भारत और अरब लीग (लीग ऑफ़ अरब स्टेट्स) के बीच दिल्ली घोषणा-पत्र सम्पन्न हुआ | Current Affairs | Vision IAS
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In Summary

  • भारत और अरब लीग के सदस्यों द्वारा हस्ताक्षरित दिल्ली घोषणापत्र में शांति, सुरक्षा, बहुपक्षवाद, आतंकवाद विरोधी उपायों और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधारों पर जोर दिया गया है।
  • यह घोषणा STREAM पहल के माध्यम से आर्थिक एकीकरण का समर्थन करती है और फिलिस्तीन और यमन जैसे विशिष्ट देशों के मुद्दों को संबोधित करती है।
  • 1945 में 22 सदस्यों के साथ स्थापित अरब लीग, भारत की अर्थव्यवस्था, रणनीतिक व्यापार मार्गों और प्रवासी भारतीयों के लिए महत्वपूर्ण है।

In Summary

यह घोषणा-पत्र भारतीय विदेश मंत्री, अरब देशों के विदेश मंत्रियों और अरब लीग के महासचिव की भागीदारी के साथ हस्ताक्षरित किया गया है।

दिल्ली घोषणा-पत्र की मुख्य विशेषताएं

  • शांति और सुरक्षा: बहुपक्षवाद (Multilateralism) का समर्थन, देशों की संप्रभुता का सम्मान, आतंकवाद-रोधी प्रयास और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधारों पर बल।
  • आर्थिक स्थिरता और सुरक्षा: आर्थिक एकीकरण को बढ़ावा देने के लिए एक क्षेत्रीय ढांचे के रूप में स्वेज नहर-लाल सागर आर्थिक और समुद्री विकास पहल (STREAM) का उल्लेख किया गया।
  • देश-विशिष्ट मुख्य बिंदु:
    • फिलिस्तीन: एक संप्रभु, स्वतंत्र और व्यवहार्य फिलिस्तीन राज्य का समर्थन किया गया। गाजा में युद्धविराम के संबंध में 2025 के शर्म अल-शेख शांति शिखर सम्मेलन का स्वागत किया गया।
    • यमन: हूती लड़ाकों द्वारा किए गए हमलों की निंदा की गई; महत्वपूर्ण बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य की सुरक्षा पर जोर दिया गया आदि।

अरब लीग के बारे में

  • उत्पत्ति: अरब लीग अरब देशों का एक अंतर-सरकारी संगठन है। इसमें मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका में विस्तारित संपूर्ण अरब-क्षेत्र के देश शामिल हैं। वर्ष 1944 में अलेक्जेंड्रिया प्रोटोकॉल को अपनाया गया था। इसके अनुसरण में 1945 में काहिरा में अरब लीग की स्थापना की गई थी।
  • सदस्य: वर्तमान में 22 अरब देश इसके सदस्य हैं।  
    • संस्थापक सदस्य: इसके संस्थापक सदस्यों में मिस्र, इराक, लेबनान, सऊदी अरब, सीरिया, जॉर्डन (तब ट्रांसजॉर्डन) और यमन शामिल हैं।       
  • मुख्यालय: काहिरा, मिस्र।

भारत के लिए अरब लीग का महत्त्व

  • आर्थिक: भारत और अरब देशों के बीच 240 बिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक का व्यापार होता है। 
    • भारत अपनी जरूरत का 47% कच्चा तेल और 50% उर्वरक व संबंधित उत्पाद अरब लीग के देशों से आयात करता है।
  • सामरिक महत्त्व: भारत का अधिकांश विदेशी व्यापार स्वेज नहर, लाल सागर और अदन की खाड़ी से होकर गुजरता है।
  • प्रवासी भारतीय: अरब लीग के देशों में 90 लाख (9 मिलियन) से अधिक भारतीय प्रवासी रहते हैं।
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अलेक्जेंड्रिया प्रोटोकॉल

यह एक समझौता था जिसे 1944 में अपनाया गया था और इसने बाद में 1945 में अरब लीग की स्थापना का मार्ग प्रशस्त किया।

अरब लीग

यह मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका के अरब देशों का एक अंतर-सरकारी संगठन है, जिसकी स्थापना 1945 में हुई थी। इसका मुख्यालय काहिरा, मिस्र में है और यह क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा देता है।

बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य

लाल सागर को अदन की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ने वाला एक संकीर्ण जलडमरूमध्य। यह वैश्विक ऊर्जा और व्यापार के लिए एक प्रमुख समुद्री मार्ग है।

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