यह घोषणा-पत्र भारतीय विदेश मंत्री, अरब देशों के विदेश मंत्रियों और अरब लीग के महासचिव की भागीदारी के साथ हस्ताक्षरित किया गया है।
दिल्ली घोषणा-पत्र की मुख्य विशेषताएं

- शांति और सुरक्षा: बहुपक्षवाद (Multilateralism) का समर्थन, देशों की संप्रभुता का सम्मान, आतंकवाद-रोधी प्रयास और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधारों पर बल।
- आर्थिक स्थिरता और सुरक्षा: आर्थिक एकीकरण को बढ़ावा देने के लिए एक क्षेत्रीय ढांचे के रूप में स्वेज नहर-लाल सागर आर्थिक और समुद्री विकास पहल (STREAM) का उल्लेख किया गया।
- देश-विशिष्ट मुख्य बिंदु:
- फिलिस्तीन: एक संप्रभु, स्वतंत्र और व्यवहार्य फिलिस्तीन राज्य का समर्थन किया गया। गाजा में युद्धविराम के संबंध में 2025 के शर्म अल-शेख शांति शिखर सम्मेलन का स्वागत किया गया।
- यमन: हूती लड़ाकों द्वारा किए गए हमलों की निंदा की गई; महत्वपूर्ण बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य की सुरक्षा पर जोर दिया गया आदि।
अरब लीग के बारे में
- उत्पत्ति: अरब लीग अरब देशों का एक अंतर-सरकारी संगठन है। इसमें मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका में विस्तारित संपूर्ण अरब-क्षेत्र के देश शामिल हैं। वर्ष 1944 में अलेक्जेंड्रिया प्रोटोकॉल को अपनाया गया था। इसके अनुसरण में 1945 में काहिरा में अरब लीग की स्थापना की गई थी।
- सदस्य: वर्तमान में 22 अरब देश इसके सदस्य हैं।
- संस्थापक सदस्य: इसके संस्थापक सदस्यों में मिस्र, इराक, लेबनान, सऊदी अरब, सीरिया, जॉर्डन (तब ट्रांसजॉर्डन) और यमन शामिल हैं।
- मुख्यालय: काहिरा, मिस्र।
भारत के लिए अरब लीग का महत्त्व
- आर्थिक: भारत और अरब देशों के बीच 240 बिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक का व्यापार होता है।
- भारत अपनी जरूरत का 47% कच्चा तेल और 50% उर्वरक व संबंधित उत्पाद अरब लीग के देशों से आयात करता है।
- सामरिक महत्त्व: भारत का अधिकांश विदेशी व्यापार स्वेज नहर, लाल सागर और अदन की खाड़ी से होकर गुजरता है।
- प्रवासी भारतीय: अरब लीग के देशों में 90 लाख (9 मिलियन) से अधिक भारतीय प्रवासी रहते हैं।