नीति आयोग ने 'विकसित भारत और नेट जीरो के लिए वित्त-पोषण की आवश्यकताएं' पर रिपोर्ट जारी की | Current Affairs | Vision IAS

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  • ग्लोबल क्लाइमेट फाइनेंस 2023 में $1.9 ट्रिलियन तक पहुंच गया, जो 1.5°C टारगेट के लिए ज़रूरी $6-9 ट्रिलियन से बहुत कम है, जिसमें अडैप्टेशन के बजाय कर्ज पर फोकस है।
  • भारत को नेट ज़ीरो के लिए 2070 तक $22.7 ट्रिलियन की ज़रूरत है, जिसमें मुख्य रूप से पावर सेक्टर (82%) में $6.5 ट्रिलियन का फंडिंग गैप है।
  • भारत की पहलों में एक ड्राफ्ट नेशनल क्लाइमेट फाइनेंस टैक्सोनॉमी, एक्सपैंडेड कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग स्कीम (CCTS), और SEBI के BRSR और RBI फ्रेमवर्क के ज़रिए सस्टेनेबिलिटी डिस्क्लोजर शामिल हैं।

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जलवायु वित्त-पोषण का वर्तमान परिदृश्य

वैश्विक स्तर: जलवायु कार्रवाई के लिए वित्त वर्ष 2023 में वार्षिक निवेश बढ़कर 1.9 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर हो गया है। यह 1.5°C के लक्ष्य पर बने रहने के लिए आवश्यक 6-9 ट्रिलियन डॉलर से बहुत कम है।

  • यह मुख्य रूप से ऋण पर आधारित है, जबकि 'अनुकूलन' और शुरुआती चरण की तकनीकों के लिए वित्त-पोषण की कमी बनी हुई है।
  • भारत: भारत के नेट जीरो (शुद्ध शून्य कार्बन उत्सर्जन) लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए 2070 तक कुल 22.7 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर के निवेश की आवश्यकता है।
    • भारत को 2070 तक 6.5 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर के वित्त-पोषण अंतराल का सामना करना पड़ सकता है। इस अंतराल में विद्युत क्षेत्रक की हिस्सेदारी 82% है।

भारत के जलवायु वित्त फ्रेमवर्क को मजबूत करने की हालिया पहलें

  • मसौदा राष्ट्रीय जलवायु वित्त वर्गीकरण: वित्त मंत्रालय द्वारा आर्थिक गतिविधियों को जलवायु-समर्थक, अनुकूलन और संक्रमण-संरेखित क्षेत्रकों में वर्गीकृत करना चाहिए।
  • कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग स्कीम (CCTS): पहले चार क्षेत्रकों (एल्यूमीनियम, सीमेंट, लुगदी व कागज और क्लोर-क्षार) के लिए ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन तीव्रता (GEI) लक्ष्य जारी किए गए थे।
    • हाल ही में, पेट्रोलियम रिफाइनरी, पेट्रोकेमिकल्स, टेक्सटाइल्स (वस्त्र), और सेकेंडरी एल्युमीनियम को भी इसके दायरे में लाया गया है।
  • संधारणीयता प्रकटीकरण: जैसे SEBI का BRSR (बिजनेस रिस्पांसिबिलिटी एंड सस्टेनेबिलिटी रिपोर्टिंग) फ्रेमवर्क और RBI का जलवायु-संबंधी वित्तीय जोखिमों पर मसौदा प्रकटीकरण फ्रेमवर्क। 
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जलवायु-संबंधी वित्तीय जोखिम

ये वे जोखिम हैं जो जलवायु परिवर्तन या जलवायु परिवर्तन को कम करने के प्रयासों से उत्पन्न होते हैं और वित्तीय स्थिरता को प्रभावित कर सकते हैं। इसमें भौतिक जोखिम (जैसे चरम मौसम की घटनाएं) और संक्रमण जोखिम (जैसे नीति परिवर्तन) शामिल हैं।

BRSR (बिजनेस रिस्पांसिबिलिटी एंड सस्टेनेबिलिटी रिपोर्टिंग)

यह भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) द्वारा अनिवार्य एक रिपोर्टिंग ढाँचा है, जो कंपनियों को उनके पर्यावरणीय, सामाजिक और शासन (ESG) प्रदर्शन पर जानकारी का खुलासा करने के लिए कहता है। यह धारणीयता (sustainability) को बढ़ावा देता है।

ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन तीव्रता (GEI)

यह किसी विशेष आर्थिक गतिविधि या उत्पाद की प्रति इकाई (जैसे, उत्पादन की एक इकाई) उत्सर्जित ग्रीनहाउस गैसों की मात्रा को मापता है। यह उत्सर्जन को कम करने के प्रयासों की दक्षता को आंकने में मदद करता है।

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