भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका ने ऐतिहासिक व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए | Current Affairs | Vision IAS
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In Summary

  • अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर पारस्परिक शुल्क को 25% से घटाकर 18% कर दिया है, साथ ही अगस्त 2025 में लगाए गए अतिरिक्त 25% शुल्क को भी वापस ले लिया है।
  • भारत ने ऊर्जा और प्रौद्योगिकी सहित अमेरिकी वस्तुओं के आयात को बढ़ाने पर सहमति जताई है, जबकि वह धीरे-धीरे अपने स्वयं के टैरिफ और गैर-टैरिफ बाधाओं को कम करेगा।
  • यह समझौता द्विपक्षीय संबंधों में एक रणनीतिक पुनर्समायोजन का प्रतीक है, जो आर्थिक अवसरों को बढ़ाता है, भारत की वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला स्थिति को मजबूत करता है और व्यापक आर्थिक स्थिरता को बढ़ावा देता है।

In Summary

व्यापार समझौते के बारे में

  • 'मेड इन इंडिया' उत्पादों पर अमेरिकी पारस्परिक प्रशुल्क (Reciprocal tariffs) को तत्काल प्रभाव से 25% से घटाकर 18% कर दिया गया है। साथ ही, अमेरिका ने अतिरिक्त 25% प्रशुल्क भी वापस ले लिया है।
    • अगस्त 2025 में, अमेरिका ने भारत पर 50% तक का प्रशुल्क लगाया था। इसमें 25% पारस्परिक प्रशुल्क और रूसी तेल आयात को लेकर 25% अतिरिक्त प्रशुल्क शामिल था।
  • रिपोर्ट के अनुसार, भारत अमेरिकी वस्तुओं के आयात को बढ़ाने पर सहमत हुआ है। इसमें ऊर्जा, प्रौद्योगिकी उत्पादों और परमाणु उपकरणों के क्षेत्रक में $500 बिलियन से अधिक का आयात शामिल है।
    • भारत धीरे-धीरे अमेरिका के खिलाफ अपनी प्रशुल्क और गैर-प्रशुल्क बाधाओं को कम करेगा।

समझौते का महत्त्व

  • आर्थिक महत्त्व: यह किसानों; सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs); और कुशल श्रमिकों के लिए भारत में विश्व हेतु 'मेक, डिजाइन और इनोवेट' करने के अवसर प्रदान करेगा। 
    • यह भारत को अमेरिका से आधुनिक तकनीक प्राप्त करने में भी मदद करेगा।
  • द्विपक्षीय संबंधों में रणनीतिक सुधार: यह समझौता प्रशुल्क-आधारित तनाव के दौर को समाप्त करता है तथा भारत-अमेरिका रणनीतिक एवं आर्थिक जुड़ाव में विश्वास को बढ़ावा देता है।
  • भू-राजनीतिक प्रभाव: यह वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भारत की स्थिति को मजबूत करेगा। इससे संभावित रूप से वैश्विक व्यापार और विनिर्माण में चीन के आधिपत्य को प्रतिसंतुलित किया जा सकेगा। 
  • व्यापक आर्थिक स्थिरता: वैश्विक अनिश्चितता के बीच, यह समझौता पूंजी प्रवाह को स्थिर करने, रुपये को मजबूती प्रदान करने और निवेशक विश्वास सुधारने में मदद कर सकता है।

भारत-अमेरिका व्यापार की स्थिति

  • शीर्ष व्यापारिक भागीदार: अमेरिका भारत के शीर्ष व्यापारिक भागीदारों में से एक है। भारत का अमेरिका के साथ व्यापार अधिशेष (Trade Surplus) है, जो मुख्य रूप से सेवाओं और उच्च मूल्य वाली वस्तुओं के निर्यात से संचालित है।
  • FDI निवेश: अमेरिका भारत में तीसरा सबसे बड़ा निवेशक है, जिसने 2000-2025 के बीच $70.65 बिलियन का विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) किया है।
  • व्यापार की मात्रा: वित्त वर्ष 2025 में द्विपक्षीय व्यापार $132.2 बिलियन के रिकॉर्ड स्तर पर रहा, जो वित्त वर्ष 2024 में $119.71 बिलियन था।
  • प्रमुख निर्यात और आयात:
    • भारत से निर्यात: फार्मास्यूटिकल्स, इंजीनियरिंग वस्तुएं, इलेक्ट्रॉनिक्स, रत्न और आभूषण आदि।
    • अमेरिका से आयात: कच्चा तेल, द्रवीकृत प्राकृतिक गैस (LNG), विमान और पुर्जे, रक्षा उपकरण आदि।
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LNG

Liquefied Natural Gas, natural gas that has been cooled down to a liquid state for easier transportation and storage. It is a significant component of India's energy imports.

FDI

Foreign Direct Investment (FDI) is an investment made by a firm or individual in one country into business interests located in another country. It typically involves establishing business operations or acquiring business assets, including an interest in a foreign company.

Trade Surplus

A situation where a country's exports exceed its imports in value. A large trade surplus can indicate strong export performance but may also suggest insufficient domestic demand or currency undervaluation, potentially leading to international trade tensions.

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