नीति आयोग ने विकसित भारत और नेट जीरो की दिशा में परिदृश्यों पर तीन अध्ययन रिपोर्ट जारी की हैं। ये रिपोर्ट्स एक समग्र रोडमैप, व्यापक आर्थिक निहितार्थ और वित्त-पोषण की आवश्यकताओं पर केंद्रित हैं।
- विकसित भारत 2047: इसका लक्ष्य भारत को 2047 तक एक विकसित राष्ट्र और 30 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाना है।
- नेट जीरो उत्सर्जन लक्ष्य: भारत ने 2070 तक नेट जीरो ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन प्राप्त करने की प्रतिबद्धता प्रकट की है।
प्रमुख व्यापक आर्थिक निहितार्थ
- जीडीपी पर कम प्रभाव और उच्च निवेश की आवश्यकता: नेट जीरो का दीर्घकालिक जीडीपी पर सीमित प्रभाव पड़ेगा, लेकिन इसके लिए भारी निवेश की आवश्यकता होगी।
- निवेश-आधारित संवृद्धि की ओर बढ़ना: नेट जीरो लक्ष्य के अनुसरण में अर्थव्यवस्था संरचनात्मक रूप से 'उपभोग-आधारित' संवृद्धि से 'पूंजी-प्रधान' संवृद्धि की ओर पुनर्संतुलित होगी।
- औद्योगिक विस्तार: स्वच्छ ऊर्जा और विनिर्माण के कारण 2050 तक औद्योगिक GVA (सकल मूल्य वर्धित) बढ़कर लगभग 33% होने का अनुमान है।
- जीवाश्म ईंधन आधारित विनिर्माण में संकुचन (कमी) आने का अनुमान है।
- रोजगार का पुनरावंटन: नौकरियां जीवाश्म ईंधन क्षेत्रकों से हटकर नवीकरणीय ऊर्जा, निर्माण, परिवहन और स्वच्छ विनिर्माण की ओर बढ़ेंगी। हालांकि, कुल रोजगार पर इसका प्रभाव बहुत कम रहेगा।
- आयात निर्भरता में कमी: ईंधन आयात बिल जो वर्तमान में जीडीपी का 4% है, उसके 2070 तक घटकर 0.2% होने का अनुमान है।
नीतिगत सुझाव
- सभ्यतागत संधारणीयता: मिशन LiFE (पर्यावरण के लिए जीवन शैली), चक्रीय अर्थव्यवस्था और कुशल डिजाइन के माध्यम से पारंपरिक निम्न-कार्बन उत्सर्जन प्रथाओं को बढ़ावा देना चाहिए। इससे विकास को कल्याण और समुत्थानशीलता (Resilience) के इर्द-गिर्द फिर से परिभाषित किया जा सकेगा।
- नेट-जीरो अवसंरचना को बढ़ावा: ग्रिड्स, शहरी अवसंरचना, इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) और लॉजिस्टिक्स में सार्वजनिक निवेश को प्राथमिकता देनी चाहिए। साथ ही, मिश्रित वित्त (सार्वजनिक-निजी वित्त-पोषण) का लाभ उठाना चाहिए और ऐसी परियोजनाओं को तैयार करना चाहिए, जिन्हें बैंक आसानी से ऋण दे सके।
- ग्रीन जॉब्स मिशन: लक्षित पुन:कौशल विकास (Reskilling) और भविष्य की तैयारी के लिए 'ग्रीन-डिजिटल स्किल्स स्टैक' के साथ श्रम-प्रधान हरित क्षेत्रकों को बढ़ावा देना चाहिए।
- हरित अनुसंधान एवं विकास को प्रोत्साहन: स्वच्छ-तकनीक नवाचार और इनके उपयोग में तेजी लाने के लिए सार्वजनिक-निजी अनुसंधान एवं विकास को वैश्विक मानकों तक बढ़ाना चाहिए।
- संस्थागत सुदृढ़ीकरण: विद्युत वितरण कंपनियों (डिस्कॉम/DISCOMs) और ऊर्जा क्षेत्रक से जुड़ी संस्थाओं में सुधार करना चाहिए; विनियमों को सरल बनाना चाहिए और तेजी से परिवर्तन के लिए 'सिंगल-विंडो अनुमोदन' को सक्षम करना चाहिए।