्यायालय ने ‘प्रदूषक द्वारा भुगतान’ (Polluter Pays) सिद्धांत पर ज़ोर दिया है और बड़ी कंपनियों पर पर्यावरण कानूनों के उल्लंघन पर कड़े दंड लगाने को कहा है।
निर्णय के मुख्य बिंदु
- प्रतीकात्मक नहीं, प्रभावी दंड: न्यायालय ने कहा कि जुर्माना ऐसा होना चाहिए जो सच में कानून का डर पैदा करे, क्योंकि कम राशि के जुर्माने बड़ी कंपनियों पर कोई असर नहीं डालते।
- आर्थिक क्षमता के अनुसार दंड: दंड नियमों का उल्लंघन करने वाली संस्था की वित्तीय क्षमता के अनुपात में होना चाहिए। सभी पर समान जुर्माना लगाने से बड़ी कंपनियों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता।
- ‘प्रदूषक द्वारा भुगतान’ सिद्धांत की पुनः पुष्टि: जो भी पर्यावरण को नुकसान पहुँचाएगा, उसे उसकी प्रतिपूर्ति यानी भरपाई की लागत खुद उठानी होगी।
- संविधान के अनुच्छेद 21 से संबंध: पर्यावरण संरक्षण को अनुच्छेद 21 (जीवन/प्राण के अधिकार) से जोड़ा गया और संधारणीय विकास के लिए कानूनों को सख्ती से लागू करने की आवश्यकता जताई गई।
16वें वित्त आयोग ने सिफारिश की है कि लू (हीटवेव) और आकाशीय बिजली गिरने को भारत में राष्ट्रीय स्तर पर अधिसूचित आपदाओं की सूची में शामिल किया जाए।
‘राष्ट्रीय स्तर पर अधिसूचित आपदाओं’ के बारे में
- ये वे विशेष आपदा श्रेणियाँ हैं, जिन्हें आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के तहत मान्यता दी गई है।
- इनका उद्देश्य आपदा के समय राहत, त्वरित कार्यवाही और वित्तीय सहायता की उपलब्धता सुनिश्चित करना होता है।
- ऐसी आपदाओं के लिए राज्य आपदा मोचन निधि (SDRF) और राष्ट्रीय आपदा मोचन निधि (NDRF) से सहायता दी जाती है।
- वर्तमान में इस सूची में अग्रलिखित आपदाएं शामिल हैं: चक्रवात, सूखा, भूकंप, आगजनी, बाढ़, सुनामी, ओलावृष्टि, भूस्खलन, हिमस्खलन, बादल फटना, कीट हमले, पाला और शीतलहर।
शोधकर्ताओं ने बताया है कि अल्बर्ट आइंस्टीन का सामान्य सापेक्षता का सिद्धांत (General Theory of Relativity) अब तक किए गए सबसे कठिन परीक्षण में सफल रहा है।
सामान्य सापेक्षता सिद्धांत के बारे में
- यह सिद्धांत 1915 में प्रकाशित हुआ था। यह इससे 10 वर्ष पहले प्रकाशित आइंस्टीन के विशेष सापेक्षता सिद्धांत का विस्तार है।
- यह सिद्धांत बताता है कि द्रव्यमान और ऊर्जा अंतरिक्ष-समय (space-time) को 'वक्र' (curve) कर देते हैं, जिसे हम गुरुत्वाकर्षण के रूप में अनुभव करते हैं। इसके अनुसार गुरुत्वाकर्षण कोई बल नहीं है।
- यह बताता है कि गुरुत्वाकर्षण की भी एक गति होती है, जो प्रकाश की गति के बराबर होती है।
- जितना अधिक द्रव्यमान होगा, उतना ही वह अंतरिक्ष और समय को अधिक वक्र करेगा यानी मोड़ेगा।
- महत्त्व:
- यह सिद्धांत गुरुत्वाकर्षण को समझने में मदद करता है।
- ब्लैक होल के विलय, गुरुत्वीय तरंगों जैसी घटनाओं का पूर्वानुमान करता है।
खगोलविदों ने कुछ दुर्लभ “टाइम-वॉर्प्ड” (समय-विकृत) सुपरनोवा की पहचान की है। इनमें गुरुत्वीय लेंसिंग के कारण सुपरनोवा का प्रकाश दो हिस्सों में बंट गया:
- एक हिस्सा अभी पृथ्वी तक पहुँच गया है, जबकि दूसरा हिस्सा अंतरिक्ष-समय विरूपण (स्पेस-टाइम डिस्टॉर्शन) के कारण दशकों बाद पहुंचेगा।
- जब कोई तारा अपने जीवन के अंतिम चरण में पहुंचता है और प्रकाश के प्रबल विस्फोट के साथ फट जाता है, तो उसे सुपरनोवा कहा जाता है।
- खोज का महत्त्व:
- इससे ब्रह्मांड के विस्तार की गति मापने में मदद मिलेगी।
- प्रारंभिक ब्रह्मांड के इतिहास को समझने के लिए महत्वपूर्ण जानकारी मिलेगी।
गुरुत्वीय लेंसिंग के बारे में
- गुरुत्वीय लेंसिंग तब घटित होती है जब गैलेक्सी क्लस्टर जैसा कोई बहुत भारी खगोलीय पिंड अंतरिक्ष-समय को इतना मोड़ देता है कि उसके पास से गुजरने वाला प्रकाश का मार्ग साफ़ तौर पर मुड़ या विकृत हो जाता है, बिल्कुल किसी लेंस की तरह।
- जिस पिंड के कारण प्रकाश मुड़ता है, उसे गुरुत्वीय लेंस (Gravitational Lens) कहा जाता है।